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बेलघर कांड में गृह सचिव समेत जिला प्रशासन को तलब कर सकता आयोग

Updated at : 13 Jan 2020 3:49 AM (IST)
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बेलघर कांड में गृह सचिव समेत जिला प्रशासन को तलब कर सकता आयोग

कुमारगंज : दक्षिण दिनाजपुर जिले के बेलघर कांड ने अब तूल पकड़ना शुरु किया है. रविवार को अनुसूचित जाति आयोग का चार सदस्यीय प्रतिनिधिदल दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर ब्लॉक अंतर्गत पंचग्राम स्थित पीड़ित परिवार के गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. हालांकि पीड़ित परिवार के लोगों से गैरमौजूदगी के चलते भेंट नहीं हो सकी. […]

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कुमारगंज : दक्षिण दिनाजपुर जिले के बेलघर कांड ने अब तूल पकड़ना शुरु किया है. रविवार को अनुसूचित जाति आयोग का चार सदस्यीय प्रतिनिधिदल दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर ब्लॉक अंतर्गत पंचग्राम स्थित पीड़ित परिवार के गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. हालांकि पीड़ित परिवार के लोगों से गैरमौजूदगी के चलते भेंट नहीं हो सकी.

इसलिये प्रतिनिधियों ने गांववालों से घटना की जानकारी ली. प्रतिनिधिदल ने कहा है कि दोषी कानून के शिकंजे से बच नहीं सकेंगे. हर हाल में उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलायी जायेगी. इस मामले में राज्य सरकार की विफलता का उल्लेख करते हुए प्रतिनिधिदल ने चेतावनी दी है कि डीजीपी से लेकर राज्य के गृह सचिव, जिलाधिकारी और एसपी को आयोग तलब कर सकता है.
मृतका के परिवारवालों के साथ खड़े होकर आयोग ने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिये पुलिस और प्रशासन से हरसंभव उपाय करने के निर्देश दिये हैं. ऐसा नहीं करने पर उन्हें भी कानून का सामना करना पड़ सकता है. इसके लिये आयोग ने सात रोज की मोहलत जिला प्रशासन को दी है.
उल्लेखनीय है कि दुष्कर्म के बाद युवती की हत्या कर उसे आततायियों ने जला दिया था. आयोग आज सुबह गंगारामपुर के पंचग्राम स्थित मृतका के घर जाकर लोगों से बात की. इस मौके पर आयोग के साथ बालुरघाट से सांसद सुकांत मजुमदार, एसपी देवर्षि दत्त और अन्य पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे. हालांकि मृतका के माता पिता और बड़ा भाई नहीं थे. इस पर आयोग ने नाराजगी जतायी है.
आयोग के पश्चिमबंग एवं पूर्वोत्तर जोन के प्रभारी डॉ. जोगेश पासवान ने बताया कि यह एक निकृष्टतम और निंदनीय घटना है. तीन अभियुक्तों को कानूनी रास्ते से सजा दिलोन के लिये जो जो कानूनी प्रक्रिया है उसका अनुपालन किया जाना चाहिये. शनिवार को आयोग की टीम ने सर्किट हाउस में जिलाधिकारी, एसपी के साथ बैठक कर मामले की प्रगति की समीक्षा की.
वहीं पर यह स्पष्ट निर्देश दिया गया कि एससी,एसटी एक्ट की धारा 325 और 31डब्ल्यू-2 के तहत कानूनी मामले दर्ज किये जायें. कोई भी अपराधी बच नहीं पायेगा. टीम ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अनु. जाति और जनजाति के समुदायों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है. टीम ने पीड़ित परिवार को भी पर्याप्त सुरक्षा देने के लिये कहा है जो किसी सुरक्षित ठिकाने में हैं.
एसपी को सात रोज के भीतर मामले में अभियोगपत्र जमा देने के लिये कहा गया है. गौरतलब है कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार को राहत के तौर पर 4,12,500 रुपये का चेक दिया है. उसी तरह केंद्र सरकार ने भी उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर के अलावा तीन माह का राशन ब्लॉक प्रशासन को देने के लिये निर्देशित किया है.
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