गोजमुमो का पहाड़ बंद आज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Sep 2016 6:39 AM (IST)
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सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बुधवार को 12 घंटे के बंद को लेकर अभी से ही स्थिति तनावपूर्ण होनी शुरू हो गयी है. बिमल गुरुंग के नेतृत्व वाली गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) ने इस बंद का आह्वान किया है. बंद को लेकर राज्य की तृणमूल सरकार तथा गोजमुमो आमने-सामने है. एक ओर जहां बंद […]
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सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बुधवार को 12 घंटे के बंद को लेकर अभी से ही स्थिति तनावपूर्ण होनी शुरू हो गयी है. बिमल गुरुंग के नेतृत्व वाली गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) ने इस बंद का आह्वान किया है. बंद को लेकर राज्य की तृणमूल सरकार तथा गोजमुमो आमने-सामने है.
एक ओर जहां बंद को सफल बनाने के लिए गोजमुमो ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं दूसरी ओर बंद को विफल करने के लिए राज्य सरकार ने भी युद्ध का ऐलान कर दिया है. राज्य सरकार के सभी विभागों ने अपने कार्यालय बंद के दौरान खुले रहने का दावा किया है. परिवहन विभाग से लेकर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों ने पहले ही पहाड़ पर अपने सभी कार्यालयों को खुले रखने का अध्यादेश जारी कर दिया है. इसके अलावा राज्य सरकार के अधीन अन्य सभी कार्यालय भी खुले रहेंगे.
तृणमूल कांग्रेस सरकार बंद को विफल बनाने के लिए इतनी जोरदार कोशिश कर रही है कि तीन मंत्रियों ने मंगलवार से ही पहाड़ पर डेरा डाल दिया है. राज्य के उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवीन्द्रनाथ घोष कर्सियांग पहुंच गये हैं, जबकि पर्यटन मंत्री गौतम देव ने कालिम्पोंग में डेरा जमा लिया है. राज्य के आदिवासी विकास मंत्री जेम्स कुजुर दार्जिलिंग में जमे हुए हैं.
यह सभी मंत्री कल बंद के दिन पहाड़ पर ही रहेंगे. गोजमुमो के इस बंद की मंत्री रवीन्द्रनाथ घोष तथा गौतम देव ने निंदा की है. पर्यटन मंत्री गौतम देव ने कहा है कि दुर्गा पूजा के समय बंद का आह्वान कर गोजमुमो ने एक तरह से युद्ध की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा है कि बिमल गुरुंग पहाड़ के लोगों का भरोसा खो चुके हैं.
इसीलिए बंद बुलाकर लोगों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं. पहाड़ के लोग बंद के पक्ष में नहीं हैं एवं यह लोग शांति तथा विकास चाहते हैं. उन्हें विश्वास है कि पहाड़ के लोग इस बंद को विफल कर देंगे. श्री देव ने आगे कहा कि वह कालिम्पोंग जा रहे हैं और बंद के दिन स्वयं स्थिति पर नजर रखेंगे. इस बीच, प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बंद के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किये गये हैं. पहाड़ पर पहले से ही सीआरपीएफ की तैनाती की गयी थी. अब इन सीआरपीएफ जवानों को विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है. दार्जिलिंग के जिला शासक अनुराग श्रीवास्तव ने कहा है कि बंद के नाम पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बरदाश्त नहीं की जायेगी. तमाम सरकारी कार्यालय खुले रखने का निर्देश दिया गया है.
सभी सरकारी कर्मचारी भी बंद के दौरान अपने-अपने कार्यालय में उपस्थित रहेंगे. जो लोग उपयुक्त कारण के बिना कार्यालय नहीं आयेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. श्री श्रीवास्तव ने आगे बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा भी आवश्यक निर्देश जारी किये गये हैं. इस बीच, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अपने कार्यालयों के खुले रखने के निर्देश के साथ ही सभी सरकारी राशन दुकानों को भी खुले रखने का निर्देश दिया गया है.
विभाग के निर्देशक ने इस आशय का पत्र दार्जिलिंग के जिला शासक को भेज दिया है. इसमें कहा गया है कि अगर सरकारी राशन दुकान नहीं खोले गये, तो डीलरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा. उपयुक्त कारण के दुकान बंद रखने वाले डीलरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. इसी प्रकार का निर्देश परिवहन विभाग ने भी जारी किया है. एनबीएसटीसी के सभी बसों को कल बंद के दिन भी पहाड़ी क्षेत्रों पर चलाने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही गैर सरकारी बस मालिकों से अपने-अपने वाहन चलाने के लिए कहा गया है. वाहनों की आवाजाही सामान्य रहे, इसके लिए परिवहन विभाग ने कंट्रोल रूम की भी स्थापना की है. राज्य सरकार ने बंद के खिलाफ कदम उठाया है.
वित्त विभाग ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 28 और 29 सितंबर को कार्यालय में उपस्थिति जरूरी कर दी है. इन तारीखों को कार्यालय नहीं आने पर कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया जायेगा. यदि इन तारीखों को किसी कर्मचारी के परिवार में किसी का निधन हुआ हो, या कर्मचारी स्वयं बीमार होकर अस्पताल में भरती हुआ हो, तो कारण बताओ नोटिस के जवाब में कर्मचारी इसकी जानकारी दे सकते हैं.
पहाड बंद के दौरान कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए दार्जिलिंग सदर थाने में बाहर से 200 जवान लाये गये हैं. इसमें सीआरपीएफ व राज्य पुलिस के जवान शामिल हैं. इनमें 50 महिला जवान भी शामिल हैं. इसी तरह से कर्सियांग, मिरिक और कालिम्पोंग में भी पुलिस बल उतारा गया है. दूसरी तरफ गोजमुमो ने भी बंद को सफल बनाने के लिए आक्रामक तेवर अख्तियार कर लिया है. गोजमुमो सुप्रीमो तथा जीटीए चीफ बिमल गुरुंग भी कालिम्पोंग पहुंचे हुए हैं.
प्रशासन ने कसी कमर पहाड़ पर सुरक्षा के तगड़े इंतजाम
क्या है मामला
कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब दार्जिलिंग आयी थीं तो उन्होंने पहाड़ पर विकास के लिए जीटीए को चार हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि देने की बात कही थी.
ममता बनर्जी के इसी बयान का गोजमुमो द्वारा विरोध हो रहा है. गोजमुमो नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा मात्र 258 करोड़ रुपये दिये गये हैं. जबकि ममता बनर्जी चार हजार करोड़ रुपये से अधिक देने की बात कर रही हैं. गोजमुमो ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से सबूत देने की मांग की थी. उसके बाद ही 28 तारीख को बंद का आह्वान कर दिया.
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