Geyser Tips: गीजर चलाते समय आपकी ये 4 आदतें कम कर देंगी बिजली बिल, तीसरी वाली तो जरूर करें फॉलो

Published by :Ankit Anand
Published at :12 Dec 2025 4:01 PM (IST)
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Geyser Tips To Reduce Electricity Bill

Geyser Tips To Reduce Electricity Bill

Geyser Tips: ठंड आते ही घरों में गीजर का यूज काफी बढ़ जाता है. यूज बढ़ने के साथ ही बिजली का बिल भी पहले से ज्यादा आने लगता है. लेकिन कुछ आसान और स्मार्ट तरीकों को अपनाकर आप अपने बिजली बिल में अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे.

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Geyser Tips: कड़ाके की ठंड पड़ रही है और जिन घरों में गीजर लगा है, वहां उसका यूज भी तेजी से बढ़ गया है. यूज बढ़ने के साथ ही बिजली का बिल भी पहले से ज्यादा आने लगता है. कई लोग गर्म पानी के लिए गीजर को घंटों तक चालू छोड़ देते हैं, जिससे बिजली ज्यादा खर्च होती है. लेकिन कुछ आसान और स्मार्ट तरीकों को अपनाकर आप अपने बिजली बिल में अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं. इन टिप्स को फॉलो करके आप आराम से गर्म पानी इस्तेमाल कर पाएंगे, वो भी बिना जेब पर ज्यादा बोझ डाले. आइए जानते हैं कैसे

गीजर को लगातार ऑन न रखें

अक्सर लोग सुबह नहाने तक गीजर को लगातार चालू छोड़ देते हैं. इससे बिजली ज्यादा खर्च होती है. बेहतर है कि आप गीजर को कुछ मिनट के लिए ऑन करें और पानी गर्म होते ही तुरंत बंद कर दें, क्योंकि पानी जल्दी गर्म हो जाता है और काफी देर तक गर्म भी रहता है. खासकर अगर आपके पास पुराना गीजर है जिसमें ऑटो-कट फीचर नहीं है, तो उसे मैन्युअली बंद करने की आदत डालना बिजली बचाने में काफी मदद करता है.

थर्मोस्टेट को सही टेम्परेचर पर सेट करें

अगर गीजर का थर्मोस्टेट 50 से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच सेट किया जाए, तो पानी अच्छी तरह गर्म होगा और बिजली भी कम खर्च होगी. गलत टेम्परेचर सेट करने से गीजर ज्यादा देर तक चलता रहता है, जिससे बिजली का बिल काफी बढ़ जाता है. इसलिए टेम्परेचर ठीक तरह सेट करने से गीजर बेहतर तरीके से चलता है और बिजली का खर्च भी कंट्रोल में रहता है.

बचा हुआ गर्म पानी इस्तेमाल करें

हर बार गीजर चालू करने की जरूरत नहीं होती, खासकर तब जब उसमें पहले से ही गरम पानी मौजूद हो. एक बार गीजर पानी गरम कर देता है, तो वो कई घंटों तक गुनगुना बना रहता है. ये आदत बिजली की खपत को काफी कम कर सकती है और इसका असर आपके डेली के बिल में भी साफ नजर आएगा.

पुराना गीजर बदल दें

पुराने गीजर ज्यादा बिजली खपत करते हैं क्योंकि उनमें नई टेक्नोलॉजी का यूज नहीं होता. 5-स्टार रेटिंग वाले गीजर कम बिजली लेते हैं और पानी भी जल्दी गर्म करते हैं. ऑटो-कट फीचर वाला गीजर पानी गर्म होते ही खुद बंद हो जाता है, जिससे बेकार की बिजली नहीं खर्च होती और बिजली का बिल भी कम आता है.

यह भी पढ़ें: गीजर चलाने से कितना बढ़ेगा बिजली बिल? हर घंटे की खपत का समझें आसान कैलकुलेशन

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By Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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