चाय कारोबारियों ने टी बोर्ड के खिलाफ खोला मोरचा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Jun 2016 1:29 AM

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सिलीगुड़ी: टी बोर्ड के नये नियम पैन इंडिया के खिलाफ सिलीगुड़ी के चाय कारोबारियों ने मोरचा खोल दिया है. टी बोर्ड से नये नियम में बदलाव की मांग को लेकर सिलीगुड़ी टी ट्रेडर्स एसोसिएशन (एसटीटीए) के 500 सदस्य बृहस्पतिवार को सिलीगुड़ी टी ऑक्शन सेंटर में आयोजित चाय की नीलामी में शामिल नहीं हुए. इन लोगों […]

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सिलीगुड़ी: टी बोर्ड के नये नियम पैन इंडिया के खिलाफ सिलीगुड़ी के चाय कारोबारियों ने मोरचा खोल दिया है. टी बोर्ड से नये नियम में बदलाव की मांग को लेकर सिलीगुड़ी टी ट्रेडर्स एसोसिएशन (एसटीटीए) के 500 सदस्य बृहस्पतिवार को सिलीगुड़ी टी ऑक्शन सेंटर में आयोजित चाय की नीलामी में शामिल नहीं हुए. इन लोगों ने नीलामी का बहिष्कार किया. संगठन की ओर से पहले ही इस बात की जानकारी टी ऑक्शन सेंटर को दे दी गयी थी.
उसके बाद भी सुबह टी ऑक्शन सेंटर की ओर से 26वें लॉट की नीलामी आयोजित की गयी. सुबह साढ़े आठ बजे से ही इस बात को लेकर टी ऑक्शन सेंटर में गहमागहमी बनी हुई थी. निर्धारित समय पर नीलामी आयोजित होने के बाद भी एसटीटीए के कोई भी सदस्य इसमें शामिल नहीं हुए. फलस्वरूप गुरुवार को 35 लाख किलो चाय अनबिकी रह गयी. चाय उद्योग के साथ ही सरकार को करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. बाद में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए एसटीटीए के महासचिव अंकित लोचन ने टी बोर्ड पर करारा हमला बोला. उन्होंने कहा कि टी बोर्ड द्वारा हाल ही में लागू पैन इंडिया नियम से चाय उद्योग की कमर टूट जायेगी. चाय कारोबारी अपना कारोबार नहीं बचा सकेंगे. टी बोर्ड के पैन इंडिया नियम के बारे में जानकारी देते हुए श्री लोचन ने आगे कहा कि टी ब्रोकरों द्वारा छोटे चाय उत्पादकों तथा रूग्ण चाय बागानों को फाइनेंस करने पर रोक लगा दी गयी है. पैसे नहीं मिलने की वजह से छोटे चाय उत्पादकों तथा चाय बागानों को इसका काफी नुकसान उठाना पड़ेगा. श्री लोचन ने कहा कि टी बोर्ड के नये नियम से छोटे चाय कारोबारी काफी प्रभावित होंगे. अभी चाय खरीदने की न्यूनतम मात्रा निर्धारित कर दी गयी है. पहले ऐसा नियम नहीं था. कोई भी चाय कारोबारी कितना भी चाय खरीद सकते थे. न्यूनतम और अधिकतम की कोई सीमा नहीं थी. इसके अलावा टी बोर्ड ने एक ही खरीददार द्वारा कई अन्य सदस्यों के लिए चाय खरीद पर रोक लगा दी है. पहले कोई एक सदस्य चाय की नीलामी में शामिल होता था और चार-पांच सदस्यों के लिए भी चाय की खरीददारी कर सकता था.
अब इस नियम में पूरी तरह से बदलाव कर दिया गया है. एक सदस्य सिर्फ अपने लिए ही चाय की नीलामी में हिस्सा ले सकता है. श्री लोचन ने आगे बताया कि चाय की खरीददारी के बाद 13 दिन के अंदर भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया है. ऐसा नहीं होने पर 14वें दिन स्वत: ही सदस्यों का लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि टी बोर्ड का यह नियम तुगलकी फरमान जैसा है. 25-25 साल से लोगों ने ऑक्शन सेंटर की सदस्यता ले रखी है.

एक ही दिन में सदस्यता खारिज करने की धमकी टी बोर्ड द्वारा दी गयी है. उन्होंने कहा कि आम तौर पर कोई भी चाय खरीददार नीलाम केंद्र को 13 दिन के अंदर भुगतान कर देते हैं. कभी-कभी बैंक बंद अथवा छुट्टी होने की वजह से भुगतान का चेक देने में देरी होती है. ऐसे में लाइसेंस रद्द कर देने संबंधी कार्रवाई सही नहीं है. श्री लोचन ने टी बोर्ड के और भी कई नये नियमों की जानकारी देते हुए आगे कि इस प्रकार के नियम लागू होने से चाय उद्योग ठप्प हो जायेगा. उन्होंने तत्काल ही इन नियमों में संशोधन करने की मांग की. ऐसा नहीं होने पर और भी बड़े आंदोलन करने की धमकी उन्होंने दी. संवाददाता सम्मेलन में एसटीटीए के अध्यक्ष राजकुमार डालमिया भी उपस्थित थे.

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