एवरेस्ट अभियान पर सिलीगुड़ी के लोगों ने उठाये सवाल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Jun 2016 1:32 AM
सिलीगुड़ी: विश्व की सर्वोच्च पर्वत शिखर एवरेस्ट फतह कर ख्याति अर्जित करने की तमन्ना रखने वाले पर्वतारोहियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. पिछले कुछ दिनों के दौरान जिस तरह से एवरेस्ट अभियान के दौरान कइ पर्वतारोहियों की मौत हुयी है उससे ना केवल राज्य सरकार अपितु पर्यावरण प्रमियों को भी झकझोर दिया है.आरोप है […]
अब यह समस्या परवान चढ़ने को है. 20 वर्ष पहले पांच सदस्यों की एक टीम को एवरेस्ट फतह करने के लिये करीब 1 करोड़ का खर्च पड़ता था. जबकि वर्तमान में मात्र 15 से 16 लाख में कोई भी एवरेस्ट पर चढ़ सकता है. पर्वत शिखरों पर चढ़ाई करना कई लोगों का शौक है, जबकि कुछ लोग इसे ख्याति अर्जित करने का एक माध्यम मानने लगे हैं. पर्वतारोहियों के बदलते नजरिये ने पर्वतारोहण का व्यवसायीकरण कर दिया है. इस व्यवसायीकरण ने कुछ एंजेसियो को जन्म दिया है. इस तरह की एजेंसिया मात्र 15 से 20 लाख रूपये में लोगों को एवरेस्ट जैसे पर्वत शिखर पर खड़ा कर देती है. एवरेस्ट फतह के दौरान कई पर्वातारोहियों की मौत भी हो जाती है. इससे एजेंसियो का कुछ फर्क नहीं पड़ता. पर्वातारोहियों की समय सीमा, प्रशिक्षण आदि इन एजेंसियों के लिये कोई मायने नहीं रखता है. रूपये के बदले ये किसी को भी एवरेस्ट पर चढ़ाने को तैयार हैं.
पर्वतारोहियों को रूपया मुहैया कराने से पहले सरकार को उनकी उम्र, प्रशिक्षण, क्षमता आदि पर ध्यान देना चाहिए. जबकि ऐसा कुछ किये बिना ही राज्य की तृणमूल सरकार रूपया मुहैया करा रही है. कइ लोगों ने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली यह सहायता एवरेस्ट पर भीड़ बढ़ाने वालों की संख्या बढ़ा रही है. भीड़ बढ़ने से इस प्रकृतिक स्तंभ पर विनाश का खतरा मंडराने लगा है. एवरेस्ट फतह करने निकले कई लोगों का शव रास्ते में पड़ा मिलता है. भीड़ बढ़ने से स्वाभाविक रूप से एवरेस्ट के निकट कचरे का अंबार लग रहा है. फलस्वरूप पर्यावरण भी प्रदूषित हो र है. समाज सेवियों व पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि अब सरकार को इसकी समीक्षा करानी चाहिए.विश्व का सर्वोच्च शिखर हिमालय का एवरेस्ट भारत के पड़ोसी देश नेपाल में स्थित है. एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिये नेपाल सरकार 6 लाख रूपये रॉयल्टी वसूलती है. दिन प्रतिदिन पर्वतारोहियों की भीड़ बढ़ने से प्रदूषण फैल रहा है. लेकिन रोयल्टी के चक्कर में नेपाल सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है. हिमालया नेचर एंड एडवेंचर फांउडेशन (नैफ)के अध्यक्ष अनिमेश बसु ने कहा कि रॉयल्टी के एवज में विश्व के इस धरोहर को नहीं खोया जा सकता. यह बात सच है कि पर्यटन नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन समस्या का समाधान भी जरूरी है. विश्व स्तर पर विचार विमर्श कर समस्या का समाधान आवश्यक है. नेपाल सरकार रॉयल्टी बढ़ाकर पर्वातारोहियों की संख्या सीमित कर सकती है.
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