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पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से हो गया ‘खेला’, ISF का कांग्रेस ने छोड़ा साथ, ‘एकला’ चलने का एलान

Updated at : 11 May 2021 5:32 PM (IST)
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पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से हो गया ‘खेला’, ISF का कांग्रेस ने छोड़ा साथ, ‘एकला’ चलने का एलान

Bengal Third Front Update: बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘खेला होबे’ नारे के साथ उतरी टीएमसी ने जब रिजल्ट में हैट्रिक मारी तो सीएम ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की खिलाड़ियों की खिलाड़ी बन गईं. लेफ्ट, आईएसएफ और कांग्रेस के गठबंधन में असली भगदड़ का नजारा दिखने लगा है. रिजल्ट में चारों खाने चित्त लेफ्ट गठबंधन में टूट का औपचारिक एलान किया गया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने आईएसएफ से दूरी बनाने पर मुहर भी लगा दी है.

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Bengal Third Front Update: बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘खेला होबे’ नारे के साथ उतरी टीएमसी ने जब रिजल्ट में हैट्रिक मारी तो सीएम ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की खिलाड़ियों की खिलाड़ी बन गईं. रिजल्ट के बाद बंगाल के सियासी संग्राम में सभी दूसरे पर आरोप लगाते रहे. दूसरी तरफ लेफ्ट, आईएसएफ और कांग्रेस के गठबंधन में असली भगदड़ का नजारा दिखने लगा है. रिजल्ट में चारों खाने चित्त लेफ्ट गठबंधन में टूट का औपचारिक एलान किया गया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने आईएसएफ से दूरी बनाने पर मुहर भी लगा दी है.

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पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के रास्ते जुदा 

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आईएसएफ, कांग्रेस और लेफ्ट ने गठबंधन बना कर चुनाव लड़ा था. चुनाव में उतरे लेफ्ट गठबंधन ने टीएमसी और बीजेपी को तगड़ी टक्कर देने के दावे किए और चुनाव रिजल्ट में गठबंधन की हालत सबसे खराब दिखी. पश्चिम बंगाल में एक भी सीट नहीं जीत सकी कांग्रेस पार्टी ने आईएसएफ से नाता तोड़ने का फैसला लिया है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को एलान किया है कि अब उनकी पार्टी भविष्य में पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की इंडियन सेक्युलर फ्रंट से कोई भी रिश्ता नहीं रखना चाहती है.

लेफ्ट की जिद से बना गठबंधन: अधीर

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी का कहना है उन्होंने कभी भी लेफ्ट के साथ गठबंधन में आईएसएफ को शामिल करने का समर्थन नहीं किया था. लेफ्ट पार्टी को आईएसएफ से दूर रहने की सलाह दी थी. हालांकि, लेफ्ट ने आईएसएफ को जुबान देने की बात करते हुए उसे गठबंधन में शामिल किया था. इस तीसरे मोर्चे का फेल होना तय था. इसका कारण था कि शुरू से ही पश्चिम बंगाल की जनता ने लेफ्ट, कांग्रेस और आईएसएफ के गठबंधन को नकार दिया था.

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सौ सीटों पर प्रभाव का दावा भी ‘फ्लॉप’ 

यहां जिक्र करना जरूरी है कि फुरफुराशरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पश्चिम बंगाल के करीब सौ विधानसभा सीटों पर प्रभाव का दावा किया जाता था. चुनाव प्रचार में उनकी रैली में समर्थकों की भारी भीड़ भी उमड़ती थी. पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने दावा किया था कि इस बार पश्चिम बंगाल में बदलाव आएगा. टीएमसी और बीजेपी की जगह तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी. लेकिन, चुनाव के खत्म होने तक आईएसएफ और कांग्रेस में तल्खी बढ़ती गई. आखिरी फेज की वोटिंग के बाद पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी को खूब खरी-खोटी सुनाई थी. अब, कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की आईएसएफ से दूरी बना भी ली है.

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