सरगरमी: गोरामुमो ने छोड़ा चुनावी मैदान, केंद्रीय कमेटी की बैठक में हुआ फैसला, दो सीटों पर तृंका का समर्थन
सिलीगुड़ी/दार्जिलिंग: सुभाष घीसिंग की नेतृत्व वाली जिस गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोरचा (गोरामुमो) की कभी पहाड़ पर तूती बोलती थी, आज उसी पार्टी ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के तीनों विधानसभा सीटों पर चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है. 90 के दशक में गोरामुमो के गठन के बाद से पहली बार ऐसा हो रहा है, जब […]
2011 से पहले 1996, 2001 तथा 2006 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी को दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के तीनों सीटों दार्जिलिंग, कालिम्पोंग तथा कर्सियांग में जीत हासिल हुई थी. बाद में बिमल गुरूंग के नेतृत्व में गोजमुमो के गठन के बाद गोरामुमो की स्थिति कमजोर हो गई. 2011 के विधानसभा चुनाव में तीनों सीटों पर गोजमुमो ने कब्जा कर लिया.
इस बैठक में तीनों ब्रांच कमेटी के अध्यक्ष भी उपस्थित थे. करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद दार्जिलिंग से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार शारदा सुब्बा राई तथा कर्सियांग से तृणमूल उम्मीदवार शांता छेत्री के समर्थन का निर्णय लिया गया. इसके साथ ही कालिम्पोंग विधानसभा सीट से हर्क बहादुर छेत्री के भी समर्थन का ऐलान किया गया. बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए मन घीसिंग ने कहा कि यह निर्णय गोरखा जाति के सुरक्षा तथा सांस्कृतिक परंपरा आदि को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. उन्होंने अपने समर्थकों से इन्हीं उम्मीदवारों को वोट डालने की अपील भी की. श्री घीसिंग ने कहा कि पहाड़ पर एक पार्टी का आतंक कायम है. यहां पर लोकतंत्र नहीं है. गोजमुमो का नाम लिये बगैर उन्होंने कहा कि एक पार्टी विरोधियों की आवाज को कुचल रही है. इन्हीं तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए तृणमूल तथा हर्क बहादुर के समर्थन का निर्णय लिया गया है.
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