मलेशिया से पांच मजदूर बचकर आये

Published at :11 Sep 2016 4:05 AM (IST)
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मलेशिया से पांच मजदूर बचकर आये

मालदा. सिर्फ अन्य राज्यों में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी मालदा के श्रमिकों को परेशान किया जा रहा है. राज्य और केन्द्र सरकार को इस मामले में पहल करनी चाहिए. यह मांग उत्तर मालदा की कांग्रेस सांसद मौसम नूर ने की है. उल्लेखनीय है कि मालदा के पांच श्रमिकों को मलेशिया में प्रताड़ित किया […]

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मालदा. सिर्फ अन्य राज्यों में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी मालदा के श्रमिकों को परेशान किया जा रहा है. राज्य और केन्द्र सरकार को इस मामले में पहल करनी चाहिए. यह मांग उत्तर मालदा की कांग्रेस सांसद मौसम नूर ने की है. उल्लेखनीय है कि मालदा के पांच श्रमिकों को मलेशिया में प्रताड़ित किया जा रहा था.
सांसद मौसम नूर की पहल पर पांचों श्रमिकों को बचाकर मालदा लाया गया है. इनका कहना है कि काफी रुपये देने का लोभ देकर काम के लिए उन्हें मलेशिया ले जाया गया था. वहां पैसे तो नहीं दिये गये, उल्टे पांचों को रोककर अत्याचार किया गया. किसी तरह इस बात की जानकारी इन मजदूरों ने मालदा में अपने परिवार वालों को दी.

उसके बाद परिवार वालों ने सांसद मौसम नूर से मदद की गुहार लगायी. मौसम नूर का कहना है कि उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से संपर्क किया और उनके सहयोग से इन पांचों मजदूरों को मलेशिया से बचाकर ला पाना संभव हो सका है. शनिवार को मालदा के कोतवाली भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौसम नूर ने कहा कि मालदा से काफी श्रमिक कमाने के लिए विदेश जाते हैं. वहां उन पर कई प्रकार के अत्याचार किये जाते हैं. जिले से विदेश जाकर काम करने वाले मजदूरों का कोई आंकड़ा जिला प्रशासन के पास नहीं है. विदेश में यदि यह श्रमिक किसी परेशानी में फंस जाते हैं तो परिवार वाले भी इनसे संपर्क नहीं कर पाते. उन्होंने जिला प्रशासन से बाहर जाकर काम करने वाले श्रमिकों की रिकार्ड बनाने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह केन्द्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि विदेश में काम कर रहे श्रमिक ठीक से रहें और सकुशल अपने घर वापस लौटें. वह इस मुद्दे को संसद में भी उठायेंगी. मौसम नूर ने आगे कहा कि तीन महीने पहले रतुआ एवं पुकुरिया इलाके से पांच श्रमिक गुलाम मुर्तजा, मोहम्मद ओबैदुर रहमान, तारिक इस्लाम, मोहम्मद शरीफुल इस्लाम एवं तरीकुल इस्लाम काम के लिए मलेशिया गये थे.

इन लोगों को प्रति महीने 30 हजार रुपये तनख्वाह देने का लोभ दिया गया था. स्थानीय कुछ श्रमिक ठेकेदारों ने चेन्नई की एक कंपनी के साथ इन लोगों का संपर्क करवा दिया. मलेशिया में बिल्डिंग बनाने के काम में इन सभी को मजदूरी करनी थी. छह महीने का एग्रीमेंट कर सभी को मलेशिया भेज दिया गया. वहां पहुंचने के 15 दिन बाद ही श्रमिकों पर अत्याचार शुरू हो गया. पहले महीने से ही इन लोगों को रुपये नहीं दिये गये. किसी तरह से फोन कर इन मजदूरों ने मालदा में अपने परिवार वालों को इसकी जानकारी दी.

परिवार के सदस्य उनसे मिले और विदेश मंत्री के सहयोग से सभी को मलेशिया से निकाल कर मालदा लाने में सफलता मिली. इस मौके पर मलेशिया से लौटे श्रमिक गोलाम मुर्तजा, ओबैदुर रहमान आदि ने भी अपनी दुखभरी कहानी सुनाई. इन लोगों ने कहा कि आठ से नौ घंटे काम कराने की बात थी, लेकिन वहां दिन रात काम कराया जाता था. पैसे भी नहीं दिये जाते थे. इन मजदूरों ने विदेश भेजने वाले कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की.

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