खासकर बच्चे और वृद्ध हमेशा बीमार रहते हैं. एक ग्रामीण अफसर अली का कहना है कि प्रधान व प्रशासन द्वारा कोई उचित कदम न उठाने से अब हमें गांव में जानलेवा बीमारी फैलने का डर सता रहा है. उनका कहना है कि अगर महामारी फैलती है तो केवल सात प्रधान पाड़ा ही नहीं, बल्कि इससे सटे न जाने कितने ही गांव तबाह हो जायेंगे कोई अनुमान नहीं लगा सकता. महामारी फैलने की आशंका से ग्रामीण काफी आतंकित हैं.
एक ग्रामीण महिला रहिमा बेगम का कहना है कि अब तो गांव के कुत्ते भी मृत गायों का मांस खाकर वहशी हो गये हैं. दो दर्जन से भी अधिक वहशी कुत्तों का जमघट हमेशा गायों के लाशों के ढेर के आस-पास ही लगा रहता है. इन कुत्तों ने तो अब अपना अड्डा ही इस ढेर के पास रास्ते किनारे एक छोटी पोखरी व बास झाड़ की झुरमुट में बना रखा है. रहिमा का कहना है कि ये वहशी कुत्ते राह चलते लोगों पर जानलेवा हमला करने से भी बाज नहीं आते. अब-तक न जाने कितने ही ग्रामीणों को इन कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है. कुत्तों के अड्डे वाली सड़क पर चलने से भी ग्रामीण कतराने लगे हैं.
गुस्साएं ग्रामीणों का कहना है कि अय्यर पेशे से गौ चमड़ों का कारोबारी है और तणमूल का दबंग नेता. वह मृत गायों के शरीर से चमड़े उखाड़ कर लाशों को यूं ही खुले में फेंक देते हैं. एक दिन उसने 19 गायों की लाशें एक साथ फेंक दी. कल रात को भी उसने अपने आदमियों को लाशें फेंकने के लिए भेजा था, तो ग्रामीणों ने उन्हें खदेड़ दिया और फेंकने नहीं दिया. घोर रात को उसने गायों को उसी जगह वापस फिकवा दिया. वह अपने रसूख के बल पर इस तरह गैर-जिम्मेदारी वाली हरकत महीनों से कर रहे हैं. इस ओर उचित कदम न उठाने को लेकर ग्रामीण पंचायत प्रधान व प्रशासन के प्रति आक्रोशित दिखे. ग्रामीणों ने जल्द ही प्रधान के दफ्तर का घेराव किये जाने की चेतावनी दी है. इस बाबत चमड़ा कारोबारी अय्यर हजि साहब से संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन घर में मौजूद न होने की वजह से संपर्क नहीं हो सका.

