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Pegasus Spyware क्या है? WhatsApp के रास्ते कैसे करता है जासूसी?

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Pegasus Spyware क्या है? यह WhatsApp को कैसे हैक करता है?
Pegasus Spyware क्या है? यह WhatsApp को कैसे हैक करता है?
fb/symbolic

What Is Pegasus Spyware, How It Works? भारत में पेगासस स्पाईवेयर इन दिनों बड़ी चर्चा में है. पहली बार यह 2019 में खबरों में तब आया था, जब कई WhatsApp यूजर्स को व्हाट्सऐप की ओर से मैसेज मिला कि उनके फोन को Pegasus की मदद से ट्रैक किया जा रहा है. इस लिस्ट में कई पत्रकार और कार्यकर्ता शामिल थे. इसके बाद से Pegasus सॉफ्टवेयर लगातार चर्चा में है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कई देशों की सरकार इसका इस्तेमाल कर रही हैं. अब ताजा खबर यह है कि भारत में 40 से ज्यादा पत्रकार, कार्यकर्ता और बाकी प्रमुख लोगों पर शिकंजा है. आइए जानते हैं कि यह Pegasus Spyware क्या है और यह व्हाट्सऐप के जरिये आपके फोन में कैसे घुस जाता है.

Pegasus क्या है?

पेगासस एक स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर है, जिसे एक इजरायली कंपनी एनएसओ (NSO Group) ने डेवलप किया है. यह कंपनी साइबर वेपन्स बनाने के लिए जानी जाती है. NSO Group ने कंफर्म किया है वह Pegasus सॉफ्टवेयर को सिर्फ सरकार को बेचती है और इसके मिसयूज के लिए जिम्मेदार नहीं है. यह स्पाईवेयर फोन के जरिये लोगों की जासूसी करता है. सितंबर 2018 में टोरंटो के सिटीजन लैब ने बताया कि पेगासस स्पाईवेयर इतना खतरनाक है कि बिना यूजर के परमिशन के वह फोन में इंस्टॉल हो जाता है और इसके जरिये जासूसी शुरू हो जाती है. सिटीजन लैब ने उस वक्त बताया था कि दुनियाभर के लगभग 45 देशों में यह स्पाईवेयर ऐक्टिव था.

कैसे काम करता है पेगासस?

पेगासस स्पाईवेयर जासूसी करने के लिए टारगेट के फोन पर एक्सप्लॉइट लिंक भेजता है. टारगेट उस लिंक को क्लिक कर देता है, तो जिस मालवेयर या कोड के जरिये जासूसी होती है, वह फोन में इंस्टॉल हो जाता है. कई बार उस लिंक को क्लिक करने की भी जरूरत नहीं पड़ती. मोबाइल फोन में इंस्टॉल होकर यह पूरे फोन पर कब्जा कर लेता है. फोन यूजर्स की सारी डिटेल्स उसके पास आ जाती हैं. यह यूजर की एंड टू एंड एनक्रिप्टेड चैट को भी ऐक्सेस कर सकता है. यूजर्स की ऐप एक्टिविटी को ट्रैक कर सकता है. इसके अलावा, यह आपकी लोकेशन, डेटा और वीडियो कैमरा के डेटा को भी प्रभावित करने में सक्षम है.

पेगासस स्पाइवेयर कैसे बचें से?

सबसे पहले तो यह जान लें कि तमाम कंपनियों ने ऐप्स और फोन के सिक्योरिटी फीचर्स बहुत बेहतर बना दिये हैं. अगर आप अपने आईफोन या एंड्रॉयड में ऐप्स के लेटेस्ट वर्जन का इस्तेमाल करेंगे, तो आपके फोन के हैक होने की आशंका कम हो सकती है. इसलिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट की सिक्योरिटी चेक करते रहें. अगर आपको कोई भी संदिग्ध मैसेज या लिंक आये, तो उस पर क्लिक करने से पहले सौ बार सोच लें.

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