गलती से भी फोन के USB पोर्ट में न लगाएं ये डिवाइस, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

Published by : Ankit Anand Updated At : 17 Feb 2026 3:36 PM

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स्मार्टफोन यूएसबी पोर्ट (Photo: slashgear)

फोन का USB पोर्ट थोड़ा नाजुक पार्ट होता है. इसलिए सस्ते या नकली चार्जर, केबल और बिना भरोसे वाले एक्सेसरी इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है. पब्लिक चार्जिंग केबल से डेटा चोरी का खतरा भी रहता है.

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फोन का USB पोर्ट सिर्फ चार्जिंग के लिए नहीं होता. इसके जरिए आप डेटा ट्रांसफर भी करते हैं और कई बार पेन ड्राइव या एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव जैसी डिवाइस भी कनेक्ट करते हैं. लेकिन यहां एक छोटी-सी लापरवाही आपका बड़ा नुकसान करा सकती है. अगर आप कोई सस्ती, नकली या बिना सर्टिफिकेट वाला डिवाइस USB पोर्ट में लगा देते हैं, तो इससे फोन को डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा होने पर सिर्फ चार्जिंग ही बंद नहीं होती, बल्कि फोन की मरम्मत पर अच्छा-खासा खर्च भी आ सकता है. इसलिए जरूरी है कि आप सोच-समझकर ही कोई भी डिवाइस अपने फोन के USB पोर्ट में लगाएं. आइए अब बात करते हैं कि आखिर कौन-कौन सी डिवाइस आपको USB पोर्ट में लगाने से बचनी चाहिए.

फेक फास्ट चार्जर

आजकल ज्यादातर कंपनियां अपने फोन के साथ फास्ट चार्जिंग सपोर्ट देती हैं. अगर आप ओरिजिनल और सर्टिफाइड चार्जर इस्तेमाल करते हैं, तो फोन आराम से 60-70 मिनट में फुल चार्ज हो जाता है. लेकिन कई लोग पैसे बचाने के चक्कर में या लापरवाही से लोकल या नकली चार्जर खरीद लेते हैं. शुरुआत में तो वो ठीक-ठाक काम करता हुआ लगता है और फोन जल्दी चार्ज भी कर देता है, लेकिन अंदर ही अंदर बैटरी और फोन दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है.

फेक केबल

सिर्फ चार्जर ही नहीं, केबल भी असली होनी चाहिए. सस्ती या नकली केबल भले ही आपके कुछ पैसे बचा दें, लेकिन ये पावर को सही तरीके से कंट्रोल नहीं कर पाती. इसका नतीजा ओवरहीटिंग और लंबे समय में फोन की दिक्कतों के रूप में सामने आ सकता है. इसलिए बेहतर है कि USB पोर्ट में हमेशा अच्छी क्वालिटी और भरोसेमंद केबल ही यूज करें.

पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की केबल

रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या कैफे में लगे पब्लिक चार्जिंग पॉइंट पर फोन चार्ज करना जितना आसान लगता है, उतना सेफ हमेशा नहीं होता. वहां लगी केबल्स के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है. यानी ऊपर से तो वो नॉर्मल चार्जिंग केबल दिखती है, लेकिन उसके जरिए आपका फोन हैक भी किया जा सकता है. अगर ऐसी केबल सीधे अपने फोन में लगा लेते हैं, तो बिना पता चले उसमें मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है, जो आपका पर्सनल डेटा चुरा लेता है.

बिना सर्टिफिकेट वाले एक्सेसरीज

आजकल ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर ऐसे ढेरों एक्सेसरीज मिल जाते हैं जिन्हें आप सीधे फोन के USB पोर्ट में लगा सकते हैं. जैसे छोटे-छोटे पंखे, LED लाइट्स या मिनी वैक्यूम क्लीनर वगैरह. कीमत कम होती है, इसलिए लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे खरीद भी लेते हैं. लेकिन दिक्कत ये है कि इनमें से ज्यादातर प्रोडक्ट्स सर्टिफाइड नहीं होते. लगातार इस्तेमाल करने पर ये गर्म होने लगते हैं और यही गर्मी आपके फोन के चार्जिंग सर्किट को नुकसान पहुंचा सकती है.

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लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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