गोजमुमो के बंद से थर्राया पहाड़

Published at :29 Sep 2016 1:57 AM (IST)
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गोजमुमो के बंद से थर्राया पहाड़

सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बुधवार को 12 घंटे के बंद ने पूरे पहाड़ को थर्रा दिया. एक ओर जहां गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) समर्थक बंद को सफल बनाने के लिए पूरी कोशिश में जुटे हुए थे,वहीं दूसरी ओर बंद को विफल करने के लिए राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भी पूरी ताकत झोंक […]

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सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बुधवार को 12 घंटे के बंद ने पूरे पहाड़ को थर्रा दिया. एक ओर जहां गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) समर्थक बंद को सफल बनाने के लिए पूरी कोशिश में जुटे हुए थे,वहीं दूसरी ओर बंद को विफल करने के लिए राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भी पूरी ताकत झोंक दी.

आलम यह रहा कि किसी प्रकार की अनहोनी की आशंका को लेकर यहां के आमलोग घर से ही नहीं निकले. लोग डर से अपने-अपने घरों में ही दुबके रहे. प्रशासन ने भी इस बंद को फेल करने की पूरी तैयारी कर ली थी.हर जगर सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किये गये थे और पूरे पहाड़ को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. प्रशासन के साथ ही पहाड़ पर डेरा डाले तीन मंत्रियों गौतम देव,रवींद्रनाथ घोष और जेम्स कुजुर ने दुकानों को खुलवाने की कोशिश की,लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ. पहाड़ पर अधिकांश दुकानें बंद थीं. सड़क से तमाम वाहन भी नदारद दिखे.

इक्का-दुक्का सरकारी वाहनों को छोड़ दें तो अन्य वाहनों की आवाजाही लगभग नहीं के बराबर हुयी.पहाड़ बंद को लेकर बुधवार सुबह से ही स्थिति तनावपूर्ण होनी शुरू हो गयी. खासकर कर्सियांग तथा कालिम्पोंग में कई बार स्थिति के बिगड़ने की नौबत आ गयी. सुबह जब कर्सियांग में राज्य के उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष तृणमूल समर्थकों को लेकर बंद के विरोध में जुलूस लेकर निकले तो रेलवे स्टेशन के निकट तृणमूल समर्थकों के साथ झड़प की स्थिति बन गयी.वहां तृणमूल के लोग पहले से ही जमे हुए थे. यहां अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर विद्यार्थी मोरचा द्वारा पहले से ही रिले अनशन जारी है. यहां सैकड़ों की संख्या में मोरचा समर्थक पहले से ही जमे हुए थे.

जैसे ही श्री घोष वहां जुलूस लेकर पहुंचे दोनों ही तरफ से नारेबाजी शुरू हो गयी.बड़ी संख्या में उपस्थित पुलिस बल ने स्थिति को काबू में किया. पहाड़ बंद के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने दार्जिलिंग शहर में भी रैली निकाली. जज बाजार स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय के आगे से निकाली गयी रैली में राज्य के जनजाति मंत्री जेम्स कुजुर, हिल तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष राजेन मुखिया, महासचिव एनवी खवास, तृणमूल मनोनित जीटीए सभासद मिलन डुक्पा आदि शामिल थे. इसबीच पुलिस ने तीन सौ भी अधिक बंद समर्थकों को विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार किया है.इसमें जीटीए सभासद अनित थापा का भी नाम शामिल है.उनकी गिरफ्तारी कर्सियांग से हुई है. इसके अलावा युवा मोरचा अध्यक्ष तिलक छेत्री,विद्यार्थी मोरचा के अध्यक्ष सत्येम लामा, महकमा समिति के सचिव विश्वास छेत्री आदि पुलिस ने हिरासत में लिया. कालिम्पोंग से जीटीए सभासद व मोरचा के केंद्रीय कमेटी के सदस्य डा आरवी भूजेल, युवा मोरचा कालिम्पोंग महकमा समिति सचिव विनय घीसिंग आदि को पुलिस ने पकड़ लिया.

कर्सियांग से जीटीए सभासद एंव मोरचा केन्द्रीय कमेटी के सदस्य अनित थापा,जीटीए सभासद महेंद्र राइ,अनुष थापा आदि को पकड़ा गया. मिरिक से जीटीए सभासद फुबी राई,अरूण घीसिंग,एलवी राई आदि को तथा मल्ली से युवा मोरचो के जैकब राई आदि को पकड़ा गया. कुल 304 मोरचा समर्थकों की गिरफ्तारी हुई है. दार्जिलिंग के जिला शासक अनुराग श्रीवास्तव ने भी इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि यह सभी जोर जबरदश्ती बंद कराने की कोशिश कर रहे थे. पहाड बंद के दौरान कालिम्पोंग में कुछ वाहन में तोड़फोड़ होने की भी खबर है.

प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच दोपहर बाद कर्सियांग और कालिम्पोंग में कुछ दुकानों को खुला भी देखा गया. ऐसे सरकारी कार्यालयों पर बंद को काई असर नहीं देखा गया. राज्य सरकार के सभी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थित सामान्य रही. डाक घर,बैंक आदि भी खुले थे. स्कूल कॉलेजों को भी खोलकर रखा गया था,लेकिन यहां विद्यार्थियों की उपस्थिति नदारद थी. दार्जिलिंग के डीएम अनुराग श्रीवास्तव ने बताया है कि सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति 97 प्रतिशत रही. खबर लिखे जाने तक कहीं से कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है.बिमल गुरुंग के नेतृत्व वाली गोजमुमो ने इस बंद का आह्वान किया था.

क्या है मामला
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब दार्जिलिंग आयी थीं तो उन्होंने पहाड़ पर विकास के लिए जीटीए को चार हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि देने की बात कही थी. ममता बनर्जी के इसी बयान का गोजमुमो विरोध कर रहा है. गोजमुमो नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने मात्र 258 करोड़ रुपये दिये हैं, जबकि ममता बनर्जी चार हजार करोड़ रुपये से अधिक देने की बात कर रही हैं. गोजमुमो ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से सबूत देने की मांग की थी. उसके बाद ही 28 तारीख को बंद का आह्वान कर दिया.
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