भव्य स्वरूप में दिखेगा पंचमुखी बालाजी सिद्धपीठ : रमेश चचान

Updated at : 13 Oct 2019 1:40 AM (IST)
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भव्य स्वरूप में दिखेगा पंचमुखी बालाजी सिद्धपीठ : रमेश चचान

पवन अग्रवाल, सिलीगुड़ी : श्री पंचमुखी बालाजी संकटमोचन सिद्धपीठ की महिमा अपरंपार है. शहर के बाबूपाड़ा-मिलनपल्ली स्थित श्री पंचमुखी बालाजी धाम में श्री बालाजी की असीम कृपा है. ये बातें बालाजी के भक्त सह धाम के संस्थापक व व्यवस्थापक रमेश चाचान ने शनिवार को प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में कहीं. उन्होंने बताया कि […]

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पवन अग्रवाल, सिलीगुड़ी : श्री पंचमुखी बालाजी संकटमोचन सिद्धपीठ की महिमा अपरंपार है. शहर के बाबूपाड़ा-मिलनपल्ली स्थित श्री पंचमुखी बालाजी धाम में श्री बालाजी की असीम कृपा है. ये बातें बालाजी के भक्त सह धाम के संस्थापक व व्यवस्थापक रमेश चाचान ने शनिवार को प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में कहीं.

उन्होंने बताया कि इस सिद्धपीठ में जो भक्त सच्चे मन से बाबा के पास मन्नतें की, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा. श्री चाचान का कहना है कि यहां जो भी भक्त बाबा की पूजा-अर्चना कर गट यानी सूखा नारियल बांधकर मन्नतें करता है, उसकी हर मनोकामना बाबा जल्द पूरी कर देते हैं.
उन्होंने कहा कि इस सिद्धपीठ में केवल सिलीगुड़ी या उत्तर बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश व अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दर पर मत्था टेकतें हैं और अपनी हर मनोकामना पूरी करते हैं.
11 मंदिरों का हो रहा निर्माण
रमेश चाचान का कहना है कि इस सिद्धपीठ को विराट स्वरूप में तब्दील किये जाने के लिए युद्धस्तर पर दिन-रात कार्य चल रहा है. राजस्थान, गुजरात, बंगाल के कृष्णनगर व असम के दक्ष कारीगरों द्वारा सिद्धपीठ को भव्य रूप दिया जा रहा है. बाबा की अनुकंपा से यहां विभिन्न देवी-देवताओं के कुल 11 मंदिरों का निर्माण हो रहा है. मंदिर में कलाकृति निर्माण एतिहासिक व राजस्थानी मंदिरों की तर्ज पर की जा रही है. जल्द ही इस भव्य मंदिरों का शुभ उद्घाटन की तारीख तय कर दी जायेगी.
सिद्धपीठ का इतिहास
श्री पंचमुखी बालाजी संकटमोचन सिद्धपीठ का इतिहास मात्र 14 वर्ष पुराना है. रमेश चाचान ने 2005 में अक्षय तृतीया के दिन शहर के बाबूपाड़ा-मिलनपल्ली स्थित थिरानी मिल कंपाउंड के एक बड़े हिस्से में मंदिर की नींव डाली थी. श्री चाचान की मानें तो नींव डाले जाने के समय कुछ गिने-चुने भक्त ही इस सिद्धपीठ से जुड़े हुए थे. समय के साथ कारवां इतना लंबा हो गया कि आज यह सिद्धपीठ वटवृक्ष के रूप में अपना स्वरूप बना चुका है.
धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम का होता है आयोजन
रमेश चाचान ने बताया कि इस सिद्धपीठ में फिलहाल वर्ष भर कई धार्मिक, सामाजिक, सालगिरह, जन्मदिन की पार्टी व विवाहोत्सव आदि का आयोजन होते रहता है.
इसके लिए अत्याधुनित सुख-सुविधाओं से युक्त वातानुकूलित कई कमरें, लगभग 15 हजार वर्गफीट की सत्संग वाटिका, 2500 वर्गफीट का मंगल प्रांगण के साथ ही हॉल घर, जेनरेटर, रसोई घर, भंडार गृह, लिफ्ट आदि के अलावा 50 से भी अधिक वाहनों के एक साथ पार्किंग की समुचित व्यवस्था है.
श्री चाचान का कहना है कि इस सिद्धपीठ में वर्ष में दो बार हनुमान महोत्सव (चैत सुदी पूर्णिमा में जयंती व आसोज सूदी पूर्णिमा में महोत्सव) के अलावा 365 दिन श्रीराम कथा, सामूहिक सुंदरकांड पाठ, श्रीमद्भागवत कथा, अन्य देवी-देवताओं के जागरण, भजन-कीर्तन आदि धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं. श्री चाचान ने बाबा के हर भक्तों से इस सिद्धपीठ के निर्माण कार्य में अपना तन-मन-धन से विशेष सहयोग करने की अपील की है.
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