हिमाचल प्रदेश चुनाव 2022: भाजपा को कितना मजबूत कर पाएंगे सुरेश चंदेल ? कांग्रेस में बिता चुके हैं तीन साल

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 20 Oct 2022 12:47 PM

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Himachal Election 2022 : 1998 में जब प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्‍व में पंडित सुखराम की हिमाचल विकास कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनी थी, उस वक्त सुरेश चंदेल को लोकसभा चुनाव में उतारा गाय था. उइस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी. जानें कौन हैं सुरेश चंदेल

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Himachal Election 2022 : हिमाचल प्रदेश चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो चली है. भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता अपने अपने बड़े चेहरों के साथ मतदाताओं को लुभाने में जुट चुके हैं. इन्हीं बड़े चेहरे में एक नाम सुरेश चंदेल का है जिन्होंने पिछले दिनों कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और भाजपा में फिर शमिल हुए. सुरेश चंदेल ने कांग्रेस में करीब तीन वर्ष बिताने के बाद भाजपा में वापसी की है जिससे भाजपा को मजबूती मिली है. अब देखना है कि अपनी पुरानी पार्टी को ये दिग्गज कितनी सीटें दिला पाते हैं. आइए जानते हैं सुरेश चंदेल का नाम क्यों चर्चा में है.

भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के गृहजिला बिलासपुर से संबद्ध सुरेश चंदेल का है. वे तीन बार लोकसभा सदस्‍य रह चुके हैं. सुरेश चंदेल ने भाजपा के प्रदेशाध्‍क्ष के पद पर भी अपनी सेवा दी है. 1988 में भाजपा के महासचिव बनने के दस साल बाद 1998 में वह भाजपा के प्रदेशाध्‍यक्ष बने और पार्टी को हिमाचल प्रदेश में मजूबत किया.

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तीन बार रहे लोकसभा सदस्‍य रह चुके हैं सुरेश चंदेल

1998 में जब प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्‍व में पंडित सुखराम की हिमाचल विकास कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनी थी, उस वक्त सुरेश चंदेल को लोकसभा चुनाव में उतारा गाय था. उइस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी. यह बारहवीं लोकसभा थी. 1999 में तेरहवीं लोकसभा के लिए चुनाव हुआ जिसमें चंदेल फिर चुनावी समर में उतरे और अपने विरोधी को पटखनी दी. 2004 की बात करें तो इस साल चौदहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में भी चंदेल ने जीत का परचम लहराया और हमीरपुर का प्रतिनिधित्‍व किया.

सुरेश चंदेल के बारे में ये भी जानें

-सुरेश चंदेल ने 2012 में भाजपा के टिकट पर बिलासपुर से चुनाव लड़ा. लेकिन इस चुनाव में उन्‍हें कांग्रेस के उम्‍मीदवार बंबर ठाकुर के हाथों हार मिली. इसके बाद वे फिर गुमनामी में चले गये. 2017 में उन्‍हें बिलासपुर सदर से भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं बनाया.

-लोकसभा चुनाव 2019 में चर्चा हो रही थी कि सुरेश चंदेल को भाजपा कुछ बड़ी जिम्‍मेदारी दे सकती है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. इसके बाद सुरेश चंदेल ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था.

-करीब सवा तीन वर्ष के बाद सुरेश चंदेल ने पिछले दिनों कांग्रेस को अलविदा कह दिया और भाजपा में वापसी कर ली. सुरेश चंदेल की भाजपा में वापसी बिलासपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से एक दिन पहले हुई.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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