इंडक्शन या इंफ्रारेड? नया कुकटॉप खरीदने से पहले जरूर पढ़ें ये गाइड

Edited by Rajeev Kumar
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induction vs infrared cooktop

इंडक्शन और इंफ्रारेड कुकटॉप में बड़ा फर्क जानें. स्पीड, बिजली खर्च, सेफ्टी और कुकवेयर के आधार पर समझें कौन सा कुकटॉप आपके किचन के लिए सही विकल्प है.

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रसोई में गैस से इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर शिफ्ट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन यहां भी कंफ्यूजन कम नहीं है. इंडक्शन लें या इंफ्रारेड कुकटॉप? दोनों दिखने में लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है और यही फर्क आपकी कुकिंग स्पीड, बिजली खर्च और सेफ्टी को तय करता है. अगर आप भी नया कुकटॉप खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन सा विकल्प आपके घर और किचन स्टाइल के लिए सही रहेगा.

कैसे काम करते हैं दोनों कुकटॉप?

इंडक्शन कुकटॉप मैग्नेटिक टेक्नोलॉजी पर काम करता है. इसमें हीट सीधे बर्तन के अंदर पैदा होती है, यानी पैन ही हीट का सोर्स बन जाता है. यही वजह है कि यह तेजी से खाना पकाता है और आसपास की सतह ज्यादा गर्म नहीं होती.

वहीं इंफ्रारेड कुकटॉप में हीट पहले ग्लास के नीचे मौजूद हीटिंग एलिमेंट में बनती है, फिर वह गर्मी ग्लास के जरिए बर्तन तक पहुंचती है. इसका मतलब है कि कुकटॉप की सतह खुद भी काफी गर्म हो जाती है.

स्पीड और परफॉर्मेंस में कौन आगे?

अगर बात सिर्फ स्पीड की हो, तो इंडक्शन साफ तौर पर आगे है. इसमें पानी उबालना या जल्दी खाना बनाना ज्यादा तेज होता है क्योंकि ऊर्जा सीधे बर्तन तक पहुंचती है.

इंफ्रारेड कुकटॉप भी अच्छा परफॉर्म करता है, खासकर हाई पावर मॉडल में, लेकिन इसमें पहले एलिमेंट और ग्लास गर्म होते हैं, इसलिए रिस्पॉन्स थोड़ा धीमा महसूस हो सकता है.

बिजली की खपत और खर्च

इंडक्शन कुकटॉप ज्यादा एनर्जी एफिशिएंट माना जाता है. यह लगभग 85% ऊर्जा सीधे बर्तन तक पहुंचाता है, जिससे बिजली की बचत होती है.

इंफ्रारेड कुकटॉप की एफिशिएंसी थोड़ी कम होती है, क्योंकि कुछ हीट आसपास भी निकलती है. अगर आप रोजाना ज्यादा कुकिंग करते हैं, तो लंबे समय में इंडक्शन सस्ता पड़ सकता है.

कुकवेयर और उपयोग में बड़ा फर्क

यह सबसे बड़ा फैसला करने वाला पॉइंट है. इंडक्शन में सिर्फ वही बर्तन काम करते हैं जिनमें मैग्नेट चिपकता है, यानी खास तरह के स्टील या आयरन के बर्तन.

इंफ्रारेड कुकटॉप यहां ज्यादा फ्लेक्सिबल है. इसमें स्टील, एल्युमिनियम, आयरन या सिरेमिक लगभग सभी फ्लैट बॉटम बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं. भारतीय किचन में तवा या अलग-अलग बर्तनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए यह बड़ा फायदा है.

सेफ्टी और रोजमर्रा का अनुभव

इंडक्शन कुकटॉप अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसकी सतह कम गर्म होती है और यह तब तक हीट नहीं करता जब तक बर्तन रखा न हो.

इंफ्रारेड में ओपन फ्लेम तो नहीं होता, लेकिन इसकी सतह बहुत गर्म हो जाती है और कुकिंग के बाद भी कुछ समय तक गर्म रहती है. इसलिए बच्चों वाले घरों में थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है.

आखिर किसे चुनें?

अगर आप तेज कुकिंग, कम बिजली खर्च और बेहतर सेफ्टी चाहते हैं, तो इंडक्शन कुकटॉप ज्यादा समझदारी भरा विकल्प है.

लेकिन अगर आपके पास अलग-अलग तरह के बर्तन हैं और आप बिना किसी झंझट के उन्हें इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इंफ्रारेड कुकटॉप बेहतर रहेगा. खासकर भारतीय किचन में जहां तवा, कड़ाही और अलग मटेरियल के बर्तन रोज इस्तेमाल होते हैं, वहां यह ज्यादा प्रैक्टिकल साबित होता है.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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