AI पर चीन और अमेरिका के मुकाबले कहां खड़ा है भारत? कितना करते हैं खर्च?

Published by :Rajeev Kumar
Published at :02 Feb 2025 12:25 PM (IST)
विज्ञापन
AI Spend in India

AI Spend in India

भारत में AI में निवेश बढ़ रहा है, लेकिन यह अमेरिका और चीन की तुलना में कम है. हालांकि भारत सरकार ने एआई को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं और पहल शुरू की हैं.

विज्ञापन

बजट 2025 के अपने भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एआई के लिए खास प्रावधान किये हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में चीन और अमेरिका ने बड़ी प्रगति की है और दोनों देश इस तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भारी निवेश कर रहे हैं. चीन के DeepSeek जैसे AI प्लैटफॉर्म ने ChatGPT और मेटा एआई जैसी कंपनियों को चुनौती दी है, वहीं अमेरिका एआई के क्षेत्र में सबसे आगे है.

भारत में भी AI पर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या भारत इस तकनीक में चीन और अमेरिका से पिछड़ रहा है. इसके साथ ही, AI की प्रगति को लेकर इंफोसिस और उसके पूर्व CEO विशाल सिक्का का नाम अक्सर लिया जाता है, क्योंकि सिक्का ने AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के लिए इंफोसिस में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे.

बजट 2025 के अपने भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एआई के लिए खास प्रावधान किये हैं. भारत ने AI के क्षेत्र में कई पहल की हैं, जैसे कि सरकारी योजनाएं, निजी क्षेत्र का निवेश और शिक्षा क्षेत्र में सुधार, लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या भारत चीन और अमेरिका के मुकाबले AI में अपनी ताकत को प्रभावी रूप से बढ़ा पाएगा. आइए जानें कि एआई के क्षेत्र में चीन और अमेरिका के मुकाबले कहां खड़ा है भारत.

एआई पर कितना खर्च कर रहा है अमेरिका ?

अमेरिका एआई अनुसंधान और विकास में अग्रणी है और इसमें सबसे अधिक निवेश कर रहा है. अमेरिकी सरकार और निजी कंपनियां मिलकर एआई में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं. 2023 में, अमेरिका ने एआई और संबंधित क्षेत्रों में लगभग 20 अरब डॉलर का खर्च किया. इसके अलावा, अमेरिका में प्रमुख कंपनियां जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, और ऐपल भी एआई पर भारी निवेश कर रही हैं.

एआई पर चीन कितना खर्च कर रहा है ?

चीन भी एआई में महत्वपूर्ण निवेश कर रहा है, खासतौर पर एआई को औद्योगिक और सैन्य क्षेत्र में लागू करने के लिए. चीन ने 2023 में एआई अनुसंधान और विकास में करीब 10 अरब डॉलर का खर्च किया. इसके अलावा, चीनी सरकार ने 2030 तक एआई में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए चीन ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से भारी निवेश जुटाया है.

भारत एआई पर कितना खर्च कर रहा है ?

भारत में एआई में निवेश बढ़ रहा है, लेकिन यह अमेरिका और चीन की तुलना में कम है. भारत ने 2023 में एआई पर लगभग 1-2 अरब डॉलर का खर्च किया, हालांकि भारत सरकार ने एआई को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं और पहलें शुरू की हैं. इन योजनाओं के तहत सरकारी निवेश बढ़ने की संभावना है, खासतौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए.

कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि अमेरिका और चीन एआई में भारी निवेश कर रहे हैं, जबकि भारत का निवेश अभी सीमित है, लेकिन भविष्य में इसके बढ़ने की संभावना है. इन देशों का एआई में निवेश उनकी आर्थिक, सैन्य और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए अहम है.

DeepSeek: चीन के छोटे स्टार्टअप ने सिलिकॉन वैली में कैसे मचाया तूफान? पस्त हो गई दिग्गज अमेरिकी कंपनियां

Google Daily Listen Feature: गूगल ने लाॅन्च किया ‘डेली लिसन’ फीचर, ऐसे करें इस्तेमाल

Grok AI ने वह कर दिखाया, जो डॉक्टर्स न कर सके, फ्रैक्चर का पता लगाकर किया कमाल

MAAIA: आर्ट और टेक्नोलॉजी का मेल, भारत की पहली AI सिंगर से मिलिए

विज्ञापन
Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola