राजगंज और फूलबाड़ी में नहीं गली भाजपा की दाल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 May 2016 7:38 AM

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सिलीगुड़ी. विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी के साथ-साथ यहां की लोगों की निगाहें पड़ोसी डाबग्राम-फूलबाड़ी तथा राजगंज विधानसभा सीट पर भी टिकी हुई थी. इसकी वजह यह है कि डाबग्राम-फूलबाड़ी विधानसभा केन्द्र में सिलीगुड़ी नगर निगम के 14 वार्ड हैं. कहने का मतलब यह है कि इन 14 वार्डों के मतदाता रहते तो सिलीगुड़ी में हैं, […]

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सिलीगुड़ी. विधानसभा चुनाव में सिलीगुड़ी के साथ-साथ यहां की लोगों की निगाहें पड़ोसी डाबग्राम-फूलबाड़ी तथा राजगंज विधानसभा सीट पर भी टिकी हुई थी. इसकी वजह यह है कि डाबग्राम-फूलबाड़ी विधानसभा केन्द्र में सिलीगुड़ी नगर निगम के 14 वार्ड हैं. कहने का मतलब यह है कि इन 14 वार्डों के मतदाता रहते तो सिलीगुड़ी में हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में मतदान डाबग्राम-फूलबाड़ी केन्द्र के लिए करते हैं.

राजगंज की भी यही स्थिति है. राजगंज क्षेत्र से हालांकि सिलीगुड़ी का कोई सीधा संपर्क नहीं है, लेकिन इस इलाके में रहने वाले लोगों का सिलीगुड़ी के साथ आर्थिक संबंध जरूर है. ऐसी कई फैक्ट्रियां राजगंज विधानसभा क्षेत्र में पड़ती है जिनके मालिक सिलीगुड़ी में रहते हैं. इसी तरह से राजगंज इलाके से काफी लोग रोजगार के लिए हर दिन ही सिलीगुड़ी आते हैं. स्वाभाविक तौर पर इन दोनों विधानसभा सीटों को लेकर सिलीगुड़ी के लोगों में उत्सुकता बनी रहती है. इस बार के चुनाव में इन दोनों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की जीत हुई है.

जबकि गठबंधन उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे हैं. ऐसे तो चुनाव परिणाम घोषित हो गया है, लेकिन विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवारों को मिले मत को लेकर राजनीतिक विश्लेषक गुणा-भाग कर रहे हैं. खासकर भाजपा उम्मीदवारों को मिले मत प्रतिशत को लेकर काफी चरचा चल रही है. ऐसे दार्जिलिंग जिले के तीन विधानसभा सीटों सिलीगुड़ी, फांसीदेवा तथा माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी में भाजपा उम्मीदवारों की जीत तो नहीं हुई, लेकिन इन लोगों ने काफी अच्छा-खासा मत हासिल किया. दूसरी तरफ डाबग्राम-फूलबाड़ी तथा राजगंज सीट की बात करें तो यहां भाजपा उम्मीदवार वर्ष 2011 के मुकाबले मत प्रतिशत वृद्धि करने में तो सफल रहे, लेकिन यह दार्जिलिंग जिले के तीन सीटों के मुकाबले कम है. इस बार के चुनाव में सबकी निगाहें डाबग्राम-फूलबाड़ी सीट पर टिकी हुई थी, क्योंकि यहां से मंत्री गौतम देव चुनाव लड़ रहे थे. उन्होंने कांग्रेस समर्थित माकपा उम्मीदवार दिलीप सिंह को करीब 22 हजार मतों से पराजित किया है. गौतम देव एक लाख पांच हजार 769 तथा दिलीप सिंह 81 हजार 958 मत पाने में सफल रहे. भाजपा के रथीन्द्र बोस 26 हजार 195 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे. स्वाभाविक रूप से वह तृणमूल के गौतम देव के मुकाबले एक चौथाई मत ही हासिल कर सके हैं.

यह अलग बात है कि 2011 के चुनाव के मुकाबले भाजपा ने इस बार के चुनाव में अधिक मत हासिल किया है. 2011 में भाजपा के दुलाल कांति दास मात्र दस हजार 623 वोट ही हासिल कर सके थे. तब भी तृणमूल कांग्रेस के गौतम देव चुनाव जीते थे और माकपा के दिलीप सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे.


राजगंज विधानसभा सीट की यदि बात करें तो यहां से तृणमूल कांग्रेस के खगेश्वर राय चुनाव जीते हैं. उन्होंने माकपा के सत्येन्द्र नाथ मंडल को करीब साढ़े नौ हजार मतों से पराजित किया है. खगेश्वर राय 89 हजार 785 मत तथा सत्येन्द्रनाथ मंडल 75 हजार 108 मत पाने में सफल रहे. भाजपा के प्रकाश चन्द्र राय 17811 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे हैं. स्वाभाविक रूप से कहा जाये तो भाजपा उम्मीदवार को यहां तृणमूल के मुकाबले करीब पांच गुना कम मत हासिल हुआ है.
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