इंडक्शन या इंफ्रारेड? नया कुकटॉप खरीदने से पहले जरूर पढ़ें ये गाइड

Published by :Rajeev Kumar
Published at :24 Apr 2026 1:06 PM (IST)
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induction vs infrared cooktop

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इंडक्शन और इंफ्रारेड कुकटॉप में बड़ा फर्क जानें. स्पीड, बिजली खर्च, सेफ्टी और कुकवेयर के आधार पर समझें कौन सा कुकटॉप आपके किचन के लिए सही विकल्प है.

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रसोई में गैस से इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर शिफ्ट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन यहां भी कंफ्यूजन कम नहीं है. इंडक्शन लें या इंफ्रारेड कुकटॉप? दोनों दिखने में लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है और यही फर्क आपकी कुकिंग स्पीड, बिजली खर्च और सेफ्टी को तय करता है. अगर आप भी नया कुकटॉप खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन सा विकल्प आपके घर और किचन स्टाइल के लिए सही रहेगा.

कैसे काम करते हैं दोनों कुकटॉप?

इंडक्शन कुकटॉप मैग्नेटिक टेक्नोलॉजी पर काम करता है. इसमें हीट सीधे बर्तन के अंदर पैदा होती है, यानी पैन ही हीट का सोर्स बन जाता है. यही वजह है कि यह तेजी से खाना पकाता है और आसपास की सतह ज्यादा गर्म नहीं होती.

वहीं इंफ्रारेड कुकटॉप में हीट पहले ग्लास के नीचे मौजूद हीटिंग एलिमेंट में बनती है, फिर वह गर्मी ग्लास के जरिए बर्तन तक पहुंचती है. इसका मतलब है कि कुकटॉप की सतह खुद भी काफी गर्म हो जाती है.

स्पीड और परफॉर्मेंस में कौन आगे?

अगर बात सिर्फ स्पीड की हो, तो इंडक्शन साफ तौर पर आगे है. इसमें पानी उबालना या जल्दी खाना बनाना ज्यादा तेज होता है क्योंकि ऊर्जा सीधे बर्तन तक पहुंचती है.

इंफ्रारेड कुकटॉप भी अच्छा परफॉर्म करता है, खासकर हाई पावर मॉडल में, लेकिन इसमें पहले एलिमेंट और ग्लास गर्म होते हैं, इसलिए रिस्पॉन्स थोड़ा धीमा महसूस हो सकता है.

बिजली की खपत और खर्च

इंडक्शन कुकटॉप ज्यादा एनर्जी एफिशिएंट माना जाता है. यह लगभग 85% ऊर्जा सीधे बर्तन तक पहुंचाता है, जिससे बिजली की बचत होती है.

इंफ्रारेड कुकटॉप की एफिशिएंसी थोड़ी कम होती है, क्योंकि कुछ हीट आसपास भी निकलती है. अगर आप रोजाना ज्यादा कुकिंग करते हैं, तो लंबे समय में इंडक्शन सस्ता पड़ सकता है.

कुकवेयर और उपयोग में बड़ा फर्क

यह सबसे बड़ा फैसला करने वाला पॉइंट है. इंडक्शन में सिर्फ वही बर्तन काम करते हैं जिनमें मैग्नेट चिपकता है, यानी खास तरह के स्टील या आयरन के बर्तन.

इंफ्रारेड कुकटॉप यहां ज्यादा फ्लेक्सिबल है. इसमें स्टील, एल्युमिनियम, आयरन या सिरेमिक लगभग सभी फ्लैट बॉटम बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं. भारतीय किचन में तवा या अलग-अलग बर्तनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए यह बड़ा फायदा है.

सेफ्टी और रोजमर्रा का अनुभव

इंडक्शन कुकटॉप अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसकी सतह कम गर्म होती है और यह तब तक हीट नहीं करता जब तक बर्तन रखा न हो.

इंफ्रारेड में ओपन फ्लेम तो नहीं होता, लेकिन इसकी सतह बहुत गर्म हो जाती है और कुकिंग के बाद भी कुछ समय तक गर्म रहती है. इसलिए बच्चों वाले घरों में थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है.

आखिर किसे चुनें?

अगर आप तेज कुकिंग, कम बिजली खर्च और बेहतर सेफ्टी चाहते हैं, तो इंडक्शन कुकटॉप ज्यादा समझदारी भरा विकल्प है.

लेकिन अगर आपके पास अलग-अलग तरह के बर्तन हैं और आप बिना किसी झंझट के उन्हें इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इंफ्रारेड कुकटॉप बेहतर रहेगा. खासकर भारतीय किचन में जहां तवा, कड़ाही और अलग मटेरियल के बर्तन रोज इस्तेमाल होते हैं, वहां यह ज्यादा प्रैक्टिकल साबित होता है.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

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राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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