जयगांव में बुखार का कहर, फिर दो बच्चे मरे

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Aug 2019 1:32 AM

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अगस्त में इलाके के चार बच्चों की जा चुकी है जान अलीपुरद्वार जिला अस्पताल पर लगा लापरवाही का आरोप जयगांव : अलीपुरद्वार जिले में भारत-भूटान सीमा पर स्थित जयगांव के ग्रामीण इलाके में बुखार का कहर जारी है. अगस्त माह में बुखार से पीड़ित चार बच्चों की मौत के बाद यहां आतंक का माहौल है. […]

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अगस्त में इलाके के चार बच्चों की जा चुकी है जान

अलीपुरद्वार जिला अस्पताल पर लगा लापरवाही का आरोप
जयगांव : अलीपुरद्वार जिले में भारत-भूटान सीमा पर स्थित जयगांव के ग्रामीण इलाके में बुखार का कहर जारी है. अगस्त माह में बुखार से पीड़ित चार बच्चों की मौत के बाद यहां आतंक का माहौल है. शुक्रवार को दो बच्चों की मौत की खबर मिली. जयगांव-1 ग्राम पंचायत के हाटखोला वार्ड की छात्रा काजल विश्वा (11) की मौत अलीपुरद्वार जिला अस्पताल ले जाते समय हो गयी.
इसके अलावा, जयगांव के ही चार वर्षीय बच्चे जॉनसन दर्जी की मौत अलीपुरद्वार जिला अस्पताल में इलाज के दौरान हो गयी. इससे पहले अगस्त महीने में ही बीडी मेमोरियल स्कूल व संत एंथोनी स्कूल के दो विद्यार्थियों की मौत बुखार से हो चुकी है.
हाटखोला के समाजसेवी गोपाल बहादुर सुएल ने बताया कि संत पाल स्कूल में कक्षा पांच में पढ़नेवाली काजल विश्वा की मौत अलीपुरद्वार अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गयी. उन्होंने बताया कि बच्ची का करीब एक सप्ताह तक गोपी मोहन स्वास्थ्य केंद्र में उपचार किया जा रहा था, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं होने पर उसे जयगांव से 65 किलोमीटर दूर अलीपुरद्वार जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था. लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी. उन्होंने कहा कि जयगांव स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर हैं, जो जयगांव की जनसंख्या के अनुपात में कम हैं. उन्होंने इस केंद्र में सरकार की ओर से लापरवाही का आरोप लगाया.
जानकरी के मुताबिक, जॉनसन दर्जी को गुरुवार को अलीपुरद्वार जिला अस्पताल के स्पेशल नियोनेटल केयर यूनिट में भर्ती किया गया था. परिवार ने उसकी मौत के लिए अस्पताल की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है. परिवार के विरोध जाहिर करने पर स्थिति को संभालने के लिए अस्पताल प्रशासन ने पुलिस बुलवा ली.
बच्चे के दादा पद्म द्रुकपा ने बताया कि गुरुवार शाम तक बच्चा ठीक ही था. शुक्रवार को जब मैं घर से अस्पताल आया, तो देखा कि वह लगातार रो रहा है. नर्स को बोला, लेकिन उसने कोई महत्व नहीं दिया. उल्टे मुझे वार्ड से बाहर जाने को कहा. शाम होते-होते बच्चे की मौत हो गयी. परिवार ने बताया कि अस्पताल के खिलाफ चिकित्सीय लापरवाही का मामला दर्ज कराया जायेगा.
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