रेलवे र्कचारियों ने खोला मोदी सरकार के खिलाफ मोरचा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jul 2016 1:12 AM

विज्ञापन

सिलीगुड़ी. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर भले ही केन्द्रीय कर्मचारियों के अच्छे दिन लाने का दावा किया हो, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि केन्द्रीय कर्मचारियों ने वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. तमाम केन्द्रीय कर्मचारियों ने इसको लेकर केन्द्र […]

विज्ञापन
सिलीगुड़ी. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर भले ही केन्द्रीय कर्मचारियों के अच्छे दिन लाने का दावा किया हो, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि केन्द्रीय कर्मचारियों ने वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.

तमाम केन्द्रीय कर्मचारियों ने इसको लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. खासकर रेलवे कर्मचारी इस वेतन वृद्धि से पूरी तरह से नाखुश हैं और अपने 11 सूत्रों मांगों के समर्थन में 11 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए अडिग हैं. नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे के महासचिव एम रघुवैया ने इस वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के इस निर्णय से केन्द्रीय कर्मचारी बेहद निराश हैं. केन्द्रीय कर्मचारी न्यूनतम वेतनमान 26 हजार रुपये प्रति महीने करने की मांग कर रहे थे, जबकि केन्द्र ने न्यूनतम वेतनमान प्रति महीने 18 हजार रुपये ही की है. केन्द्र सरकार के इस निर्णय की सभी रेलवे यूनियनों ने आलोचना की है. एनएफ रेलवे इंप्लाइज यूनियन के महासचिव मुनेन्द्र सैकिया ने भी 11 जुलाई से हड़ताल पर जाने की धमकी दी है.

उन्होंने कहा है कि पूरे देश के रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के कर्मचारी भी 11 जुलाई को सुबह 6 बजे से हड़ताल पर चले जायेंगे. इस बात की सूचना पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के जीएम को 9 जून को ही दे दी है. उन्होंने कहा कि केन्द्र की वर्तमान एनडीए सरकार ने अब तक सबसे न्यूनतम वेतन वृद्धि की है. कई कर्मचारियों को तो इसका कोई लाभ नहीं होगा. देश की आजादी के बाद पहली बार जब वेतन आयोग का गठन हुआ था, तो 1966 में आयोग ने 14.2 प्रतिशत वेतन वृद्धि की सिफारिश की थी. वर्ष 2016 में सातवें वेतन आयोग के अनुसार भी मात्र 14.2 प्रतिशत ही वेतन वृद्धि की गई है.

जाहिर तौर पर केन्द्र सरकार के सभी कर्मचारियों के साथ ही रेलवे कर्मचारी नाराज हैं. कुल 32 लाख कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं. इनमें से रेलवे कर्मचारियों की संख्या करीब 14 लाख है. एनएफ रेलवे इंप्लाइज यूनियन के केन्द्रीय संगठन सचिव परवीन्दर सिंह ढिल्लो ने अपनी मांगों के संबंध में कहा है कि कुल 25 सूत्री मांगें रखी गई हैं. जिनमें न्यू वेतन 26 हजार रुपये करने के साथ ही एफडीआइ, पीपीइ आदि को वापस लेने की मांग की गई है.

लोके पायलटों के साथ-साथ गार्डों तथा एकाउंट विभाग के कर्मचारियों को अधिकतम वेतनमान की श्रेणी में रखने की मांग की गई थी, लेकिन उस दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. संगठन के सिलीगुड़ी ब्रांच कमेटी के सचिव प्रदीप गजमेर तथ सेंटल वर्किंग कमेटी के सदस्य एवं कन्वेनर तनुज कुमार दे ने भी कहा है कि वह लोग सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से पूरी तरह नाखुश हैं. पूरे देश के रेलवे कर्मचारियों के साथ ही पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के कर्मचारी भी हड़ताल पर जायेंगे.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola