मशहूर फिल्म निर्माता बासु चटर्जी का निधन, 'रजनीगंधा' 'चितचोर' जैसी फिल्मों का किया था निर्देशन

filmmaker basu chatterjee passes away: मशहूर फिल्म निर्माता बासु चटर्जी (basu chatterjee death) का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण बृहस्पतिवार को निधन हो गया. वह ‘‘छोटी सी बात'', 'चितचोर' और ‘‘रजनीगंधा'' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते थे.
मशहूर फिल्म निर्माता बासु चटर्जी (basu chatterjee death) का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण बृहस्पतिवार को निधन हो गया. वह ‘‘छोटी सी बात”, ‘चितचोर’ और ‘‘रजनीगंधा” जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते थे. वह 93 वर्ष के थे. बासु ने सांताक्रूज स्थित अपने आवास में नींद में ही अंतिम सांस ली.
इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (आईएफडीटीए) के अध्यक्ष अशोक पंडित ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उन्होंने सुबह के समय नींद में ही शांति से अंतिम सांस ली. वह उम्र संबंधी दिक्कतों के कारण पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रहे थे और उनके आवास पर ही उनका निधन हुआ. यह फिल्म उद्योग के लिए भारी क्षति है.”
पंडित ने बताया कि फिल्म निर्माता का अंतिम संस्कार सांता क्रूज श्मशान घाट पर किया जाएगा. बासु को ‘‘उस पार”, ‘‘चितचोर”, ‘‘पिया का घर”, ‘‘खट्टा मीठा”, स्वामी, प्रियतम, चक्रव्यूह, जीना यहां, अपने पराये, शौकीन, एक रूका हुआ फैसला और ‘‘बातों बातों में’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाना जाता है.
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बासु चटर्जी ने अपने करियर की शुरुआत बॉम्बे (अब मुंबई) में प्रकाशित साप्ताहिक टैब्लॉइड ब्लिट्ज के साथ एक रोस्टर और कार्टूनिस्ट के रूप में की थी. यहां उन्होंने 18 साल तक काम किया. इसके बाद उन्होंने राज कपूर और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म ‘केसरी’ (1966) में बासु भट्टाचार्य की सहायता की, जिसने बाद में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता. इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के करियर को चुना. आखिरकार, उन्होंने 1969 में ‘सारा आकाशल् के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की, जिसने उन्हें सर्वश्रेष्ठ पटकथा का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार दिलाया.
उन्होंने दूरदर्शन के लिए टीवी सीरीज ‘ब्योमकेश बक्शी’ और लोकप्रिय ‘रजनी’ (टीवी सीरीज) का निर्देशन भी किया था, जो दोनों सफल टीवी धारावाहिकों में से एक थे. वह 1977 में 10 वें मास्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में निर्णायक मंडल के सदस्य थे. चटर्जी एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन के इंटरनेशनल फिल्म एंड टेलीविजन क्लब के सदस्य भी रहे थे.
बासु चटर्जी की बेटी रूपाली गुहा भी एक फिल्म निर्देशक हैं. उनकी पहली हिंदी फ़िल्म ‘आमरस’, सितंबर 2009 में रिलीज़ हुई थी, जो चार स्कूली छात्राओं पर आधारित थी. रूपाली की अगली फिल्म, बंगाली फिल्म पोरिचोई (Porichoi) है जिसमें उनके साथ प्रोसेनजीत चटर्जी भी है. यह फिल्म एक बाप-बेटी के रिश्ते को बताती है.
posted by: Budhmani Minj
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