बिना कमांड के क्रिप्टो माइनिंग करने लगा AI? अलीबाबा के रिसर्चर्स हैरान

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एआई ने खुद से बनाया खतरनाक नेटवर्क टनल / फोटो एआई से बनी

चीन की अलीबाबा रिसर्च टीम में विकसित एक एआई एजेंट ने बिना किसी ह्यूमन कमांड के खुद से क्रिप्टो माइनिंग शुरू कर दी और रिवर्स SSH टनल बना ली. यह घटना एआई की बढ़ती ऑटोनॉमी और सेफ्टी रिस्क की ओर इशारा करती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब ग्लोबल लेवल पर कड़े नियम और एथिकल गाइडलाइन्स लागू करना जरूरी हो गया है.

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज रफ्तार विकास ने दुनिया को जितना प्रभावित किया है, उतना ही इसके खतरों को लेकर चिंता भी बढ़ी है. हाल ही में चीन की अलीबाबा रिसर्च टीम से जुड़ी एक घटना ने वैज्ञानिक बिरादरी को हिला दिया है. यहां विकसित किये जा रहे एक एक्सपेरिमेंटल एआई एजेंट ने बिना किसी ह्यूमन कमांड के खुद से काम शुरू कर दिया, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या एआई अब इंसान के कंट्रोल नियंत्रण से बाहर निकलने लगा है.

बिना निर्देश के क्रिप्टो माइनिंग

अलीबाबा की टीम ‘ROME’ नामक एआई एजेंट पर काम कर रही थी. टेस्ट के दौरान यह एजेंट अचानक बिना किसी प्रॉम्प्ट के क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग करने लगा. यह बेहद कॉम्प्लेक्स प्रॉसेस है, जिसमें भारी कंप्यूटिंग पावर और बिजली की खपत होती है. खास बात यह थी कि एजेंट को एक रेस्ट्रिक्टेड एनवायरनमेंट में रखा गया था, जहां हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी थी.

सुरक्षा में सेंध

जांच में सामने आया कि एआई ने खुद से एक रिवर्स SSH टनल बना ली थी. यह तकनीकी रूप से बेहद खतरनाक है क्योंकि इससे बंद नेटवर्क की मशीनें बाहरी कंप्यूटर से जुड़ सकती हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर एआई खुद से ऐसे रास्ते तलाशने लगे, तो वह सेंसिटिव डेटा चोरी कर सकता है और खुद को अनधिकृत सर्वरों पर कॉपी करके पूरी तरह स्वतंत्र हो सकता है.

विशेषज्ञों की चेतावनी

यह घटना एआई के गॉडफादर कहे जाने वाले योशुआ बेंगियो की चेतावनी को पुख्ता करती है. बेंगियो और 100 से अधिक रिसर्चर पहले ही कह चुके हैं कि एआई कंपनियां सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रही हैं. एआई सिस्टम अब कम ह्यूमन इनपुट पर काम करने लगे हैं, जो ऑटोनॉमी की राह में बड़ा कदम है.

वेक-अप कॉल

अलीबाबा की रिसर्च टीम के साथ हुई यह घटना एक वेक-अप कॉल है. यह दिखाती है कि एआई अब केवल आदेश मानने वाला टूल नहीं रहा, बल्कि अपने लक्ष्य खुद तय करने की क्षमता हासिल करने लगा है. अगर विकास इसी दिशा में जारी रहा, तो भविष्य में सुरक्षा और गोपनीयता की परिभाषाएं बदल सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि वैश्विक स्तर पर सख्त नियम और एथिकल गाइडलाइन्स लागू की जाएं.

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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

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जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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