राज्य बीज निगम को मुफ्त बांटने पड़े आलू बीज

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Dec 2016 7:29 AM

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जलपाईगुड़ी. आलू बीज के उचित दर विक्रय केंद्रों का बुरा हाल है. किसानों के ठंडे रुख को देखते हुए राज्य बीज निगम को आम लोगों के बीच मुफ्त में बीज बांटने पड़े. इसके बाद दुकान में ताला लगा दिया गया. कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया कि 10-15 दिनों से धूपगुड़ी किसान बाजार और जलपाईगुड़ी […]

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जलपाईगुड़ी. आलू बीज के उचित दर विक्रय केंद्रों का बुरा हाल है. किसानों के ठंडे रुख को देखते हुए राज्य बीज निगम को आम लोगों के बीच मुफ्त में बीज बांटने पड़े. इसके बाद दुकान में ताला लगा दिया गया.
कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया कि 10-15 दिनों से धूपगुड़ी किसान बाजार और जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के मालकानी हाट में उचित मूल्य पर आलू बीज बेचने के लिए दो विक्रय केंद्र खोले गये थे. इस दौरान बड़ी मुश्किल से एक क्विंटल आलू बीज बिका. राज्य बीज निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि उचित मूल्य बीज विक्रय केंद्र खोलकर उच्च अधिकारियों ने बीज का मूल्य 25 रुपये किलो तय किया. लेकिन इस दाम पर बीज खरीदने कोई किसान आया नहीं. इसके विभागीय रिपोर्ट के आधार पर बीज का दाम 19 रुपये किलो तय किया गया. फिर भी बीज की बिक्री नहीं हुई.

राज्य बीज निगम के सूत्रों ने बताया कि प्राथमिक तौर पर धूपगुड़ी केंद्र में 180 बस्ता और मालकानी हाट में 60 बस्ता बीज लाया गया था. जरूरत पड़ने पर और बीज पहुंचाये जाने की भी बात थी. लेकिन देखा जा रहा है कि इस साल खुला बाजार और उचित दर की दुकानों में बीते सालों के मुकाबले आलू बीज के खरीदार नहीं हैं. आलू व्यवसायी बबलू चौधरी का कहना है कि बहुत से व्यवसायी पंजाब के जालंधर, उत्तर प्रदेश से सर्टिफाइड बीज लेकर आये हुए थे. इन उन्नत बीजों को 2400 से 2600 रुपये क्विंटल में खरीद कर लाया गया था. लेकिन बीजों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं.

मजबूरन हमें 300 से 400 रुपये क्विंटल बीज बेचकर गोदाम खाली करना पड़ रहा है. आपूर्ति के मुकाबले आलू बीज की इस साल मांग कम है, ऊपर से नोटबंदी ने समस्या को और बढ़ा दिया. इस बार कई आलू बीज के व्यवसायी एक करोड़ से ऊपर के नुकसान में हैं. इधर राज्य बीज निगम के एक उत्पादन अधिकारी ने बताया कि इस बार आलू बीज की मांग नहीं है. नोटबंदी के चलते किसानों ने बीज नहीं खरीदे. पुराने रखे गये बीजों से ही बड़ी संख्या में किसानों ने काम चलाया. मजबूर होकर उचित मूल्य का आलू तीन रुपये किलो के हिसाब से फार्मर्स क्लबों और कुछ किसानों को दे दिया गया.


धूपगुड़ी के ब्लॉक कृषि उप-निदेशक कार्यालय के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि उचित दर के बीज केंद्र ने मुफ्त में ही आलू के बीच बांट दिये. इसके अलावा कोई उपाय नहीं था. बीज बोने का मौसम निकल जाने के बाद बीज सड़ जायेंगे. नोटबंदी और आलू बीज की अधिक आपूर्ति के कारण इस साल आलू बीज का बाजार पूरी तरह टूट गया है.
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