वाम मोरचा के सामने जिला परिषद बचाने की चुनौती

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Jun 2016 1:56 AM

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सिलीगुड़ी:विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर से राज्य में सत्तारूढ़ होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं. विरोधी दलों के कब्जे में रहे ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों तथा जिला परिषदों पर कब्जे की तैयारी चल रही है. इस मामले में पार्टी ने काफी हद तक सफलता भी हासिल की है. उत्तर दिनाजपुर […]

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सिलीगुड़ी:विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर से राज्य में सत्तारूढ़ होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं. विरोधी दलों के कब्जे में रहे ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों तथा जिला परिषदों पर कब्जे की तैयारी चल रही है. इस मामले में पार्टी ने काफी हद तक सफलता भी हासिल की है.

उत्तर दिनाजपुर जिले में कांग्रेस तथा वाम मोरचा के अधीन रहे कई ग्राम पंचायतों पर तृणमूल ने कब्जा कर लिया है. विरोधी दलों के सदस्यों को पार्टी में शामिल कर एक-पर-एक ग्राम पंचायतों पर तृणमूल कब्जा कर रही है. कुछ इसी तरह की कोशिश सिलीगुड़ी तथा जलपाईगुड़ी में भी हो रही है. विधानसभा चुनाव में पूरे राज्य में जहां तृणमूल की जय-जयकार थी, वहीं सिलीगुड़ी में पार्टी औंधे मुंह गिरी है. महकमा के तीनों सीटों पर तृणमूल की हार हुई. सिलीगुड़ी महकमा परिषद पर भी वाम मोरचा का कब्जा है.

इसके अलावा अधिकांश पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों पर भी वाम मोरचा अथवा कांग्रेस का कब्जा है. सिलीगुड़ी महकमा परिषद इलाके में तृणमूल की दाल नहीं गल रही है. जबकि दूसरी ओर जलपाईगुड़ी तथा डुवार्स के इलाके में विरोधी दलों के खेमे में पार्टी सेंध लगाने में सफल रही है. जलपाईगुड़ी जिले में कई ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समितियों पर तृणमूल ने कब्जा कर लिया है. इसको देखते हुए माकपा नेताओं की नींद उड़ी हुई है. अब माकपा तथा वाम मोरचा के पास जिला परिषद बचाने की चुनौती है.

जिला अध्यक्ष सौरभ चक्रवर्ती पहले ही जिला परिषद पर कब्जा करने की धमकी दे चुके हैं. यहां उल्लेखनीय है कि जलपाईगुड़ी जिले के अधीन सात पंचायत समिति है. इस पर से एक पर भी तृणमूल का कब्जा नहीं था. विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करने के बाद तृणमूल के नेताओं ने विरोधी दलों के सदस्यों को अपनी पार्टी में शामिल करना शुरू किया. अधिकांश पंचायत समिति माकपा के हाथ से निकल चुकी है. राजगंज, मयनागुड़ी, धूपगुड़ी तथा नागराकाटा पंचायत समिति पर तृणमूल का कब्जा हो चुका है. इसके अलावा माल तथा जलपाईगुड़ी सदर पंचायत समिति पर भी तृणमूल ने कब्जा करने की तैयारी शुरू कर दी है. माल पंचायत समिति में कुल सदस्यों की संख्या 30 है. माकपा तथा कांग्रेस छोड़कर कई सदस्य तृणमूल में शामिल हो गये हैं. अब यहां तृणमूल के सदस्यों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है. स्वाभाविक तौर पर तृणमूल कभी भी माल पंचायत समिति पर कब्जा कर सकती है.

कमोबेश यही स्थिति विभिन्न ग्राम पंचायतों की है. जिले में कुल 60 ग्राम पंचायत हैं उनमें से अधिकांश में पाला बदलवा कर तृणमूल ने कब्जा कर लिया है. जो कुछ ग्राम पंचायतें अभी भी वाम मोरचा या कांग्रेस के कब्जे में है, वहां तृणमूल सेंध लगाने की तैयारी में है. तृणमूल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी की निगाहें जलपाईगुड़ी जिला परिषद पर टिकी हुई हैं. सूत्रों ने बताया कि जलपाईगुड़ी जिला परिषद में विरोधी दल के कई सदस्य तृणमूल के संपर्क में हैं.

कई सदस्यों को तृणमूल में शामिल किये जाने की तैयारी चल रही है. तृणमूल की इस रणनीति से माकपा नेता परेशान हैं. एक-पर-एक ढहते गढ़ ने माकपा नेताओं की नींद उड़ा दी है. माकपा सहित वाम मोरचा तथा कांग्रेस के नेता किसी भी प्रकार से जलपाईगुड़ी जिला परिषद को बचाना चाहते हैं. जिला परिषद की अध्यक्ष नूरजहां बेगम ने तृणमूल की इस रणनीति की आलोचना की है.

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में जो पार्टी जीत हासिल नहीं कर सकी वह अब दूसरी पार्टी के सदस्यों को तोड़कर सत्ता में आना चाहती है. मतदाता इसे सही तरीके से नहीं लेंगे. माकपा के जिला सचिव सलील आचार्य ने भी इस मामले को लेकर तृणमूल को चुनौती दी है. उन्होंने कहा है कि तृणमूल किसी भी कीमत पर जिला परिषद पर कब्जा नहीं कर पायेगी.

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