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उत्तर बंगाल में भी दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें

Updated at : 10 Jan 2020 2:27 AM (IST)
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उत्तर बंगाल में भी दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें

एनजेपी से 15 जनवरी तक इलेक्ट्रिक ट्रेन शुरू होने की संभावना शुरुआत में तीन एक्सप्रेस और एक पैसेंजर ट्रेनें दौड़ेंगी बंगाल से सटे बिहार के रेल यात्रियों को भी मिलेगी सुविधा सिलीगुड़ी : नये साल पर उत्तर बंगाल को रेलवे से नयी सौगात मिलने जा रही है. इसके तहत आगामी 15 जनवरी तक इलेक्ट्रिक ट्रेन […]

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एनजेपी से 15 जनवरी तक इलेक्ट्रिक ट्रेन शुरू होने की संभावना

शुरुआत में तीन एक्सप्रेस और एक पैसेंजर ट्रेनें दौड़ेंगी
बंगाल से सटे बिहार के रेल यात्रियों को भी मिलेगी सुविधा
सिलीगुड़ी : नये साल पर उत्तर बंगाल को रेलवे से नयी सौगात मिलने जा रही है. इसके तहत आगामी 15 जनवरी तक इलेक्ट्रिक ट्रेन शुरु होने की संभावना है. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने शुरुआत में तीन एक्सप्रेस और एक पैसेंजर ट्रेन दौड़ाने का निर्णय लिया है.
यह निर्णय कुछ दिनों पहले ही ट्रायल रन के बाद रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद लिया गया है. न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी) जंक्शन से परिचालन होनेवाली इलेक्ट्रिक ट्रेनों के शुरु होने से उत्तर बंगाल की सीमाओं से सटे बिहार के किशनगंज जिले व अन्य इलाकों के रेल यात्रियों के लिए भी सुविधा बढ़ जायेगी.
हाथियों की मौत रोकने को भी रेलवे ने लिए कई अहम निर्णय
डुआर्स के जंगलों में ट्रेनों से कटकर होनेवाली हाथियों की मौत रोकने के लिए भी पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने कई अहम निर्णय लिया है. इसके तहत तीन एक्सप्रेस ट्रेनों का रूट परिवर्तन किया गया है और लोकल ट्रेनों की रफ्तार काफी धीमा करने का सिद्धांत लिया गया है. इसकी वजह अलिपुरद्वार-सिलीगुड़ी रेलमार्ग रूट में बहुत से जगहों पर ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ है. यह रेल मार्ग डुआर्स के विभिन्न जंगलों से होकर गुजरता है.
अधिकांश समय हाथियों व अन्य जंगली-जानवरों के रेलमार्ग से विचरण करने के दौरान दुरगामी ट्रेनों को घंटों-घंटों जंगल में रोकना मजबूरी हो जाती है. विदित हो कि अभी तक ट्रेन से कटकर सैकड़ों हाथियों और अन्य जंगली-जानवरों की मौत हो चुकी है.
इस पर रोक लगाने और जरूरी कदम उठाने के लिए पर्यावरण-पशु प्रेमी संगठनों ने कई बार रेलवे अधिकारियों से गुहार भी लगायी. साथ ही रेलवे और वन विभाग के साथ कई बार मीटिंग भी की गयी. यहीं वजह है कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने इस रूट से होकर गुजरनेवाली दुरगामी ट्रेनों का रूट ही परिवर्तन कर दिया है. इसके तहत डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी विवेक एक्सप्रेस, न्यू तिनसुकिया-राजेंद्रनगर एक्सप्रेस व न्यू तिनसुकिया-बैंगुलुरू एक्सप्रेस इन तीनों ट्रेन अप-डाउन दोनों का ही रूट परिवर्तन किया गया है.
इस बारे में जानकारी देते हुए अलीपुरद्वार के डीआरएम केएस जैन ने बताया कि अब ये तीन दुरगामी ट्रेन असम से होते हुए न्यू अलिपुरद्वार-न्यू कूचबिहार-माथाभांगा-जलपाईगुड़ी रोड होते हुए एनजेपी होकर आवागमन करेगी. वहीं डुआर्स से होकर गुजरनेवाली अन्य ट्रेनों का रफ्तार कम करते हुए 25-40 किमी प्रति घंटा रखने का सिद्धांत लिया गया है.
वहीं वन्य-प्राणी प्रेमी संगठन ‘नैफ’ के संयोजक अनिमेष बसु ने कहा कि यह काफी खुशी की बात है कि रेलवे ने डुआर्स से होकर गुजरनेवाली तीन दुरगामी ट्रेनों का रूट परिवर्तन कर दिया है और अन्य ट्रेनों का रफ्तार कम करने का सिद्धांत लिया है. देर से ही सही लेकिन हमारा वर्षों का प्रयास सफल हुआ. 15-20 वर्षों से अब-तक ट्रेन से कटकर सैकड़ों हाथियों व अन्य जंगली-जानवरों की मौत हो चुकी है.
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