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झारखंड : 413 आंदोलनकारी चिह्नित, सबसे ज्यादा 132 बाबानगरी देवघर से

Updated at : 26 Jul 2023 6:35 PM (IST)
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झारखंड : 413 आंदोलनकारी चिह्नित, सबसे ज्यादा 132 बाबानगरी देवघर से

झारखंड आंदोलनकारियों की पहचान का काम जारी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब तक चिह्नित 413 आंदोलनकारियों के नाम को अधिसूचित करने की मंजूरी दे दी है. अब तक जिन लोगों को आंदोलनकारी के रूप में चिह्नित किया गया है, उनमें सबसे ज्यादा 132 लोग देवघर से हैं.

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झारखंड में 413 आंदोलनकारियों को चिह्नित कर लिया गया है. मुख्यमंत्री ने इन आंदोलनकारियों को चिह्नित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है. चिह्नित सभी आंदोलनकारियों को अनुमान्यता के आधार पर झारखंड आंदोलनकारी के रूप में अधिसूचित किया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर आंदोलकारियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी है. आने वाले दिनों में अन्य पात्र आंदोलकारियों को भी चिह्नित किया जायेगा.

सबसे ज्यादा 132 आंदोनलकारी देवघर से चिह्नित

चिह्नित आंदोलनकारियों में सबसे ज्यादा देवघर से हैं. बाबानगरी के 132 लोगों को झारखंड आंदोलनकारी के रूप में चिह्नित किया गया है. इसके अलावा बोकारो के 20, धनबाद के 12, गिरिडीह के 43, गोड्डा के 19, गुमला के 33, हजारीबाग के 23, कोडरमा के 13, लातेहार के 2, लोहरदगा के 29, रामगढ़ के 8, रांची के 47, साहिबगंज के 10 और सरायकेला के 22 लोगों को आंदोलनकारियों की लिस्ट में शामिल किया गया है.

आंदोलनकारियों के संघर्ष के प्रति संजीदा हैं मुख्यमंत्री

सरकार गठन के बाद से ही मुख्यमंत्री आंदोलनकारियों के संघर्ष को सम्मान देने के प्रति संजीदा रहे हैं. यही वजह है कि पूर्व में मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग के पुनर्गठन, आंदोलनकारी अथवा उनके आश्रितों को मासिक पेंशन और अन्य सुविधाएं देने के निर्णय लिये. झारखंड/वनांचल अलग राज्य के गठन के लिए चिह्नित पांच आंदोलनकारियों के मरणोपरांत उनके आश्रितों को लाभ देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी.

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आंदोलन की अंतिम पंक्ति में शामिल लोगों को भी मिलेगा लाभ

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड/वनांचल एवं जेपी आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग से प्राप्त 13वीं संपुष्ट सूची को भी पूर्व में स्वीकृति दी है. मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि आंदोलन की अंतिम पंक्ति में शामिल रहे पात्र आंदोलनकारियों को भी झारखंड आंदोलनकारियों को मिलने वाले लाभ दिये जायें.

हर वर्ग के लोगों ने किया आंदोलन में योगदान

उल्लेखनीय है कि अलग झारखंड राज्य के लिए बहुत से लोगों ने अपनी शहादत दी. अलग राज्य की मांग कर रहे नेताओं को बचाने के लिए बहुत से लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दे दी. किसी ने सशस्त्र आंदोलन किया, तो किसी ने लेखनी से अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को धार दी. कवि और गीतकारों ने भी इसमें अपना योगदान दिया.

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झारखंड आंदोलनकारियों को मिलेंगी सुविधाएं

अलग झारखंड राज्य बनने के बाद से लगातार मांग हो रही थी कि झारखंड राज्य के लिए अपना खून बहाने वाले, आंदोलन करने वाले लोगों को आंदोलनकारी का दर्जा मिले. उन्हें कुछ अलग सुविधाएं सरकार की ओर से मिलें. इसी के तहत झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग का गठन किया गया. इसमें अब तक 413 लोगों को झारखंड आंदोलनकारी के रूप में मान्यता मिली है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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