सिलीगुड़ी: आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर हर दिन ही नया राजनीतिक समीकरण बनने और बिगड़ने का दौर जारी है. राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती देने के लिए भाजपा को छोड़कर तमाम राजनीतिक दल एक हो रहे हैं. खासकर उत्तर बंगाल में तृणमूल विरोधी राजनीतिक दलों की गोलबंदी देखी जा रही है. तृणमूल कांग्रेस के बाद अब वाम मोरचा ने भी अपने 116 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है.
वाम मोरचा ने कांग्रेस तथा अन्य दलों के प्रभुत्व वाले इलाके को छेड़ा तक नहीं है. स्वाभाविक रूप से तृणमूल विरोधी गैर-भाजपा राजनीतिक दल एक होकर चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की तीनों विधानसभा सीटों पर भी कुछ इसी प्रकार का समीकरण बनता दिख रहा है. तृणमूल कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बाद भी दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बिमल गुरूंग के नेतृत्व वाली गोजमुमो की शक्ति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. वाम मोरचा भी चाहती है कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र तीनों विधानसभा सीटों दार्जिलिंग, कालिम्पोंग तथा कर्सियांग में तृणमूल कांग्रेस को भारी पटकनी मिले. यही वजह है कि वाम मोरचा ने इन तीनों सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारने का ऐलान किया है. इस मामले में माकपा के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व सांसद समन पाठक का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा विरोधी सभी राजनीतिक दल उनके मित्र हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने पहाड़ पर अपने उम्मीदवारों को नहीं उतारेगी. वाम मोरचा ने गोजमुमो उम्मीदवारों के समर्थन का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर मोरचा के शीर्ष नेतृत्व के साथ पार्टी नेताओं की बातचीत चल रही है. गोजमुमो द्वारा डुवार्स में उम्मीदवार उतारने संबंधी प्रश्न के जवाब में श्री पाठक ने कहा कि इन तमाम मुद्दों पर गोजमुमो नेताओं से बातचीत जारी है.
उन्हें उम्मीद है कि गोजमुमो डुवार्स में वाम मोरचा उम्मीदवारों का समर्थन करेगी. इस बीच, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस भी दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में उम्मीदवार नहीं उतारेगी. हालांकि हिल्स कांग्रेस ने तीनों सीटों पर पहले उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी. दार्जिलिंग सीट से लॉरेंस पीटी लामा अथवा नकुल चन्द्र छेत्री, कर्सियांग विधानसभा सीट से छवि चन्द्र राई, एमआर प्रधान तथा स्वराज खाती एवं कालिम्पोंग विधानसभा सीट से दिलीप प्रधान, शांति कुमार शर्मा अथवा सुनील छेत्री को उम्मीदवार बनाने की चर्चा यहां जोर-शोर से चल रही थी. माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने दार्जिलिंग में अपने नेताओं की उम्मीदवारी को लेकर मारा-मारी नहीं करने की हिदायत दी है. जो राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं उसके अनुसार दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोजमुमो उम्मीदवारों का मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों के साथ ही होने की संभावना है. उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस ने तीनों विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. शारदा सुब्बा राई तथा कर्सियांग से शांता छेत्री को टिकट दिया गया है, जबकि कालिम्पोंग से तृणमूल के टिकट पर जाप नेता हर्क बहादुर छेत्री चुनाव लड़ रहे हैं.
सिलीगुड़ी विधानसभा सीट के लिए स्थिति साफ
वाम मोरचा द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही सिलीगुड़ी विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबले की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है. वाम मोरचा ने छठी बार इस सीट से अशोक भट्टाचार्य को टिकट दिया है. यहां से वह चार बार चुनाव जीत चुके हैं, जबकि वर्ष 2011 के चुनाव में तृणमूल उम्मीदवार रूद्रनाथ भट्टाचार्य से हार गये थे. इस बार के चुनाव उनके सामने रूद्रनाथ भट्टाचार्य नहीं हैं. तृणमूल ने प्रख्यात फुटबॉलर वाइचुंग भुटिया को अपना उम्मीदवार बनाया है. स्वभाविक रूप से मुख्य मुकाबला अशोक भट्टाचार्य और वाइचुंग भुटिया के बीच होने की संभावना है. अशोक भट्टाचार्य के चुनाव में उतरने के बाद यह तय है कि यहां से कांग्रेस अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी. अब सबकी निगाहें भाजपा पर टिकी हुई है. आने वाले दिनों में भाजपा भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी. उसके बाद इस सीट पर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाने की संभावना है.
गौतम देव बनाम दिलीप सिंह : सिलीगुड़ी के निकट डाबग्राम-फूलबाड़ी विधानसभा सीट पर तृणमूल के बाद अब वाम मोरचा ने भी अपने उम्मीदवार को मैदान में उतार दिया है. इस सीट से वाम मोरचा उम्मीदवार के रूप में दिलीप सिंह तृणमूल उम्मीदवार तथा मंत्री गौतम देव से लोहा लेंगे. यहां उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 के चुनाव में इस सीट पर गौतम देव ने दिलीप सिंह को हरा दिया था.