गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों जैसा ऊर्जायुक्त रहेगा साल 2024, पूरे वर्ष मिलेगा बुद्धिबल को तवज्जोह
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 31 Dec 2023 11:37 AM
Astrology: वर्ष 2024 का उदय जब 31 दिसंबर/1 जनवरी की मध्य रात्रि में 12 बजे जन्म होगा, तब उसका लग्नेश बुध है. जाहिर है कि बुद्ध के देवता देवताओं के अधिपति श्रीगणेश हैं.
Astrology: सृष्टि की रहस्यमयी गतिविधियों पर नजर रखने वाला ज्योतिष विज्ञान आधुनिक तकनीकी विज्ञान के दौर में आर्टिफिशयल इंटिलिजेंस से भी आगे का विज्ञान है. ज्योतिष-विज्ञान की नजर आकाश से लेकर पाताल तक पर रही है. अंतरिक्ष में विद्यमान ब्रह्मांड के महाप्रतापी सूर्य ग्रह तथा भाग्य निर्धारक चंद्रमा सहित सभी ग्रहों के चाल-चेहरा-चरित्र का अध्ययन ज्योतिष-विद्वानों ने किया. इतना ही नहीं, काल (समय) के चक्र पर गहरी दृष्टि डालने पर त्रिकाल और त्रिगुणात्मक जीवन का प्रभाव भी ज्योतिष-शास्त्र के माध्यम से ज्ञात होता है. इस क्रम में ज्ञान के शीर्ष ग्रंथ श्रीमद्भगवतगीता पर दृष्टि स्वयमेव जाती है. ज्योतिष-विज्ञान की श्रीमद्भगवतगीता से तुलना इसलिए प्रासंगिक है, क्योंकि इस ग्रंथ के 10वें विभूतियोग और 11वें विश्वरूपदर्शन योग में योगेश्वर श्रीकृष्ण ज्योतिषविज्ञान के देवता तथा प्रणेता के रूप में दिखाई पड़ते हैं.
इन दोनों अध्यायों के अतिरिक्त अन्य अध्यायों में जिस तरह अर्जुन को वे उपदेश दे रहे हैं, उससे तो स्पष्ट प्रतीत होता है कि ज्योतिष-विद्या का हिमालय है यह ग्रंथ. श्रीमद्भगवतगीता का प्रारंभ ही अंधकार में ज्योति की तलाश है. ग्रंथ के प्रथम अध्याय के प्रथम श्लोक में अंधकार के प्रतीक धृतराष्ट्र अपने पुत्रों और खानदान का भविष्य जानने के लिए उत्सुक है. ज्योतिषीय दृष्टि रखने वाले संजय से कुंडली-बांचने के लिए ही ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः, मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय‘ कहते नजर आते हैं सम्राट धृतराष्ट्र. इस श्लोक में ‘धर्मक्षेत्र और कुरुक्षेत्र में एकत्रित युद्ध की इच्छा वाले मेरे और पाण्डुपुत्रों ने क्या किया’ के बहाने महाभारत युद्ध का भविष्य जानने की लालसा दिखती है धृतराष्ट्र की.
महाभारत के युद्ध के हर महारथियों का यही हाल है कि सभी सिर्फ भविष्य को लेकर ही नहीं, बल्कि अतीत और वर्तमान को लेकर चिंतित हैं. लौकिक जीवन भी किसी महाभारत युद्ध से कम नहीं. मनुष्य के जीवन में देश-काल-परिस्थिति का असर पड़ता है. इस दृष्टि से यदि वर्ष 2024 को तीनों कसौटी पर कसते हुए भविष्यवाणी की जाये, तो हर स्तर पर पूरे वर्ष में शुभता का पलड़ा भारी लग दिख है. वर्ष 2024 का उदय जब 31 दिसंबर/1 जनवरी की मध्य रात्रि में 12 बजे जन्म होगा, तब उसका लग्नेश बुध है. जाहिर है कि बुद्ध के देवता देवताओं के अधिपति श्रीगणेश हैं. लग्न में बुध के होने का मतलब ही है कि बुद्धिबल को तवज्जोह पूरे वर्ष मिलेगा. यानी बौद्धिक कार्य करने वाला छलांग लगाने में समर्थ होगा, जबकि शारीरिक बल के जरिये आधिपत्य कायम करने की कोशिश कारगर नहीं होगी.
भारतीय ऋषियों ने भी ‘विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्यम् कदाचन् , स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते’ का उद्घोष किया है. बुद्धि बल को प्राथमिकता के क्रम में ‘यस्य बुद्धि: तस्य बलं, निर्बुद्धस्य कुतो बलं’ का भी आशय यही है कि बुद्धि बल के चलते ही सृष्टि में मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है. बुद्धि के चलते वह देवत्व हासिल करने की सामर्थ्य रखता है. बुध ग्रहों का राजुकमार होता है, शांत प्रकृति का होता है, इसलिए नयी पीढ़ी के लोग यदि उतावलापन छोड़कर शांत मन से कोई कार्य करेंगे, तो उनके लिए यह वर्ष अनुकूल रहेगा.
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वर्ष की जन्म-पत्रिका पर दृष्टि डालने से 2024 का जन्म मघा नक्षत्र में होने की वजह से उसकी राशि सिंह है. सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि मघा नक्षत्र में जन्म लेने पर जातक जिस तरह पूर्वजन्मों में संचित अपने कर्म का फल प्राप्त करता है, उसी तरह वर्ष 2024 उन्हें फलदायक होगा. इसका आशय यह है कि जिन लोगों ने पिछले वर्षों में जिस तरह के कर्मों का निवेश किया है, उसका फल इस वर्ष अवश्य मिलेगा. यानी जिस तरह की फसलें बोयी गयी हैं, उसे काटने का वक्त आ गया है नववर्ष 2024 में. मघा नक्षत्र साहसी तथा राज्याश्रित होता है, इसलिए वर्ष 2024 में निर्भीक निर्णय लेने की जरूरत होगी तथा राज्याधिकारियों से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा.
वर्ष 2024 के आगमन के वक्त आयुष्मान योग भी बन रहा है, ऐसी स्थिति में संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण का योग है. इसी के साथ वर्ष का प्रारंभ देवाधिदेव महादेव के प्रिय दिवस सोमवार से शुरू हो रहा है. पौष मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है. यह महादेव के पंचानन स्वरूप से मेल खा रहा है, ऐसी स्थिति में भारत की स्थिति महादेव-सदृश विश्वपूज्य की की तरह होगी. महादेव समस्याओं के समाधान के देवता हैं. जब कभी विषम परिस्थितियां देवलोक में आती रहीं, तो ब्रह्मा और विष्णु तक महादेव से सहयोग लेते रहे. ऐसी स्थिति में भारत विश्व में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों में समाधान देने की स्थिति में रहेगा.
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भारत के ऋषियों की वाणी ‘अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्,उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्’ साक्षात सार्थक होती दिखाई देगी. भारत के संसद में लिखा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ मंत्र के सार्थक होने से भारत की महत्ता बढ़ाने का काम वर्ष 2024 करेगा. महादेव के परम भक्त रावण के झूठ, फरेब से जिस तरह उसकी गति हुई, उसी तरह नकारात्मक प्रवृत्तियों से लाभ लेने वालों की इस वर्ष होगी. ऐसे लोग असफल होंगे. इस तरह वर्ष 2024 को अंक ज्योतिष की दृष्टि से देखें, तो गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों से तादात्म्य बैठाता हुआ यह अंक है. लिहाजा निर्मल मन से ईश्वरीय आराधना करने वालों के लिए यह वर्ष गायत्री महामंत्र की तरह स्वर्णिम अवसर दिलायेगा.
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