फोन खो गया तो घबराएं नहीं, लोकेशन बता देगी ये ट्रिक

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 10 Feb 2026 3:59 PM

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90% लोग नहीं जानते, ऐसे ट्रैक होता है खोया हुआ मोबाइल

फोन खोने या चोरी होने पर घबराएं नहीं. Android और iPhone में मौजूद ये सीक्रेट फीचर फोन की लोकेशन ट्रैक करने और डेटा बचाने में करता है मदद. 90% लोग नहीं जानते ये तरीका

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आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल या चैट का जरिया नहीं है, बल्कि इसमें हमारी पर्सनल तस्वीरें, बैंकिंग ऐप्स, ऑफिस डेटा और डिजिटल पहचान तक जुड़ी होती है. ऐसे में फोन का खो जाना या चोरी हो जाना किसी बड़े झटके से कम नहीं लगता. हैरानी की बात यह है कि करीब 90 प्रतिशत लोग आज भी नहीं जानते कि उनका खोया हुआ फोन बिना किसी एक्स्ट्रा ऐप के ट्रैक किया जा सकता है. अगर समय रहते सही तरीका अपना लिया जाए, तो फोन की लोकेशन से लेकर डेटा तक सुरक्षित किया जा सकता है.

Android फोन यूजर्स के लिए काम की ट्रिक

अगर आपका एंड्रॉयड फोन खो गया है या चोरी हो गया है, तो Google का इन-बिल्ट फीचर आपकी बड़ी मदद कर सकता है. किसी दूसरे मोबाइल या लैपटॉप में अपने Google अकाउंट से लॉगिन करके “Find My Device” सर्विस का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह फीचर फोन की मौजूदा या आखिरी लोकेशन दिखाता है. इतना ही नहीं, आप फोन को रिंग करा सकते हैं, लॉक कर सकते हैं या जरूरत पड़ने पर पूरा डेटा रिमोटलीडिलीट भी कर सकते हैं. शर्त बस इतनी है कि फोन में इंटरनेट और लोकेशन पहले से ऑन होनी चाहिए.

iPhone यूजर्स ऐसे करें फोन ट्रैक

iPhone यूज करने वालों के लिए Apple का “Find My iPhone” फीचर किसी लाइफसेवर से कम नहीं है. किसी भी ब्राउजर में iCloud वेबसाइट खोलकर AppleID से लॉगिन करें. यहां आपको मैप पर फोन की लोकेशन दिख जाएगी. अगर फोन पास में कहीं गिर गया है तो साउंड प्ले करके उसे ढूंढा जा सकता है. चोरी की स्थिति में फोन को Lost Mode में डालकर लॉक किया जा सकता है, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति आपके डेटा तक नहीं पहुंच पाएगा.

फोन बंद हो जाए तब भी उम्मीद बाकी

बहुत से लोग मान लेते हैं कि फोन बंद हो गया तो अब कुछ नहीं हो सकता, जबकि ऐसा नहीं है. Android और iPhone दोनों ही सिस्टम में आखिरी बार ऑनलाइन रहने की लोकेशन सेव हो जाती है. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि फोन आखिरी बार कहां इस्तेमाल हुआ था. कई मामलों में यही जानकारी पुलिस को देने पर फोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

पहले से करें ये सेटिंग, तभी आएगी काम

फोन ट्रैक करने की ये ट्रिक तभी काम आती है जब कुछ जरूरी सेटिंग पहले से ऑन हों. जैसे Google अकाउंट या AppleID में साइन-इन रहना, लोकेशन सर्विस चालू होना और इंटरनेट कनेक्शन एक्टिव होना. इसके अलावा स्क्रीन लॉक और मजबूत पासवर्ड या बायोमेट्रिक सिक्योरिटी भी बेहद जरूरी है, ताकि फोन गलत हाथों में जाने पर भी डेटा सुरक्षित रहे.

फोन मिले या न मिले, डेटा जरूर बचाएं

अगर फोन मिलने की उम्मीद कम लग रही हो, तो सबसे पहले रिमोट डेटा वाइप का ऑप्शन इस्तेमाल करना चाहिए. इससे आपकी बैंकिंग डिटेल, फोटो और निजी जानकारी किसी गलत इंसान तक नहीं पहुंचेगी. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स कहते हैं- फोन से ज्यादा जरूरी उसमें मौजूद डेटा की सुरक्षा है.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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