ePaper

व्रत में साबूदाना क्यों है खास? ChatGPT ने बताये फायदे और डिशेज

Updated at : 21 Aug 2025 2:10 PM (IST)
विज्ञापन
Sabudana Fasting Food Recipes Chatgpt Answers

चैटजीपीटी ने बताया व्रत में साबूदाना क्यों है खास

ChatGPT का इस्तेमाल हर कोई कर रहा है. रोजाना कई लोग AI चैटबॉट से आढ़े-टेढ़े सवाल भी पूछ रहे हैं, ऐसे में आज हमने भी चैटजीपीटी से एक सवाल किया कि व्रत और त्योहार में साबूदाना की खास जगह है? जिसके जवाब के साथ चैटजीपीटी ने कई डिशेज के बारे में बताया.

विज्ञापन

Sabudana Fasting Food Recipes Chatgpt Answers: व्रत और त्योहार में साबूदाना की खास जगह है? हमने चैटजीपीटी से इस सवाल का जवाब पूछा. एआई चैटबॉट ने इसके फायदे, इतिहास और परंपरा के साथ-साथ आसान रेसिपीज भी बताये. चैटजीपीटी ने बताया कि, व्रत और उपवास भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, और इन दिनों में खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है. ऐसे समय में साबूदाना एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जो न सिर्फ ऊर्जा देता है बल्कि परंपरा और स्वास्थ्य दोनों से जुड़ा हुआ है. चाहे साबूदाना खिचड़ी हो या वड़ा, यह हर रूप में स्वादिष्ट और व्रत के अनुकूल होता है.

साबूदाना क्या है?

साबूदाना टैपिओका नामक पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है. इसे स्टार्च से प्रोसेस करके छोटे-छोटे मोती जैसे दानों में बदला जाता है. यह ग्लूटन-फ्री होता है और पचने में आसान होता है, इसलिए व्रत के दौरान इसका सेवन बढ़ जाता है.

व्रत में साबूदाना खाने के फायदे

  • ऊर्जा का स्रोत: साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जो उपवास के दौरान शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है.
  • पाचन में आसान: यह हल्का होता है और पेट को आराम देता है.
  • ग्लूटन-फ्री: एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित विकल्प.
  • हाइड्रेशन में मददगार: इसमें पानी को सोखने की क्षमता होती है, जिससे शरीर में नमी बनी रहती है.

परंपरा और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में व्रत के दौरान सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है. साबूदाना को सात्विक माना जाता है, क्योंकि यह किसी भी प्रकार के मांस या प्याज-लहसुन से रहित होता है. यही कारण है कि नवरात्रि, एकादशी, महाशिवरात्रि जैसे पर्वों में इसका उपयोग बढ़ जाता है.

भारतीय रसोई का हिस्सा

भारत में साबूदाना का उपयोग ब्रिटिश काल में शुरू हुआ था, जब इसे आयात किया गया. धीरे-धीरे यह भारतीय रसोई का हिस्सा बन गया, खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में. आज यह पूरे देश में व्रत के भोजन का मुख्य हिस्सा बन चुका है.

व्रत में बनने वाली लोकप्रिय साबूदाना डिशेज

1. साबूदाना खिचड़ी सामग्री: साबूदाना – 1 कप (भिगोया हुआ) उबले आलू – 1 मूंगफली – 2 टेबलस्पून हरी मिर्च – 1-2 सेंधा नमक, घी, करी पत्ता

बनाने की विधि: साबूदाना को 4 घंटे भिगोकर छान लें. घी में मूंगफली भूनें, फिर हरी मिर्च और करी पत्ता डालें. आलू और साबूदाना डालकर सेंधा नमक मिलाएं. धीमी आंच पर पकाएं जब तक साबूदाना पारदर्शी हो जाए.

2. साबूदाना वड़ा सामग्री: साबूदाना – 1 कप उबले आलू – 2 मूंगफली – 2 टेबलस्पून हरी मिर्च, धनिया, सेंधा नमक

बनाने की विधि: साबूदाना भिगोकर छान लें. सभी सामग्री मिलाकर टिक्की बनाएं. गरम तेल में डीप फ्राई करें.

3. साबूदाना थालीपीठ / पराठा सामग्री: साबूदाना – 1 कप उबले आलू – 2 हरी मिर्च, धनिया, सेंधा नमक

बनाने की विधि: सभी सामग्री मिलाकर आटा जैसा गूंध लें. हाथ से बेलकर तवे पर सेंकें.

4. साबूदाना खीर सामग्री: साबूदाना – 1/2 कप दूध – 1 लीटर चीनी – 1/2 कप इलायची, ड्राई फ्रूट्स

बनाने की विधि: साबूदाना को उबालें. दूध में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं. चीनी और इलायची डालें.

5. साबूदाना लड्डू सामग्री: साबूदाना पाउडर – 1 कप नारियल – 1/2 कप घी – 1/4 कप शक्कर – 1/2 कप

बनाने की विधि: साबूदाना पाउडर और नारियल को घी में भूनें. शक्कर मिलाकर लड्डू बना लें.

6. साबूदाना ढोकला सामग्री: साबूदाना – 1 कप उबले आलू – 1 दही – 1/2 कप सेंधा नमक, हरी मिर्च

बनाने की विधि: सभी सामग्री मिलाकर बैटर बनाएं. स्टीमर में 15–20 मिनट पकाएं.

7. साबूदाना पापड़ विधि: साबूदाना को 3–4 घंटे भिगोकर उबालें. मिर्च पेस्ट, जीरा, नींबू रस मिलाएं. प्लास्टिक शीट पर फैलाकर 2–3 दिन धूप में सुखाएं. तलकर या सेंककर खाएं.

8. साबूदाना चिवड़ा सामग्री: नायलॉन साबूदाना – 3/4 कप मूंगफली – 1/4 कप हरी मिर्च, करी पत्ता, सूखा नारियल सेंधा नमक, चीनी

बनाने की विधि: साबूदाना को छोटे बैच में डीप फ्राई करें. मूंगफली, मिर्च, नारियल भी तलें. सब मिलाकर सेंधा नमक और चीनी डालें.

कैसे तैयार होता है साबूदाना?

साबूदाना, जिसे टैपिओका पर्ल्स भी कहा जाता है, मुख्य रूप से कसावा नामक जड़ वाली फसल से तैयार किया जाता है. इसकी निर्माण प्रक्रिया कई चरणों में होती है. सबसे पहले कसावा की जड़ों को खेतों से निकालकर अच्छी तरह धोया जाता है और उनका छिलका हटाया जाता है. इसके बाद इन जड़ों को पानी के साथ पीसकर एक दूधिया मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसमें स्टार्च होता है. इस मिश्रण को छानकर फाइबर और अशुद्धियां अलग की जाती हैं. फिर इस स्टार्च को सुखाया जाता है ताकि उसमें नमी न रहे. सूखे स्टार्च को विशेष मशीनों में डालकर छोटे-छोटे गोल मोती बनाए जाते हैं, जिन्हें साबूदाना कहा जाता है. इन मोतियों को हल्की आंच पर भूनकर पूरी तरह सुखाया जाता है और फिर पैकिंग करके बाजार में भेजा जाता है. भारत में तमिलनाडु, विशेष रूप से सलेम क्षेत्र, साबूदाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यह प्रक्रिया पारंपरिक कृषि और आधुनिक तकनीक का सुंदर मेल है, जिससे एक सरल लेकिन ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थ तैयार होता है, जो व्रत और उपवास के दौरान विशेष रूप से पसंद किया जाता है.

ChatGPT से पूछा- दूध सफेद लेकिन मक्खन पीला क्यों? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

ChatGPT 5 ने बताया अंडा और पनीर में कौन है प्रोटीन का असली बादशाह?

विज्ञापन
Shivani Shah

लेखक के बारे में

By Shivani Shah

डिजिटल पत्रकारिता में 3 सालों का अनुभव है. प्रभात खबर में जूनियर टेक कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं. टेक्नोलॉजी कैटेगरी में ये स्मार्टफोन से लेकर टेक-टिप्स, गैजेट्स, एआई, सॉफ्टवेयर और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च-बेस्ड, इन-डेप्थ और यूजर-फोकस्ड कंटेंट लिखती हैं. इसके अलावा ये ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें भी लिखती हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola