18 दिन से खराब है मालदा मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट

मालदा: मालदा मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक एवं एकेडमिक भवन की लिफ्ट बीते 18 दिनों से खराब पड़ी है. इसके चलते शिक्षकों और विद्यार्थियों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है. यहां तक की पठन-पाठन भी बंद होने को है. मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य अमित दां ने कहा कि बार-बार बोलने के बावजूद निर्माता कंपनी इसे […]
मालदा: मालदा मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक एवं एकेडमिक भवन की लिफ्ट बीते 18 दिनों से खराब पड़ी है. इसके चलते शिक्षकों और विद्यार्थियों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है. यहां तक की पठन-पाठन भी बंद होने को है. मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य अमित दां ने कहा कि बार-बार बोलने के बावजूद निर्माता कंपनी इसे ठीक करने में कोई रुचि नहीं दिखा रही है.
मालदा मेडिकल कॉलेज का निर्माण राज्य सरकार के अधीनस्थ कंपनी मैकिनटोज बर्न ने किया है. इसका प्रशासनिक और एकेडमिक भवन आठतल्ला है. भूतल पर उप-प्राचार्य, उपाधीक्षक का कक्ष है. दूसरे तल्ले पर प्राचार्य का कार्यालय है. इसके बाद के तलों पर मेडिकल छात्रों के लिए क्लासरूम और प्रयोगशालांए हैं. ज्यादातर पढ़ाई चौथे तल्ले पर होती है.
मेडिकल कॉलेज सूत्रों ने बताया कि लिफ्ट खराब रहने की वजह से उम्रदराज शिक्षक सीढ़ी चढ़कर क्लासरूम तक नहीं जा पा रहे हैं. एक दर्जन से ज्यादा चिकित्सक अध्यापक छुट्टी की दरखास्त देकर बाहर चले गये हैं. इसका सबसे ज्यादा नुकसान छात्र-छात्राओं को हो रहा है. वे सीढ़ी चढ़कर चौथे तल पर पहुंचते हैं, पर क्लास नहीं होने से उन्हें निराश होना पड़ता है. विद्यार्थियों का कहना है कि इस समस्या से सबसे ज्यादा नुकसान हमें हो रहा है. हमने सभी से शिकायत की है. लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन लिफ्ट चालू कराने का कोई इंतजाम नहीं कर पा रहा है. शिक्षक सीढ़ी चढ़कर ऊपर नहीं आना चाहते हैं. कई शिक्षक तो छुट्टी पर चले गये हैं. गत 12 सितंबर से यह लिफ्ट खराब है.
इस आठतल्ला भवन में कुल चार लिफ्ट हैं, लेकिन अभी ये सभी खराब हैं. यह भवन एक साल पहले ही बना है. अभी तक इसमें सभी काम पूरा नहीं हुआ है. उपाधीक्षक डॉ ज्योतिष चंद्र दास ने कहा कि कार्यालय पहुंचने के साथ ही मेरा पहला काम लिफ्ट चालू करने के लिए उपाय खोजना होता है. सभी बोलते हैं कि जल्द ही आदमी भेजा जा रहा है, लिफ्ट ठीक हो जायेगी. लेकिन अभी तक लिफ्ट ठीक करने कोई नहीं आया.
उप-प्राचार्य अमित दां ने बताया कि लिफ्ट 10 सितंबर से ही खराब है. 12 सितंबर को हमने नोटिस देकर जानकारी दी. इसके बाद से इसे ठीक कराने के लिए कई जगह चिट्ठी भेजी गयी. फोन किया गया. लेकिन भवन निर्माता संस्था ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है. पूरा मामला हमने कोलकाता के स्वास्थ्य भवन को भी बताया है.
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