Success Story: रजरप्पा की बेटी ने कर दिया कमाल, 21 साल की उम्र में बना दिया स्वदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट SIENA
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 02 Jun 2026 5:51 PM
रजरप्पा की श्रेया पांडा और इनसेट में उनके द्वारा बनाया गया स्वदेशी रोबोट. फोटो: प्रभात खबर
Success Story: झारखंड के रजरप्पा की 21 वर्षीय श्रेया पंडा ने स्वदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट SIENA विकसित कर नई मिसाल कायम की है. शिक्षा क्षेत्र के लिए तैयार यह रोबोट एआई, रोबोटिक्स और कोडिंग की व्यावहारिक जानकारी देने में सक्षम है. श्रेया की उपलब्धि युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा बनी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रजरप्पा से सुरेंद्र कुमार और शंकर पोद्दार की रिपोर्ट
Success Story: प्रतिभा और जुनून के सामने संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती. झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा की रहने वाली 21 वर्षीय श्रेया पंडा ने इसे सच साबित कर दिखाया है. बेहद कम उम्र में उन्होंने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना (SIENA) यानी स्मार्ट इंटरेक्टिव एजुकेशनल न्यूरल असिस्टेंट विकसित कर तकनीकी क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. आज श्रेया पंडा युवा पीढ़ी, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और परिवार का सहयोग मिले तो छोटे शहरों और कस्बों से भी विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं.
रजरप्पा की बेटी ने बढ़ाया झारखंड का मान
श्रेया पंडा फिलहाल पैराडॉक्स इनोवोटर प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक एवं मुख्य परिचालन पदाधिकारी (सीओओ) के रूप में कार्यरत हैं. वह मां छिन्नमस्तिके मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सह मंदिर न्यास समिति के सचिव शुभाशीष पंडा और जया पंडा की बेटी हैं. श्रेया की इस उपलब्धि से रजरप्पा क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है. स्थानीय लोगों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और पंडा समाज के सदस्यों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है. लोगों का कहना है कि श्रेया ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े महानगर की मोहताज नहीं होती.
बचपन से विज्ञान और तकनीक में थी रुचि
श्रेया को बचपन से ही विज्ञान, नवाचार और नई तकनीकों में विशेष रुचि थी. वह हमेशा कुछ नया सीखने और प्रयोग करने की कोशिश करती थीं. यही जिज्ञासा आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बनी. उन्होंने अपने सपनों को केवल कल्पना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लगातार अध्ययन, अनुसंधान और तकनीकी प्रयोगों के माध्यम से उन्हें वास्तविकता में बदल दिया. श्रेया का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. इसके लिए धैर्य, समर्पण और निरंतर सीखने की इच्छा जरूरी है.
शिक्षा क्षेत्र के लिए विकसित किया गया सिएना
श्रेया द्वारा विकसित ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना को विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसका पूरा नाम स्मार्ट इंटरेक्टिव एजुकेशनल न्यूरल असिस्टेंट है. यह रोबोट विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कोडिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करने में सक्षम है. स्कूलों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में यह एक डिजिटल शिक्षक और सहायक की भूमिका निभा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ह्यूमनॉइड रोबोट भविष्य की शिक्षा प्रणाली को और अधिक इंटरैक्टिव तथा तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
अत्याधुनिक फीचर्स से लैस है रोबोट
सिएना में कई आधुनिक तकनीकी सुविधाएं शामिल की गई हैं. यह फेस रिकग्निशन तकनीक के माध्यम से छात्रों की उपस्थिति दर्ज कर सकता है. इसके अलावा यह विभिन्न भाषाओं में संवाद स्थापित करने की क्षमता रखता है और छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी दे सकता है. रोबोट में लिडार नेविगेशन, वॉइस इंटरैक्शन, टच स्क्रीन इंटरफेस और इंटेलिजेंस मेमोरी सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है. इन विशेषताओं के कारण यह स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल कैंपस और आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है. श्रेया के अनुसार, इस रोबोट को तैयार करने में करीब छह महीने का समय लगा. इस दौरान उन्होंने डिजाइनिंग, प्रोग्रामिंग, हार्डवेयर इंटीग्रेशन और परीक्षण जैसे कई चरणों पर काम किया.
माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं सफलता का श्रेय
श्रेया अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं. उनका कहना है कि परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कभी भी उनके सपनों पर सीमाएं नहीं लगाईं. उन्होंने बताया कि जब भी किसी नई चुनौती का सामना करना पड़ा, तब परिवार और शिक्षकों ने उनका मनोबल बढ़ाया. यही समर्थन उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा.
बेटियों के लिए बनी नई प्रेरणा
आज श्रेया पंडा की उपलब्धि हजारों-लाखों युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है. उनका मानना है कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और आने वाला समय महिलाओं के नवाचार, नेतृत्व और तकनीकी योगदान का होगा. वह चाहती हैं कि अधिक से अधिक लड़कियां विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे आएं और देश के विकास में योगदान दें.
ग्रामीण छात्राओं के लिए बड़ा सपना
श्रेया का अगला लक्ष्य केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है. वह ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ना चाहती हैं. इसके लिए वह भविष्य में नि:शुल्क रोबोटिक्स प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही हैं. उनका मानना है कि यदि गांवों और छोटे कस्बों की बेटियों को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं.
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पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल
श्रेया पंडा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर रजरप्पा सहित पूरे रामगढ़ जिले में खुशी का माहौल है. लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है. 21 वर्ष की उम्र में स्वदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना का विकास कर श्रेया ने यह साबित कर दिया है कि सपनों को साकार करने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी है बड़ा विजन, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास. उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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