पहाड़ बंद को जबरन दबाना सही नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Sep 2016 8:07 AM (IST)
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सिलीगुड़ी. गोरखा जनमुक्ति मोरचा(गोजमुमो) के 28 सितंबर के बंद को असफल करने के लिए राज्य सरकार जिस प्रकार से शक्ति प्रदर्शन कर रही है,इससे लोकतंत्र को खतरा उत्पन्न हो गया है. बंद आंदोलन का एक लोकतांत्रिक तरीका है और इसे बल पूर्वक नहीं दबाया जा सकता.यह बातें जिला माकपा के वरिष्ठ नेता तथा सिलीगुड़ी नगर […]
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सिलीगुड़ी. गोरखा जनमुक्ति मोरचा(गोजमुमो) के 28 सितंबर के बंद को असफल करने के लिए राज्य सरकार जिस प्रकार से शक्ति प्रदर्शन कर रही है,इससे लोकतंत्र को खतरा उत्पन्न हो गया है. बंद आंदोलन का एक लोकतांत्रिक तरीका है और इसे बल पूर्वक नहीं दबाया जा सकता.यह बातें जिला माकपा के वरिष्ठ नेता तथा सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर व विधायक अशोक भट्टाचार्य ने कही. उन्होंने कहा कि कि गणतांत्रिक आंदोलन को बलपूर्वक दबाने की कोशिश करना अन्याय है. अशोक भट्टाचार्य इनदिनों स्वयं भी तृणमूल के साथ दो-दो हाथ कर रहे हैं. उन्होंने गोजमुमो द्वारा कल 28 सितंबर को बुलाये गए बंद का समर्थन किया है.
सिलीगुड़ी नगर निगम कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्री भट्टाचार्य ने कहा कि गोजमुमो गणतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रही है. मंत्रियो और नेताओं को पहाड़ पर तैनात कर बंद को जबरन विफल बनाने की जो साजिश राज्य सरकार ने रची है.यह गणतंत्र की हत्या है. गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन(जीटीए) और राज्य सरकार के बीच किसी भी प्रकार के विवाद को आपस में बैठकर सुलझाया जा सकता है. जीटीए का गठन भी तृणमूल राज्य सरकार ने ही किया था. इसके बाद भी लगातार जाति व धर्म के नाम में अलग-अलग बोर्ड का गठन किया जाना जीटीए की स्वायत्ता पर सीधा प्रहार है.
इससे जीटीए गठन का मूल मकसद ही समाप्त हो जाता है. बंद ना हो इसके लिये दोनों पक्षों में विचार-विमर्श के माध्यम से समस्या का समाधान करना चाहिए. दार्जिलिंग पहाड़ राज्य के लिए धरोहर है. राज्य सरकार को पहाड़ पर शांति बनाये रखने और विकास की गति को तेज करने के लिये कार्य करना चाहिए. राज्य सरकार टकराव की राजनीति कर आम जनजीवन को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है.
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