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Ek Villain Returns Review: एंटरटेनमेंट के लिए विलेन साबित हुई है अर्जुन कपूर की 'एक विलेन रिटर्न्स'

Updated at : 30 Jul 2022 5:32 PM (IST)
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Ek Villain Returns Review: एंटरटेनमेंट के लिए विलेन साबित हुई है अर्जुन कपूर की 'एक विलेन रिटर्न्स'

Ek Villain Returns Review: फ़िल्म के शीर्षक से यह बात साबित हो जाती है कि ये भी एक सीरियल किलर की कहानी है.जो उन लड़कियों को मारता है.जो अपने प्रेमियों को धोखा दे रही है. ऐसे में जब वह जब फ़िल्म की अभिनेत्री आरवी (तारा सुतरिया) को टारगेट करता है तो क्या होता है.

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फ़िल्म-एक विलेन

निर्देशक – हर्षवर्धन

कलाकार – जॉन अब्राहम, अर्जुन कपूर, दिशा पाटनी, तारा सुतरिया

प्लेटफार्म -सिनेमाघर

रेटिंग -तीन

Ek Villain Returns Review: 2014 में रिलीज हुई सफल फ़िल्म एक विलेन का सीक्वल एक विलेन रिटर्न्स है. इस बार भी एक सनकी सीरियल किलर की कहानी है, लेकिन उस सीरियल किलर के अलावा फिल्म का हर किरदार स्याह पक्ष लिए हुए हैं. कहने का मतलब है कि इस कहानी में कोई हीरो नहीं है बल्कि हर कोई विलेन है जो खुद को पूरे गर्व के साथ विलेन बनाने और दर्शाने में तुले हुए है. फ़िल्म का यह पक्ष सुनने में खास लग सकता है लेकिन कमज़ोर कहानी और कन्फ्यूजिंग स्क्रीनप्ले ने इस फ़िल्म को एंटरटेनमेंट का विलेन बना दिया है.

एकतरफा प्यार वाले आशिक के फितूर की कहानी

फ़िल्म एक विलेन रिटर्न्स के शीर्षक से यह बात साबित हो जाती है कि ये भी एक सीरियल किलर की कहानी है.जो उन लड़कियों को मारता है.जो अपने प्रेमियों को धोखा दे रही है . ऐसे में जब वह जब फ़िल्म की अभिनेत्री आरवी( तारा सुतरिया) को टारगेट करता है तो क्या होता है.चूंकि अभिनेत्री वो है,तो उसका प्यार भी सच्चा है. अब जब सीरियल किलर सच्चे प्यार से टकराता है,तो उसका क्या होता है. सीरियल किलर को आखिरकार ऐसी लड़कियों से दिक्कत क्यों है.ये भी कहानी का एक सिरा है. इन्ही दोनों छोर पर फ़िल्म की कहानी कभी छह महीने पहले तो कभी आज में चलती आती है. फ़िल्म का सस्पेंस आपको हैरान नहीं करता है. फितूर वाले आशिक की ही नहीं, बल्कि पूरी कहानी ही फितूर की है.

एक्टिंग में भी मामला है बोझिल

अभिनय की बात करें तो यह जॉन अब्राहम की फ़िल्म है और उन्होंने निराश किया है. पूरी फिल्म में वो एक ही एक्सप्रेशन देते नजर आए हैं. अर्जुन कपूर ने ज़रूर परदे पर अच्छी कोशिश की है.अभिनेत्रियों के लिए फ़िल्म में करने को कुछ खास नहीं था तारा सुतरिया को कुछ गानों में लिप सिंक करने का मौका मिला है जबकि दिशा पाटनी सिर्फ फ़िल्म में अपनी बॉडी भर की नुमाइश करती दिखती है.

यहां भी डिब्बा गोल

एक विलेन की खासियत इसका म्यूजिक था. फ़िल्म के गाने आज भी दर्शकों में लोकप्रिय है जबकि यह फ़िल्म इस मोर्चे पर भी विफल होती है.फ़िल्म के खत्म होने के बाद एक भी गाना ऐसा नहीं है.जो आपको याद रह जाता है. फ़िल्म के कन्फ्यूजिंग कहानी को और ज़्यादा बोझिल इसके डायलॉग बना गए हैं. मरना पसंद है हारना पसंद नहीं है जैसे संवाद फ़िल्म में है.

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देखें या ना देखें

एक विलेन एक इमोशनल प्यार की कहानी थी,जिसे और खास उसका संगीत बना गया था लेकिन एक विलेन रिटर्न्स में पिछली फ्रेंचाइजी का कुछ भी जादू रिटर्न नहीं हो पाया है.

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कोरी

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By कोरी

कोरी is a contributor at Prabhat Khabar.

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