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Chaturmas 2022 does and don'ts: शुरु होने जा रहा है चातुर्मास, इन दिनों ये कार्य है वर्जित

Updated at : 06 Jul 2022 4:10 PM (IST)
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Chaturmas 2022 does and don'ts: शुरु होने जा रहा है चातुर्मास, इन दिनों ये कार्य है वर्जित

Chaturmas 2022 does and don'ts: चातुर्मास शुरू होते ही व्यक्ति को सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए. इस दौरान फर्श पर सोना चाहिए. चातुर्मास में सावन का माह भी पड़ता है,इसमें व्यक्ति को बाल, दाढ़ी, नाखून जैसी चीजें नहीं कटवानी चाहिए. चातुर्मास की शुरुआत 10 जुलाई से हो रही है

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Chaturmas 2022 does and don’ts: इस बार चातुर्मास की शुरुआत 10 जुलाई से हो रही है जोकि 4 नंवबर तक रहेगी. चातुर्मास (Chaturmas 2022) की अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. लेकिन जब कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2022) आती है तो फिर मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं.

चातुर्मास 2022

चातुर्मास का प्रारंभ: 10 जुलाई, दिन रविवार, देवशयनी एकादशी से
चातुर्मास का समापन: 04 नवंबर, दिन शुक्रवार, देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी पर

इन नियमों का करें पालन

चातुर्मास शुरू होते ही व्यक्ति को सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए. इस दौरान फर्श पर सोना चाहिए. चातुर्मास में सावन का माह भी पड़ता है,इसमें व्यक्ति को बाल, दाढ़ी, नाखून जैसी चीजें नहीं कटवानी चाहिए. चातुर्मास में व्रत का पालन करना चाहिए और साथ ही अनावश्यक यात्राओं से बचना चाहिए.

कौन से कार्य हैं चातुर्मास में वर्जित?

चातुर्मास के दौरान खानपान का विशेष तौर पर ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. चातुर्मास के चार महीनों में खानपान को लेकर कुछ नियम हैं जैसे कि सावन में साग व हरी सब्जियां, भादो के महीने में दही, अश्विन के महीने में दूध और कार्तिक माह में दाल खाना वर्जित माना गया है. इसके अलावा इन चार महीनों में मांस, मदिरा व तामसिक भोजन का सेवन करने से भी बचना चाहिए. कांसे के पात्र में भोजन करना भी निषेध माना गया है.

शरीर पर तेल लगाना भी चातुर्मास में वर्जित माना गया है. इसके अलावा इस अवधि में किसी की निंदा करने से भी जातक पाप के भागीदार बनते हैं. गुड़, मूली, बैंगन, परवल व शहद का सेवन भी इस दौरान निषेध माना गया है. चातुर्मास के दौरान पलंग पर सोना भी वर्जित है.

कौन से कार्य चातुर्मास में किए जा सकते हैं?

चातुर्मास के कड़े नियमों की वजह से ही सनातन धर्म में इस अवधि को आत्मसंयम काल भी कहा जाता है. इस दौरान जातकों को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए. साफ वस्त्र धारण कर प्रत्येक दिन भगवान विष्णु की आराधना करें. भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें. विष्णु सहस्त्रनाम का जाप इस दौरान विशेष रूप से फलदायी माना गया है. भगवान विष्णु को इस दौरान पीले फूल और फल अर्पित करें. पीली मिठाई का भोग लगाएं. ब्रह्मचर्य का पालन करें और दान-पुण्य करें.

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