Graha Nakshatra: 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे सूर्यदेव, इसी दिन से शुरू होंगे नौतपा, जानें इसका महत्व और ज्योतीषीय प्रभाव

Graha Nakshatra: 25 मई से रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा. इसी दिन सूर्य 8 बजकर 47 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. सूर्य देव 15 दिनों तक इसी नक्षत्र में स्थित रहेंगे. रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से नौतपा भी शुरू हो जाएंगे. नौतपा का मतलब सूर्य नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप में होते है. यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है.
Graha Nakshatra: 25 मई से रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा. इसी दिन सूर्य 8 बजकर 47 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. सूर्य देव 15 दिनों तक इसी नक्षत्र में स्थित रहेंगे. रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से नौतपा भी शुरू हो जाएंगे. नौतपा का मतलब सूर्य नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप में होते है. यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है. चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं, जो शीतलता का कारक माने जाते हैं, लेकिन इस समय सूर्य के प्रभाव में वे आ जाते हैं.
जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आते है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले दिन होते हैं. इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है. खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है. यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत देता है.
ज्योतिष गणना के अनुसार शनि की वक्री चाल के कारण इस बार नौतपा खूब तपेगा. हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिनों के भीतर आंधी तूफान और बारिश होने की संभावना रहेगी.
नौतपा का पौराणिक महत्व भी है. ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में नौतपा का वर्णन किया गया है. कहा जाता हैं कि जब ज्योतिष की रचना हुई, तभी से ही नौतपा भी चला आ रहा है. सनातन सस्कृति में सदियों से सूर्य को देवता के रूप में भी पूजा जाता रहा है.
25 मई की सुबह करीब 8 बजकर 47 मिनट पर सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में होकर वृषभ राशि के 10 से 20 अंश तक रहते है, तब नौतपा होता है. इस नक्षत्र में सूर्य करीब 15 दिनों तक मौजूद रहेंगे. लेकिन शुरुआती 9 दिनों में गर्मी बहुत बढ़ जाती है.
इसलिए इन 9 दिनों के समय को ही नौतपा कहा जाता है. ये समय 25 मई से 3 जून तक रहेगा. इसके अलावा ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष में चंद्रमा जब आर्द्रा से स्वाती तक 10 नक्षत्रों में रहता हो तो नौतपा होता है. रोहिणी के दौरान बारिश हो जाती है तो इसे रोहिणी नक्षत्र का गलना भी कहा जाता है.
विज्ञान के अनुसार नौतपा में सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर आती है. इस कारण पृथ्वी पर तापमान बढ़ जाता है. अधिक गर्मी के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है और समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है. इस कारण ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती है. वहीं, समुद्र उच्च दबाव वाला क्षेत्र होता है इसलिए हवाओं का यह रूख अच्छी बारिश का संकेत देता है.
Posted by: Radheshyam Kushwaha
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