झारखंड में नियमों को ठेंगा दिखा बिक रहा खुला मांस: हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, स्वास्थ्य सचिव को मिला ये निर्देश

Published by : Sameer Oraon Updated At : 29 Apr 2026 9:14 PM

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झारखंड हाईकोर्ट, Pic Credit- X

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य भर में दुकानों में खुलेआम कटे हुए बकरे और मुर्गे की बिक्री के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ ने सरकार के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए कहा कि विभाग केवल पत्र लिखकर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं. अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को दो महीने के भीतर 'मॉडल नियमावली' तैयार कर पेश करने का सख्त निर्देश दिया है.

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Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में खुले में बिकने वाले मांस और नियमों के उल्लंघन को लेकर राज्य सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुधवार को श्यामानंद पांडेय द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासनिक ढुलमुल रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में अब तक केवल कागजी ‘फेंकाफेंकी’ हो रही है और धरातल पर कोई ठोस नियमावली तैयार नहीं की गई है, जो जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.

अपर मुख्य सचिव को कमान संभालने का निर्देश

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए गए जवाब को पूरी तरह से अपर्याप्त और असंतोषजनक पाया. कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एक विभाग दूसरे को पत्र लिख रहा है, लेकिन समाधान की दिशा में कोई प्रगति नहीं दिख रही है. इसके बाद, खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करने का आदेश दिया. अदालत ने सरकार को दो महीने का समय देते हुए निर्देशित किया कि हर हाल में ‘मॉडल नियमावली’ तैयार कर कोर्ट के समक्ष पेश की जाए.

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फूड सेफ्टी रेगुलेशन-2011 का क्या हुआ?

हाइकोर्ट ने सरकार से तीखा सवाल पूछा कि राज्य में ‘फूड सेफ्टी रेगुलेशन-2011’ का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शुभम कटारुका ने पक्ष रखते हुए कहा कि 19 दिसंबर 2025 को पिछली सुनवाई में उच्चाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है. दुकानों के बाहर कटे हुए जानवरों का प्रदर्शन न केवल एफआईसीसीआई (FICCI) के नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का भी स्पष्ट उल्लंघन है. प्रार्थी ने दलील दी कि जब तक नई नियमावली नहीं बनती, तब तक पुराने नियमों को भी सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा है.

22 जुलाई को होगी अगली जवाबदेही तय

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है. उल्लेखनीय है कि एकल पीठ ने जुलाई 2023 में ही स्लॉटर हाउस के संचालन और मांस बिक्री पर नियम बनाने का आदेश दिया था, जिसे अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है. सरकार की ओर से अधिवक्ता योगेश मोदी ने पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट के कड़े सवालों के सामने दलीलें कमजोर नजर आईं. अब सबकी नजरें स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या दो महीने में झारखंड को मांस बिक्री को लेकर नई नियमावली मिल पाएगी.

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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