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Budget Printing: नॉर्थ ब्लॉक की प्रेस में ही होगी बजट दस्तावेजों की छपाई, हलवा सेरेमनी से होगी शुरुआत

Budget Printing: वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की छपाई इस बार भी नॉर्थ ब्लॉक स्थित सरकारी प्रेस में ही होगी. कर्तव्य भवन में मंत्रालय शिफ्ट होने के बावजूद वहां प्रिंटिंग प्रेस न होने के कारण यह फैसला लिया गया है. बजट छपाई की शुरुआत पारंपरिक हलवा सेरेमनी से होगी. 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवां बजट पेश करेंगी. आइए, जानते हैं कि डिजिटल युग में भी बजट की छपाई क्यों और किसलिए होगी?

Budget Printing: वित्त मंत्रालय का मुख्यालय भले ही नवनिर्मित ‘कर्तव्य भवन’ में स्थानांतरित हो चुका हो, लेकिन आम बजट 2026-27 से जुड़े बेहद गोपनीय दस्तावेजों की छपाई इस बार भी पुराने मुख्यालय नॉर्थ ब्लॉक स्थित सरकारी प्रेस में ही की जाएगी. सूत्रों के अनुसार, कर्तव्य भवन में अभी तक अत्याधुनिक प्रिंटिंग प्रेस की व्यवस्था नहीं हो पाई है. इसी कारण बजट छपाई की जिम्मेदारी एक बार फिर नॉर्थ ब्लॉक को ही सौंपी गई है. सितंबर 2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक से निकलकर कर्तव्य भवन में शिफ्ट हो चुके हैं, लेकिन बजट से जुड़ी परंपराएं और सुरक्षा व्यवस्थाएं फिलहाल नॉर्थ ब्लॉक से ही निभाई जाएंगी.

क्यों नॉर्थ ब्लॉक की प्रेस पर ही कायम है भरोसा

बजट दस्तावेजों की छपाई केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का अत्यंत गोपनीय कार्य होता है. नॉर्थ ब्लॉक स्थित सरकारी प्रेस वर्षों से इस जिम्मेदारी को निभा रही है और यहां सुरक्षा, गोपनीयता तथा लॉजिस्टिक ढांचा पहले से स्थापित है. यही वजह है कि जब तक कर्तव्य भवन में पूरी तरह सुरक्षित प्रेस की स्थापना नहीं हो जाती, तब तक बजट छपाई का कार्य यहीं जारी रहेगा.

ब्रिटिश दौर से चली आ रही बजट छपाई की परंपरा

भारत में बजट छपाई का इतिहास भी बेहद रोचक रहा है. आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में बजट दस्तावेजों की छपाई राष्ट्रपति भवन में की जाती थी. वर्ष 1950 में इस कार्य को मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में स्थानांतरित किया गया. बाद में 1980 में यह जिम्मेदारी नॉर्थ ब्लॉक की प्रेस को सौंप दी गई, तब से लेकर आज तक अधिकतर बजट यहीं छपते रहे हैं.

बेहद गोपनीय होती है बजट दस्तावेजों की छपाई

बजट छपाई की प्रक्रिया जितनी तकनीकी है, उतनी ही सख्त और गोपनीय भी. जैसे ही छपाई शुरू होती है, प्रेस में तैनात अधिकारी और कर्मचारी लगभग दो सप्ताह तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं. उन्हें परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती. मोबाइल फोन समेत सभी संचार साधनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी समय से पहले सार्वजनिक न हो सके.

हलवा सेरेमनी के साथ लॉक-इन हो जाते हैं अधिकारी

बजट दस्तावेजों की छपाई शुरू होने से पहले पारंपरिक ‘हलवा सेरेमनी’ का आयोजन किया जाएगा. यह समारोह बजट प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसमें वित्त मंत्री सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हलवा परोसती हैं, जिसके बाद वे छपाई कार्य के लिए प्रेस में ‘लॉक-इन’ हो जाते हैं. सूत्रों के मुताबिक, यह समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने की संभावना है.

1 फरवरी को पेश होगा बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी. यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, जिससे वे देश के सबसे लंबे समय तक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्रियों में शामिल हो जाएंगी.

डिजिटल युग में भी कायम है छपाई की परंपरा

हालांकि, वर्ष 2021 में पहली बार बजट को पूरी तरह पेपरलेस बनाया गया था. उस साल वित्त मंत्री ने टैबलेट पर बजट पढ़ा और सांसदों को सभी दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध कराए गए. साथ ही ‘यूनियन बजट मोबाइल ऐप’ भी लॉन्च किया गया, जिसमें वार्षिक वित्तीय विवरण, अनुदान मांग, वित्त विधेयक समेत कुल 14 महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं. इसके बावजूद आधिकारिक रिकॉर्ड, सीमित वितरण और संवैधानिक औपचारिकताओं के लिए आज भी बजट दस्तावेजों की छपाई की जाती है.

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स्वतंत्र भारत का पहला बजट और आज का दौर

स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था. उस दौर में बजट की हजारों प्रतियां छपती थीं, जबकि आज डिजिटल तकनीक ने इसकी प्रकृति बदल दी है. फिर भी, नॉर्थ ब्लॉक की प्रेस और हलवा सेरेमनी जैसी परंपराएं भारतीय बजट प्रक्रिया की पहचान बनी हुई हैं.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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