जासूसी उपन्यास के सहारे पुलिस ने सुलझायी हत्या की गुत्थी

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सिलीगुड़ी: महीन भर से लापता व्यवसायी कृष्णा साहा और उसकी हत्या की गुत्थी को सुलझाने में पुलिस को जासूसी उपन्यासों व फिल्मों की कहानी का सहारा लेना पड़ा. भक्तिनगर थाना के एनजेपी चौकी की पुलिस के हत्थे चढ़े मृतक के दो दोस्तों द्वारा जुर्म कबूल करने के बाद हत्या के रहस्य का हैरत अंगेज खुलासा […]

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सिलीगुड़ी: महीन भर से लापता व्यवसायी कृष्णा साहा और उसकी हत्या की गुत्थी को सुलझाने में पुलिस को जासूसी उपन्यासों व फिल्मों की कहानी का सहारा लेना पड़ा. भक्तिनगर थाना के एनजेपी चौकी की पुलिस के हत्थे चढ़े मृतक के दो दोस्तों द्वारा जुर्म कबूल करने के बाद हत्या के रहस्य का हैरत अंगेज खुलासा हुआ. आरोपी हत्यारों द्वारा बताये गये ठिकाने से बुधवार की सुबह लाश मिलने के बाद कृष्णा के परिजनों का विश्वास रेत की तरह बिखर गया.
मृतक के परिवार को जब यह पता चला कि उसके दोस्तों ने ही ‘दोस्ती’ का गला घोंटकर दफना दिया और महीने भर से गुमराह करते रहे, तो परिजनो के पैरों तले जमीन खिसक गयी. आरोपियों द्वारा पुलिस को दिये गये बयान के अनुसार, शहर के 31 नंबर वार्ड के शीतलापाड़ा निवासी कृष्णा साहा (41) को महीने भर पहले सरस्वती पूजा के दिन यानी 13 फरवरी को मौत की नींद सुलाया गया. वारदात को अंजाम और कोई नहीं बल्कि कृष्णा के सबसे गहरे दो दोस्त बजरंग अग्रवाल और संजय अग्रवाल ने दिया. बजरंग सिलीगुड़ी थाना क्षेत्र के आलू चौधरी मोड़ के निकट मिलनपल्ली का निवासी है. वहीं, संजय डुवार्स के वीरपाड़ा का रहनेवाला है. दोनों में शातिर बजरंग है. बजरंग पहले हिलकार्ट रोड स्थित माकपा के जिला पार्टी मुख्यालय अनिल विश्वास भवन के इर्द-गिर्द मोमो-चाउमिन की फास्टफुड की गुमठी लगाता था. जब से वह विधान मार्केट के व्यवसायी कृष्णा साहा के संपर्क में आया गुमठी का झांप गिराकर जमीन-दुकान की खरीद-बिक्री करानेवाले एक दलाल के रूप में काम करने लगा. इस बीच इन दोनों के बीच संजय भी आ टपका.
मिली जानकारी के अनुसार, बजरंग और संजय की नजर कृष्णा की विशाल संपत्ति पर थी. दोनों ने मिलकर पहले कृष्णा को पियक्कड़ बनाया और बाद में उसकी लाखों-करोड़ों कीमत की संपत्ति कौड़ी के भाव बेचने लगे. बात वहां आकर बिगड़ी जब कृष्णा की एक मात्र बची संपत्ति के रूप में हांगकांग मार्केट की एक दुकान हैदरपाड़ा निवासी कनाई साहा को बेचने के लिए मात्र 23 लाख में सौदा करवाया. पहले इस सौदे पर कृष्णा ने मंजूरी दे दी और बयाने के तौर पर उसने कनाई से 12 लाख रूपये भी ले लिये. लेकिन जब कृष्णा को अपनी दुकान की सही कीमत 70 लाख रूपये होने की जानकारी मिली, तब वह इतने कम सौदे पर दुकान कनाई के नाम करने से इंकार करने लगा. इस सौदे को लेकर बात बिगड़ने लगी. दलाल बजरंग के लिए यह सौदा कराना काफी महंगा पड़ने लगा.
एक तरफ कनाई हर हाल में दुकान दिलवाने या फिर पूरे 12 लाख रूपये वापस करवाने के लिए बजरंग पर दबाव देने लेगा. दूसरी तरफ कृष्णा किसी भी कीमत पर इतने कम सौदे में दुकान बिक्री न करने की जिद पर अड़ गया. कनाई से बार-बार मिलनेवाली धमकी और झंझटों से हमेशा के लिए निजात पाने के लिए बजरंग ने संजय के साथ मिलकर एक प्लान बनाया. इसके तहत दोनों ने सरस्वती पूजा के दिन कहीं घूमने जाने और शराब पीने का प्लान बनाया. अपराह्न करीब चार बजे कृष्णा को फोन कर उसे घर से बुलाया और तीनों एक ही वाहन में सवार होकर शहर से करीब 15-17 किमी दूर राजगंज प्रखंड के भूटकी बाजार गये. बाजार के ही निकट चारदिवारी से घिरी एक खाली जमीन पर बैठकर तीनों ने पहले पार्टी का मजा लिया.
बाद में प्लान के मुताबिक बजरंग व संजय ने मिलकर कृष्णा को जरूरत से ज्यादा शराब पिला दी और दुकान का मालिकाना हक कनाई के नाम करने के लिए दबाव देने लेगे. कृष्णा के न मानने पर दोनों ने मोबाइल चार्जर की तार से उसका पहले गला घोंटा और उसकी जीवन लीला समाप्त कर दी. फिर वहीं जमीन में उसे दफना दिया. पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी दोनों दोस्त कुछ दिन पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़े थे, लेकिन दोनों पहले पुलिस को गुमराह कर रहे थे. बाद में पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए जासूसी कहानियों का सहारा लिया और दोनों को छोड़ दिया. दोनों पर पुलिस गहन नजर रखने लगी और दोनों के मोबाइल फोन को इंटरसेप्ट करने लगी. इसके बाद महीने भर की गुत्थी मात्र दो-तीन दिनों में ही सुलझ गयी.
परिजनों ने पुलिस चौकी में किया बवाल
आज सुबह करीब आठ बजे कृष्णा की लाश मिलने के बाद परिजनों ने एनजेपी पुलिस चौकी में जमकर बवाल काटा. एकतरफ कृष्णा की मां मंजू का रो-रोकर बुरा हाल था वहीं, एक रिश्तेदार दीपक साहा का कहना है कि हमें इंसाफ चाहिए. अगर आरोपी दोनों हत्यारों को जमानत मिलती है तो हम किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और केवल एनजेपी चौकी ही नहीं जरूरत पड़ने पर पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में भी धरना-प्रदर्शन करेंगे. श्री साहा ने कहा कि जबसे कृष्णा की दोस्ती बजरंग और संजय से हुई तभी से उनका परिवार बिखर गया और उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति दोस्ती की भेंट चढ़ा दी. इन दोनों की दोस्ती के बाद से ही कृष्णा पियक्कड़ बन गया जो उनकी पत्नी लक्ष्मी को बर्दाश्त नहीं था. बार-बार समझाने के बावजूद न मानने पर लक्ष्मी अपने दोनों बच्चों एक लड़का राजा (17) और लड़की सोना (13) को साथ लेकर अलग रहने लगी. श्री साहा ने कहा कि कनाई को किसी भी कीमत पर दुकान नहीं सौंपेंगे, भले ही 12 लाख रूपये लौटाना पड़े.
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
दोनों आरोपियों को मोबाइल ट्रैक के आधार पर मंगलवार को गिरफ्तार किया और जलपाईगुड़ी जिला अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड में लिया गया. पुलिसिया पूछताछ के दौरान आखिरकार दोनों ने जुर्म कबूल कर लिया और कृष्णा को मारकर दफनाये जगह से आज सुबह बरामद कर लिया गया. लाश का पंचनामा कर आज ही उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया.
पिनाकी मजूमदार, एसीपी, इस्ट
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