नोटबंदी: पुराने नोट के मामले में भी सिलीगुड़ी मालामाल

सिलीगुड़ी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा के करीब चार महीने होने चले हैं और अब सबकुछ सामान्य होने को है. हजार तथा पांच सौ रूपये के नोट बंद होने के बाद नगदी लेने के लिए जो मारामारी मची थी,वह लगभग खत्म हो गया है.आमलोगों के साथ ही बैंक कर्मचारी भी राहत […]
सिलीगुड़ी. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा के करीब चार महीने होने चले हैं और अब सबकुछ सामान्य होने को है. हजार तथा पांच सौ रूपये के नोट बंद होने के बाद नगदी लेने के लिए जो मारामारी मची थी,वह लगभग खत्म हो गया है.आमलोगों के साथ ही बैंक कर्मचारी भी राहत की सांस ले रहे हैं. लेकिन नोटबंदी के पचास दिना कितने मुश्किल भरे थे,उसका दर्द आमलोगों के साथ बैंक कर्मी भी नहीं भूले हैं.अब जब नोटबंदी के चार महीने होने चला है तो स्पष्ट है कि देश भर में सारे पुराने नोट जमा कर दिये गए है.
पुराने नोट जमा कराने के मामले में सिलीगुड़ी और इसके आसपास का इलाका भी पीछे नहीं रहा है. सिलीगुड़ी की गिनती ऐसे ही एक प्रमुख व्यसायिक शहर के रूप में होती है. इस शहर से टैक्स की वसूली भी काफी अधिक होती है. कहा तो यह जाता है कि राज्य में कोलकाता के बाद इसी शहर से सबसे अधिक टैक्स की वसूली होती है. जाहिर है यहां के लोगों के पास पैसे भी होंगे. अचानक प्रधानमंत्री द्वारा पुराने नोट बंद किये जाने की घोषणा से यहां के लोग भी परेशान थे.
लोग जहां नगद निकालने के लिए दिनभर लाइन में लगे रहते थे तो पुराने नोट बैंकों में जमा कराने वालों की लाइन भी कम नहीं थी. एक अनुमान के अनुसार सिलीगुड़ सहित पूरे उत्तर बंगाल में पचास दिनों के दौरान विभिन्न बैंकों में कइ हजार करोड़ रूपये के पुराने नोट जमा कराये गए. इसका खुलासा कुछ बैंक अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद हुआ है.सिलीगुड़ी में बुधवार को बैंक ऑफ इंडिया के एक नये ब्रांच का उद्घाटन हुआ. उससे पहले इस बैंक के तमाम अधिकारी सिलीगुड़ी आए हुए है.मंगलवार की रात को जब इन अधिकारियों से बातचीत की गयी तो पता चला कि 50 दिनों के अंदर अकेले बैंक ऑफ इंडिया के ही सिलीगुड़ी जोन के शाखाओं में 550 करोड़ रूपये के पुराने नोट जमा हुए.बैंक ऑफ इंडिया के पूर्वी क्षेत्र के महा प्रबंधक एस के अग्रवाल ने कहा कि पचास दिन काफी मुश्किल भरे थे.
एक ओर जहां नगदी निकालने के लिए लोग परेशान थे तो वहीं दूसरी ओर पुरान हजार और पांच सौ रूपये के नोट जमा कराने वालों की भी कोइ कमी नहीं थी. बैंक कर्मियों को हर रोज ही ग्राहकों के गुस्से का शिकार होना पड़ता था. उसके बाद भी उनके बैंक के कर्मचारियों ने धीरज का परिचय दिया और देर रात तक काम कर लोगों को बैंकिंग सेवा देते रहे. श्री अग्रवाल ने सिलीगुड़ी के संदर्भ में कहा उन पचास दिनों में देश के अन्य भागों की तरह ही सिलीगुड़ी में नगदी की किल्लत रही.इस कमी को दूर करने के लिए बैंक ने विशेष तैयारियां की थी. सिलीगुड़ी में तो ओडिसा से भी नगदी भेजी गयी. वह बात कर ही रहे थे कि उनके साथ बैठे सहायक महा प्रबंधक एस एस दास ने कहा कि पड़ोसी राज्य सिक्किम से भी नगदी मंगा कर लोगों को देने की व्यवस्था की गयी.उस समय ग्राहकों के गुस्से का आलम यह था कि नगदी नहीं मिलने पर उनको समझाना मुश्किल हो रहा था.इसलिए गाड़ी कर सिक्किम से वहलोग नगदी लेकर सिलीगुड़ी आते थे. इधर,श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि सिलीगुड़ी उनके बैंक के कर्मचारी ग्राहकों को बैंकिंग सेवा देने के लिए आधी रात तक काम कर रहे थे.बाद में सभी को ओवरटाइम का भुगतान किया गया.सिलीगुड़ी जोन में बैंक ऑफ इंडिया की 64 ब्रांच हैं और इन ब्रांचों के कर्मचारियों को ओवर टाइम करने के लिए कुल 87 लाख रूपये का भुगतान किया गया.श्री अग्रवाल ने दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस निर्णय की जानकारी किसी को नहीं थी. यहां तक किसी बैंक के चेयरमैन तक को भी कोइ जानकारी नहीं दी गयी. रात आठ बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए जब प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा की तभी बैंकों के चेयरमैनों को भी इसकी जानकारी मिली. श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि नोटबंदी के दौर में किसी ग्राहक के साथ उनका कोइ बैंक कर्मचारी झगड़ ना पड़े,इसका खास ध्यान रखा गया था. वह स्वयं ब्रांच मैनेजरों के संपर्क में रहते थे. इसके अलाव अन्य दूसरे अधिकारियों को भी बीच-बीच में फोन आते रहता था. नोटबंदी के लाभ के संबंध में श्री अग्रवाल ने कहा कि सारा पैसा बैंकिंग सिस्टम में आ गया है. बैंकों के पास पैसे की कोइ कमी नहीं है.होम लोन और अन्य प्रकार का लोन लेना आसान हो जायेगा.दूसरी ओर एसएस दास ने कहा कि नोटबंदी के पचास दिन पूरे होते ही सभी पुराने नोट को कंटेनर में भर कर कोलकाता स्थित रिजर्व बैंक को कार्यालय को भेज दिया गया था. इसके लिए विशेष ट्रक की व्यवस्था की गयी थी.
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