सरकारी रुख से चिकित्सकों में खौफ

Updated at : 10 Aug 2014 6:32 AM (IST)
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सरकारी रुख से चिकित्सकों में खौफ

सिलीगुड़ी : राज्य सरकार के खौफ से उत्तर बंगाल के सरकारी चिकित्सक काफी आतंकित हैं. इंसेफलाइटिस को लेकर सरकार की गाज पिछले दिनों चार-पांच स्वास्थ अधिकारियों पर गिरी थी. राज्य सरकार ने जलपाईगुड़ी व दाजिर्लिंग जिला के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के अधीक्षक, प्रिंसिपल व अन्य एक प्रोफेसर […]

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सिलीगुड़ी : राज्य सरकार के खौफ से उत्तर बंगाल के सरकारी चिकित्सक काफी आतंकित हैं. इंसेफलाइटिस को लेकर सरकार की गाज पिछले दिनों चार-पांच स्वास्थ अधिकारियों पर गिरी थी.

राज्य सरकार ने जलपाईगुड़ी व दाजिर्लिंग जिला के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के अधीक्षक, प्रिंसिपल व अन्य एक प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया था. एक के बाद एक उत्तर बंगाल के सरकारी चिकित्सकों की जा रही नौकरी के बाद अन्य चिकित्सकों को भी सस्पेंड होने की चिंता सताने लगी है.

इसके कारण चिकित्सक सही तरीके से ड्यूटी नहीं कर पा रहे हैं. सरकार के बलि का बकरा बनें, उससे पहले ही कई चिकित्सक नौकरी छोड़ने के मूड में हैं. सरकारी चिकित्सकों की संस्था एसोसिएशन फोर हेल्थ सर्विस डॉक्टर्स उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल यूनिट के अध्यक्ष डॉक्टर शंकर कविराज ने कहा कि एक के बाद एक सस्पेंड के मामले ने चिकित्सकों का मनोबल तोड़ दिया है.

अधिकांश चिकित्सक निराश हो चुके हैं. सभी कहने लगे हैं कि अब काम करने में मन नहीं लग रहा.इस संबंध में एक अन्य सरकारी डॉक्टर ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर कहा कि मुंह खोला कि सस्पेंड हुए, इसी का आतंक अब चिकित्सकों में बैठ गई है. वामपंथी चिकित्सक संगठन के एक नेता व चिकित्सक सस्पेंड की घटना के बाद छुट्टी पर चले गये हैं. वहीं तृणमूल कांग्रेस चिकित्सक संगठन के नेता व चिकित्सक भी अब कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं.

उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के वर्तमान अधीक्षक डॉक्टर सव्यसाची दास के पिछले वर्ष तृणमूल कांग्रेस चिकित्सक संगठन के राज्य स्तर के नेताओं के हाथों अपमानित होने का मामला सुर्खियों में छाया था. इसके बाद ही उन्होंने अधीक्षक पद छोड़ दिया था. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के एक चिकित्सक को भी कुछ दिनों पहले कालिम्पोंग तबादला कर दिया गया था.

अधिकांश चिकित्सकों का कहना है कि वाम मोरचा के एक महासम्मेलन में शामिल होने की सजा सत्तासीन तृणमूल सरकार उन्हें दे रही है. वामपंथी एक चिकित्सक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बहुत जल्द वह भी इस्तीफा देने के मूड में हैं. चिकित्सकों का कहना है कि बीते वर्ष इंसेफलाइटिस व डेंगू से 115 लोगों की मौत हुई थी.

इस मामले में चिकित्सकों द्वारा मुंह न खोलने पर सरकार चुपचाप थी, लेकिन इस बार मौत के आंकड़े चिकित्सकों के मुंह खोले जाने के बाद सरकार आक्रामक हो गई. चिकित्सकों का कहना है कि सरकार अपनी गलतियों और लापरवाही को छुपाने के लिए चिकित्सकों को बलि का बकरा बना रही है.ऐसे भी राज्य सरकार ने इंसेफलाइटिस पर किसी भी डाक्टर को बयान देने के लिए मना कर दिया है.अब इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य निदेशक कोलकाता में बयान देते हैं.

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