हाट में चाय श्रमिकों को रूला रही प्याज की कीमत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Nov 2019 2:32 AM
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सब्जियों की बढ़ती कीमतों से घरेलू बजट गड़बड़ाया कई दुकानदारों ने बंद की प्याज की बिक्री नागराकाटा : लगातार बढ़ रही प्याज की कीमतों ने चाय श्रमिकों के घर का बजट बिगाड़ दिया है. श्रमिक अब प्याज खरीदने से भी कतरा रहे हैं. प्रत्येक रविवार को डुआर्स के विभिन्न चाय बागानों में साप्ताहिक बाजार लगता […]
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सब्जियों की बढ़ती कीमतों से घरेलू बजट गड़बड़ाया
कई दुकानदारों ने बंद की प्याज की बिक्री
नागराकाटा : लगातार बढ़ रही प्याज की कीमतों ने चाय श्रमिकों के घर का बजट बिगाड़ दिया है. श्रमिक अब प्याज खरीदने से भी कतरा रहे हैं. प्रत्येक रविवार को डुआर्स के विभिन्न चाय बागानों में साप्ताहिक बाजार लगता है. सप्ताहभर चाय बागानों में कड़ी मेहनत करने के बाद रविवार को घर के लिए एक सप्ताह तक राशन समेत अन्य सामान खरीदने के लिए श्रमिकों की भीड़ हाट में उमड़ती है. लेकिन अभी हाट बाजारों में जिस तरह से साग-सब्जियों का दाम आसमान छू रहा है,उसके कारण चाय श्रमिक आधा झोला ही समान लेकर घर लौटते दिखाई दे रहे हैं.
हाट बाजार में साग और सब्जियों की कीमतों में जिस तरह आग लगा हुआ है, उससे निन्न आय वाले चाय श्रमिकों स्थिति खारब हो गयी है. बाजार में खासकर प्याज का कीमत सौ रुपये किलो के निकट पहुंच गया है. जिसका मार चाय श्रमिकों के साथ-साथ अन्य लोगों पर भी पड़ रहा है.
प्रभात खबर की ओर से बाजार में सब्जियों के भाव की जानकारी लेने के दौरान ग्राहकों से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार वर्तमान बाजार में प्याज का मूल्य काफी बढ़ा हुआ है. प्याज खरीदने के लिए दुकानदार से प्याज का मूल्य सुनने के बाद ग्रासमोड़ चाय बागान के एक श्रमिक पवन खडिया ने बताया कि प्याज का भाव जिस तरह है, उसे सुनकर ही आंख से आंसु निकलता है. चाय श्रमिक किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते हैं.
उन्होंने बताया कि केवल प्याज का दाम ही नहीं, अन्य सब्जियों के दाम भी तीन गुणा बढ़ गये हैं. हम चाय श्रमिक कड़ी मेहनत करने के बाद दैनिक 176 रुपया कमाई करते हैं. उस पैसे से हम दाल-चावल खरीदें या सब्जी. यह कहते हुए उन्होने चिंता प्रकट की.
लुकसान बाजार में धुपगुड़ी से आए सब्जी विक्रेता अमुल दत्त ने बताया कि बाजार में बाजार का भाव और चाय श्रमिकों की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए मैंने प्याज की बिक्री ही बंद कर दी है.
इस तरह अचानक मूल्य वृद्धि ने चाय श्रमिक वर्ग को आर्थिक चपेट में लिया है. मालूम हो कि लुकसान हाट सहित इसके निकट स्थित छह चाय बागानों के चाय श्रमिक प्रत्येक सप्ताह रविवार हाट करने के लिए आते हैं. लेकिन इस सप्ताह बाजार में मुल्य वृद्धि के कारण अन्य सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह लोगों की भीड़ कम हो गयी है.
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