Air India Plane Crash Report : बोइंग विमान का स्विच खुद ऑन या ऑफ नहीं हो सकता, इरादतन किया गया होगा बंद; जिसने कराई दुर्घटना
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 13 Jul 2025 12:33 PM
अहमदाबाद विमान दुर्घटना
Air India Plane Crash Report : अहमदाबाद विमान दुर्घटना क्या किसी साजिश के वजह से हुई? यह सवाल इसलिए आज सबकी जुबान पर है क्योंकि विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट ये कहती है कि दोनों इंजन में फ्यूल सप्लाई बंद होने की वजह से दुर्घटना हुई. टेकआॅफ के कुछ ही सेकेंड बाद पायलट ने यह पाया कि फ्यूल स्विच कट ऑफ मोड में थे, उसने स्विच को चालू भी किया, लेकिन तबतक देर हो चुकी थी. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या फ्यूल स्विच को किसी ने जानबूझकर बंद किया था या यह किसी और की साजिश थी.
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Air India Plane Crash Report : अहमदाबाद विमान दुर्घटना के ठीक एक महीने बाद एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो चौंकाने वाली तो है ही कई सवाल भी खड़े करती है. 12 जून की दोपहर को जब विमान दुर्घटना हुई तो सहसा लोग विश्वास नहीं कर पा रहे थे. विमान पर सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी, वहीं जिस मेडिकल कॉलेज पर विमान गिरा, वहां 19 लोग मारे गए थे. यह संख्या बाद में और बढ़ गई थी, उस भयंकर दुर्घटना के कई निशान आज भी मौजूद हैं. विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) की रिपोर्ट के अनुसार फ्यूल स्विच बंद होने की वजह से यह दुर्घटना हुई.
एएआईबी की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
एएआईबी की रिपोर्ट यह बताती है कि दुर्घटनाग्रस्त बोइंग विमान 787 ड्रीमलाइनर का फ्यूल स्वीच बंद होने होने की वजह से दो पायलटों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई और संभवत: यह दुर्घटना की वजह बनी. रिपोर्ट में यह बताया गया है कि दुर्घटना के समय एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि आपने फ्यूल स्विच क्यों बंद कर दिया है, इसपर दूसरे पायलट ने यह जवाब दिया कि उसने बंद नहीं किया है. संभवत: पायलटों ने फ्यूल स्विच को फिर से चालू कर दिया हो,लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. एएआईबी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि फ्यूल स्विच बंद होने की स्थिति में विमान के दोनों इंजन में फ्यूल का प्रवाह बंद हो गया, जो दुर्घटना की बड़ी वजह हो सकता है.
क्या विमान का फ्यूल स्विच ऑटोमेटिक होता है?
विमान के इंजन तक फ्यूल पहुंचाने के लिए जो स्विच होता है वो रन और कट ऑफ की स्थिति में होता है. फ्यूल स्विच ऑटोमेटिक तरीके से कट और रन की स्थिति में नहीं आता है, उसे मैनुअली लीवर खिंच कर रन या फिर कट ऑफ की स्थिति में लाया जाता है. उसके बाद चीजें ऑटोमेटिक होती हैं, यानी फ्यूल स्वत: इंजन में जाने लगता है. इसका अर्थ यह है कि लीवर को खिंचा गया था या फिर वह गलती से खिंच गया था. लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी (रिटायर्ड) बताते हैं कि जो बोइंग विमान होता है उसके इंजन में दो फ्यूल स्विच लगे होते हैं, जिसे ऑन या ऑफ करके इंजन को चालू या बंद किया जाता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि फ्यूल के जो दो स्विच लगे होते हैं, वे हमारे घर में लगे हुए स्विच से अलग होते हैं. उन्हें चालू या बंद करने के लिए पहले लीवर खिंचना पड़ता है, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. कहने का अर्थ यह है कि फ्यूल स्विच अनजाने में चालू या बंद नहीं हो सकता है, इसे इरादतन ऑन या ऑफ करने के लिए पहले लीवर खिंचा जाता है उसके बाद आगे की क्रिया की जाती है. इस स्थिति में यह सवाल जरूर खड़े होते हैं कि क्या पायलट ने जान बूझकर फ्यूल स्विच को कट ऑफ की स्थिति में रखा था? हालांकि यह रिपोर्ट प्रारंभिक है, इसलिए अभी कुछ कहना थोड़ी जल्दबाजी है, लेकिन यह तो जरूर कहा जा सकता है कि अगर यही हुआ, तो दुर्घटना की यह वजह हो सकता है.
जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना गलत होगा
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के राम मोहन नायडू ने प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कोई भी निष्कर्ष निकालने को गलत बताया है और चेतावनी दी है कि ऐसा ना करें, अभी विस्तृत रिपोर्ट नहीं आई है. विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ भी पक्के तौर पर कहा जा सकेगा. नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कोई भी टिप्पणी करना या निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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