महंगाई: राज्य में प्याज के लिए हाहाकार

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मालदा. बंगाल के खुदरा बाजार में 80 रुपये किलो के भाव प्याज बिक्री हो रही है जबकि भारत द्वारा निर्यात किये गये प्याज बांग्लादेश के बाजार में 50 रुपये में बेचा जा रहा है, यानी भारतीय रुपये में 33 रुपये किलो. इसके लिए निर्यातक भारत की विदेश वाणिज्य नीति को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं. उल्लेखनीय […]

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मालदा. बंगाल के खुदरा बाजार में 80 रुपये किलो के भाव प्याज बिक्री हो रही है जबकि भारत द्वारा निर्यात किये गये प्याज बांग्लादेश के बाजार में 50 रुपये में बेचा जा रहा है, यानी भारतीय रुपये में 33 रुपये किलो. इसके लिए निर्यातक भारत की विदेश वाणिज्य नीति को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं. उल्लेखनीय है कि प्याज के बढ़ते मूल्य से आम लोगों के खाने का स्वाद फीका पड़ गया है. ऐसे में ब्यवयाय से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि प्याज के दाम और बढ़ने की आशंका है.

माूलम हो कि मालदा के इंग्लिशबाजार थाना क्षेत्र के महदीपुर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य सीमा से हर रोज औसतन 30 से 40 ट्रक प्याज बांग्लादेश में निर्यात किया जाता है. महदीपुर एक्सपोटर्स एसोसिएशन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस सीमा से देश के विभिन्न प्रांतों से प्याज बांग्लादेश में निर्यात किया जा रहा है. महाराष्ट्र, बिहार, आंध्रप्रदेश व पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, नदिया से प्याज आकर बांग्लादेश के विभिन्न स्थानों में जा रहा है. प्रत्येक ट्रक में 16 टन प्याज जा रहा है. यानी प्रत्येक दिन भारत से बांग्लादेश में 640 टन प्याज निर्यात हो रहा है. बीते पांच दिनों में भारत से बांग्लादेश में 3200 टन प्याज भेजे गये.


बांग्लादेश में प्याज निर्यात का अंतरराष्ट्रीय दर 405 डॉलर प्रति टन था, यानी भारतीय रुपये में 26 रुपये प्रति किलो. स्वाभाविक रूप से बांग्लादेश के खुदरा बाजार में प्याज की बिक्री भारतीय 33 रुपये प्रति किलो के हिसाब से हो रही है. आज से प्याज के निर्यात के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय दर बढ़ा कर 705 डॉलर प्रति टन कर दिया गया है, इसके बाद भी बांग्लादेश में वर्तमान में प्याज की कीमत खुदरा बाजार में 50 रुपये प्रति किलो मंे ही सीमित है. कस्टम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बीते 22 अगस्त को भारत से 33 ट्रक प्याज बांग्लादेश गया है. 23 अगस्त को 33 ट्रक व 24 अगस्त को 49 ट्रक प्याज बांग्लादेश में निर्यात किये गये.

आज यह परिमाण बढ़ कर 60 ट्रक हो गया है. एक्सपोर्टरों ने बताया कि केंद्र सरकार की संस्था नैफेड, एनसीसीएफ जैसे चार-पांच संस्था देश के उत्पादन को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय निर्यात का मूल्य निर्धारण करता है. यह मूल्य निर्यात शुरू होने के कुछ महीने पहले ही तय हो गया था. जिस कारण देश में प्याज की कीमत बढ़ने पर भी एक्सपोर्टरों को नुकसान स्वीकार करते हुए प्याज निर्यात का काम जारी रखना होगा. एक्सपोर्टरों का कहना है कि केंद्र सरकार चाहे तो प्याज निर्यात के क्षेत्र में लगाम लगा सकती है.
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