Astrology: वैवाहिक जीवन में क्लेश और तनाव का करण होते है ये ग्रह-योग, जानिए ज्योतिषीय उपाय
Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 22 Dec 2023 10:02 AM
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर व्यक्ति के स्वभाव और उसके जीवन में आने वाली परेशानियों का कारण अशुभ ग्रहों का फल होता है. अगर कुंडली में मंगल ग्रह नीच के हो और उनका संबंध अगर सप्तम भाव से बन रहा हो तो व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का होता है.
Astrology: वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो उसकी कुंडली में भाव, ग्रह और योग होते हैं. कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति को देखकर करियर, कारोबार, संतान और वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा, इसके बारे में गणना की जाती है. आइए हम जानते है ऐसे ग्रह और अशुभ योगों के बारे में जो वैवाहिक जीवन में तनाव की स्थिति पैदा करते हैं. ज्योतिष में बताया गया है कि अगर कुछ ग्रह और योग शक्तिशाली स्थिति में हो तो पति-पत्नी में अलगाव की स्थिति तक पैदा हो जाती है.
अगर कुंडली में मंगल ग्रह नीच के हो और उनका संबंध अगर सप्तम भाव से बन रहा हो तो व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का होता है. उसकी छोटी-छोटी बातों पर जीवनसाथी के साथ झगड़ा होता है, इसके साथ ही वैवाहिक जीवन में क्लेश बनी रहती है.
ज्योतिष के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें स्थान में किसी अन्य अशुभ ग्रहों के साथ जुड़ा हो. वहीं लग्न कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी छठे भाव में विराजमान हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो तो अचानक अलगाव का योग स्थापित हो सकता है.
वैदिक ज्योतिष अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में छठे, आठवें या बारहवें भाव में ग्रहों की दशा विवाह में जीवन साथी से अलगाव या तलाक का कारण बन सकती है.
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अगर पंचम और सप्तम भाव पर राहु ग्रह की नीच दृष्टि पड़ रही हो तो भी तलाक का कारण बनती है और प्रेम संबंध में असफलता हाथ लगती है.
वैदिक ज्योतिष के अनुसार सप्तम या अष्टम भाव पर शनि और मंगल दोनों की दृष्टि वैवाहिक जीवन में परेशानियां पैदा करती है.
ज्योतिष अनुसार यदि पति-पत्नी के बीच रोज झगड़े होते हैं तो भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए. वहीं अगर कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर या अशुभ हो तो गुरुवार को किसी मंदिर में केले और चने की दाल दान करनी चाहिए, इसके साथ ही गुरु ग्रह के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए.
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‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ मंत्र का जाप करें.
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शयनकक्ष में राधा-कृष्ण की आलिंगनबद्ध तस्वीर लगाएं
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शनिवार को चमेली के तेल का दीपक जलाकर ‘श्री सुंदरकांड’ का पाठ करें.
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पत्नी को पति के बाईं ओर ही सोना चाहिए तथा सोने के लिए अलग-अलग तकिये, गद्दों का प्रयोग न करें.
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शयन कक्ष के दीवारों पर हल्के रंग का ही प्रयोग करें.
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पीले रंग का प्रयोग सोने के कमरे में कभी न करें.
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लेखक के बारे में
By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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