अब ट्रैफिक लाइट नहीं, QR कोड से साबित होगी इंसानियत! जानें क्या है Google का नया वेरिफिकेशन सिस्टम

Published by :Ankit Anand
Published at :11 May 2026 6:02 PM (IST)
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Google CAPTCHA replacement

गूगल करने जा रहा कैप्चा में बदलाव (Photo: AI Generated)

Google अब पुराने CAPTCHA को हटाकर QR कोड-बेस्ड वेरिफिकेशन सिस्टम लाने की तैयारी कर रहा है. इससे वेबसाइट एक्सेस तेज और आसान होगा. AI और बॉट्स की बढ़ती ताकत के कारण यह बदलाव किया जा रहा है. आइए इसे डिटेल में समझते हैं.

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कई सालों से हम सभी यह साबित करते आ रहे हैं कि हम इंसान हैं, कोई बॉट नहीं. इसके लिए Google ने हमें बार-बार CAPTCHA टेस्ट करवाए हैं. कभी ट्रैफिक लाइट पर क्लिक करो, कभी बस पहचानो, कभी सीढ़ियां चुनो, या फिर उन उलझे हुए अक्षरों और नंबरों को सही-सही टाइप करो जिन्हें पढ़ना ही अपने आप में एक पहेली लगता है. लेकिन अब कहानी बदलने वाली है.

Google धीरे-धीरे इस पुराने तरीके को पीछे छोड़ रहा है और एक नए सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है. आने वाले समय में CAPTCHA की जगह QR कोड बेस्ड वेरिफिकेशन देखने को मिलेगा, जिससे पहचान का प्रोसेस और भी आसान और फास्ट हो जाएगा. आइए इसे डिटेल में जानते हैं.

Google क्यों कर रहा ऐसा?

Google ने इस नए सिस्टम को Cloud Fraud Defense नाम दिया है. यह धीरे-धीरे उन वेबसाइट्स पर दिखना शुरू हो रहा है जो इसे सपोर्ट करती हैं.Google का कहना है कि अब पुराने CAPTCHA सिस्टम उतने असरदार नहीं रह गए हैं. वजह ये है कि आजकल AI मॉडल्स और ऑटोमेटेड बॉट्स इतने स्मार्ट हो चुके हैं कि वे इमेज-बेस्ड पजल्स को भी आसानी से हल कर लेते हैं. यूजर्स के लिए भी ये प्रोसेस अक्सर काफी झंझट भरा और थकाऊ भी हो जाता है.

इसी समस्या को देखते हुए Google का नया सिस्टम इस पूरे प्रोसेस को बदल देता है और साथ ही फ्रॉड डिटेक्शन को और बेहतर बनाता है. सिक्योरिटी के नजरिए से देखें तो यह एक समझदारी भरा कदम है. आज के समय में इंटरनेट पर बॉट ट्रैफिक, स्पैम अकाउंट्स, ऑटोमेटेड स्क्रैपिंग और फ्रॉड की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में इस तरह के नए सिस्टम की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस हो रही है.

Google Cloud Fraud Defense कैसे काम करता है?

Google का नया Cloud Fraud Defense सिस्टम अब पुराने ‘पजल सॉल्व करके साबित करो कि तुम इंसान हो’ वाले तरीके को बदलने जा रहा है. अब जब भी किसी वेबसाइट पर ट्रैफिक थोड़ा डाउटफुल लगेगा, तो आपको इमेज पजल की झंझट नहीं करनी पड़ेगी. उसकी जगह एक QR कोड दिखेगा. बस आपको अपने Android फोन से उस QR कोड को स्कैन करना होगा (और ध्यान रहे, फोन में Google Play Services चालू होना चाहिए). स्कैन करते ही Google जल्दी से चेक करेगा कि आपका डिवाइस भरोसेमंद है या नहीं, और फिर आपको वेबसाइट का एक्सेस मिल जाएगा. सुनने में थोड़ा लंबा प्रोसेस लग सकता है, लेकिन असल में ये काफी फास्ट और स्मूद होगा.

प्राइवेसी से जुड़ी समस्या भी है

यहां एक प्राइवेसी की बड़ी समस्या भी सामने आती है, और मामला थोड़ा जटिल हो जाता है. असल में यह सिस्टम काफी हद तक Google Play Services पर डिपेंड करता है. यही वजह है कि GrapheneOS, CalyxOS और /e/OS जैसे privacy-focused Android यूजर्स के बीच चिंता बढ़ गई है. ये ऑपरेटिंग सिस्टम जानबूझकर Google की सर्विसेज को हटा देते हैं ताकि यूजर की प्राइवेसी बेहतर रहे और ट्रैकिंग कम हो सके.

अब समस्या ये है कि कुछ यूजर्स का कहना है कि नए वेरिफिकेशन सिस्टम की वजह से उन्हें वेबसाइट्स तक पहुंचने में दिक्कत आ रही है. क्योंकि उनके फोन Google के ‘trust checks’ पास नहीं कर पा रहे हैं. यहीं असली चिंता शुरू होती है. प्राइवेसी पर ज्यादा ध्यान देने वाले लोगों के लिए मुद्दा सिर्फ CAPTCHA खत्म होने का नहीं है, बल्कि यह डर भी है कि कहीं आने वाले समय में इंटरनेट तक पहुंच भी धीरे-धीरे Google-controlled verification सिस्टम पर डिपेंड न हो जाए.

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लेखक के बारे में

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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