भारत-चीन तनाव के बीच गोपालगंज में इंडियन मोबाइल की बढ़ी डिमांड
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 22 Jun 2020 11:43 AM
चीन को भारतीय बाजार ने सबक सिखाना शुरू कर दिया है. चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का असर मोबाइल से लेकर टैब और लैपटॉप पर भी नजर आ रहा है.
गोपालगंज : चीन को भारतीय बाजार ने सबक सिखाना शुरू कर दिया है. चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का असर मोबाइल से लेकर टैब और लैपटॉप पर भी नजर आ रहा है. मोबाइल मार्केट में 70 फीसदी चीन का हिस्सा होने के बावजूद लोग अब उसे ठुकरा कर महंगा विकल्प अपना रहे हैं. लैपटॉप और टैब में स्थिति बेहतर है, जहां ग्राहकों के पास चाइनीज उत्पादों के मुकाबले मार्केट में अच्छे ब्रांड उपलब्ध हैं. इंडियन मोबाइल का मूल्य भी बाजार में दो से तीन हजार रुपये अचानक बढ़ा दिया गया है. चार्जर से लेकर मोबाइल कवर तक का मूल्य तेजी से बढ़ा है.
मोबाइल बाजार में अनेक चीनी कंपनियां ऐसी हैं जो अपना माल भारत में बनाकर बेचती हैं. इन कंपनियों पर मेड इन इंडिया लिखा होने के कारण भी कुछ ग्राहक गुमराह होते हैं. जबकि इसकी असेंबलिंग ही भारत में होती है, बाकी सारा माल चीन से ही आता है. हालांकि अब लोग इस बारे में भी जागरूक हो रहे हैं.
गोपालगंज में मोबाइल और उसकी एसेसरीज का बाजार करीब तीन करोड़ रुपये का है, इसका सबसे बड़ा केंद्र शहर का मेन रोड, श्याम सिनेमा रोड, चंद्रगोखुल रोड, थाना रोड का मार्केट है. यहां पर चाइनीज आइटम के खिलाफ लोगों का गुस्सा दिखने लगा है. अब बाजार में आने वाले लोग मोबाइल खरीदने से पहले यह जरूर पूछ रहे हैं कि यह कहां का बना है. चीन निर्मित सामान खरीदने से लोग परहेज करने लगे हैं. अंजलि मोबाइल घर के चंदन कुमार गुप्ता कहते हैं कि एमआइ, रीयलमी का क्रेज तेजी से बढ़ा है. 35 फीसदी लोग अब सीधे चीन का सामान लेने से इन्कार कर रहे हैं. महंगे कोरियाई या अन्य देशों के मोबाइल खरीद रहे हैं. सैमसंग, नोकिया, मोटोरोला आदि खरीद रहे.
क्या बोले दुकानदार
बाबा मोबाइल घर के दिलीप कुमार शर्मा कहते हैं कि अब लोग भारतीय ब्रांड भी तलाश रहे हैं, लेकिन विकल्प न होने के कारण वे दूसरे उत्पाद ले रहे हैं. एसेसरीज में स्थिति कुछ बदली है. दिल्ली के करीब कई भारतीय कंपनियां अब एसेसरीज बनाने का काम करने लगी हैं. इसलिए इनकी डिमांड ज्यादा हो रही है. गोपालगंज में करीब दो करोड़ रुपये प्रतिमाह का चीन से कारोबार था. चीन अब पिछड़ रहा है, क्योंकि ग्राहक पहले यही पूछते हैं कि यह ब्रांड चाइनीज तो नहीं है.
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