दौड़ में शिखर छूने को बेताब शिखा मंडल

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मालदा. 14 साल की खिलाड़ी शिखा मंडल में कोई पीटी ऊषा देख रहा है, तो कोई मिल्खा सिंह. राज्य खेल प्रतियोगिता में अंडर-15 श्रेणी में इस बालिका ने दूसरा स्थान हासिल किया. साथ ही उसने मालदा जिले के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं. एक बार फिर उसे बुलावा मिला है पूर्वांचल ओपन एथलेटिक्स […]

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मालदा. 14 साल की खिलाड़ी शिखा मंडल में कोई पीटी ऊषा देख रहा है, तो कोई मिल्खा सिंह. राज्य खेल प्रतियोगिता में अंडर-15 श्रेणी में इस बालिका ने दूसरा स्थान हासिल किया. साथ ही उसने मालदा जिले के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं. एक बार फिर उसे बुलावा मिला है पूर्वांचल ओपन एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए. यह राष्ट्रीय स्तर का क्षेत्रीय आयोजन है.

शिखा मंडल का परिवार भले ही अत्यंत गरीब हो, लेकिन इस बालिका के हौसले कमजोर नहीं है. वह देश की नामी एथलीट बनना चाहती है. उसके पैर में जूते रहें या न रहें, उसे कोई बाधा रोक नहीं पाती. उसने जिले के सभी खिलाड़यों का रिकॉर्ड तोड़कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया है. अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बुलावा मिलने से नघरिया गांव की यह नन्ही लड़की ग्रामवासियों और जिले के खेलप्रेमियों की आंख का तारा बन गयी है.

अमृती ग्राम पंचायत का नघरिया गांव मालदा शहर से महज 12 किलोमीटर दूर है. इसी गांव के एक छोटे से कच्चे घर में अपने परिवार के साथ शिख मंडल रहती है. उसके पिता ठाकुर दास मंडल पेशे से वैन चालक थे. लेकिन कुछ साल पहले दिल की बीमारी से उनकी मौत हो गयी. परिवार में अभी मां कांचना मंडल और दो छोटे भाई-बहन हैं. नघरिया हाईस्कूल में आठवीं की छात्रा शिखा मंडल समय मिलने पर कभी मां के साथ दूसरों के घरों में काम करती है तो कभी ठोंगा बनाकर परिवार की जिम्मेदारी संभालने में मदद करती है. इन सबके बीच उसके दिल में एक बड़ा एथलीट बनने का सपना इस कदर फल-फूल रहा है कि उसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. पड़ने-लिखने और घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही समय मिलने पर नन्ही शिखा मीलों-मील दौड़ लगाती है. उसकी ललक देखकर आगे आये नघरिया हाईस्कूल के शिक्षक पुलक झा.

शिखा मंडल की मां कांचना मंडल ने बताया कि मेरी बेटी मेरी आंखों का तारा है. वह खेलकूद के प्रति इतनी उत्साही है कि पड़ोसियों से उसके दौड़ने की कहानियां सुनकर गर्व महसूस करती हूं. एक दिन वह जरूर मेरा नाम रोशन करेगी. नन्ही शिखा कहती है कि जब मैं दौड़ना शुरू करती हूं तो सोचती हूं कि मैं अव्वल हूं और बाकी सब मेरे पीछे रहें. जिला और राज्य स्तर पर मुझे अवसर मिल चुका है. अब मुझे राष्ट्रीय स्तर पर जाना है. भविष्य में मैं पीटी ऊषा बनना चाहती हूं और बंगाल को सर्वोच्च शिखर पर ले जाना चाहती हूं.

शिक्षक पुलक झा कहते हैं कि मैंने छात्र-छात्राओं के खेलकूद के बीच बहुत साल बिताये हैं. लेकिन शिखा मंडल को देख मैं हैरत में पड़ जाता हूं. बिना जूतों के ही वह मीलों-मील इतनी चपलता से दौड़ लगाती है कि देखनेवाले की आंखें खुली की खुली रह जाती हैं. उसकी दौड़ के सामने जिले के बड़े-बड़े खिलाड़ियों ने हार मानी है. जून 2015 से फरवरी 2016 तक उसने जिला और राज्य स्तर की कई प्रतियोगिताओं में 1500 मीटर दौड़, 800 मीटर दौड़ और लंबी कूद में प्रथम स्थान हासिल किया. आगामी जून महीने में उसे साल्ट लेक स्टेडियम, कोलकाता में होनेवाली ओपेन एथेलेटिक्स मीट में बुलाया गया है. अगर उसमें वह अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसे राष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलेगा.

पुलक झा कहते हैं कि तमाम अभावों के बावजूद शिखा की प्रैक्टिस में कमी नहीं है. समय की कमी की वजह से वह रात के अंधेरे में भी मीलों लंबी दौड़ लगाती है. पीटी ‍ऊषा और मिल्खा सिंह की जीवनी बहुत से लोगों ने पढ़ी है. टीवी पर भी इन्हें देखा है. लेकिन हमारी शिखा भी कुछ कम नहीं है. हमें उम्मीद है कि वह आगे चलकर देश का गौरव बनेगी.

मालदा जिला खेल संघ के सचिव शुभेंदु चौधरी कहते हैं कि हमने शिखा की चर्चा सुनी है. हमने उसकी हर तरह की मदद की बात कही है. जैसे भी हो, हम मालदा की इस प्रतिभा को खोने नहीं देंगे. उसे सरकार विभाग से भी हर तरह की सहायता दिलाने का प्रयास किया जायेगा.

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