तलाशी में रोड़ा बनी भारी बारिश

Updated at : 24 Jul 2019 1:57 AM (IST)
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तलाशी में रोड़ा बनी भारी बारिश

सिलीगुड़ी : चौदहवें दिन नौसेना व एनडीआरएफ की संयुक्त टीम तीस्ता में तलाशी अभियान नहीं चला सकी. मंगलवार को दोपहर बाद कुछ देर के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. मंगलवार को तलाशी नहीं होने से पीड़ित परिजन हताश जरूर हुए, मगर नाउउम्मीद नहीं हुए हैं. बीते सोमवार को तलाशी अभियान बंद […]

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सिलीगुड़ी : चौदहवें दिन नौसेना व एनडीआरएफ की संयुक्त टीम तीस्ता में तलाशी अभियान नहीं चला सकी. मंगलवार को दोपहर बाद कुछ देर के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. मंगलवार को तलाशी नहीं होने से पीड़ित परिजन हताश जरूर हुए, मगर नाउउम्मीद नहीं हुए हैं.

बीते सोमवार को तलाशी अभियान बंद करने के बाद एनएचपीसी के तीस्ता लौ डैम प्रोजेक्ट प्रबंधन ने भी डैम का फाटक खोल दिया. वहीं दूसरी तरफ सोमवार की रात से ही सिक्किम में भारी बारिश हो रही है. मंगलवार को भी सिक्किम के कई इलाकों में काफी बारिश हुयी है. जल के अत्यधिक दबाव की वजह से एनएचपीसी प्रबंधन मंगलवार को डैम का फाटक बंद नहीं किया.
वैसे ही तीस्ता नदी की धारा काफी तेज है. भारी बारिश व नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से मंगलवार को तीस्ता का तेवर और भी भयानक दिखा. नौसेना और एनडीआरएफ की टीम अत्याधुनिक उपकरणों के साथ मंगलवार को भी तलाशी अभियान चलाने को तैयार थी. लेकिन जलस्तर व प्रचंड धारा देखकर नदी में उतरने का साहस नहीं जुटा पायी.
दोपहर बाद सेवक पुलिस थाने के पीछे से तीस्ता नदी में तलाशी शुरू की गयी, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. सूत्रों की माने तो दुर्घटना के तीसरे दिन स्थानीय राफ्टिंग टीम द्वारा गाड़ी को स्पॉट किया गया था. लेकिन उसे निकालना संभव नहीं हो सका. पहाड़ी नदी होने और लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से तीस्ता में काफी सिल्ट जमा हो गया है.
लापता हुयी गाड़ी के उपर 10 फीट से अधिक की सिल्ट जमा होने की आशंका जतायी जा रही है. जबकि तीस्ता के पेट की गहराई 50 फीट से अधिक आंकी जा रही है. ऐसी स्थिति में तलाशी के लिए जलस्तर को 30 फीट कम करना आवश्यक है. जबकि बीते सोमवार को एनएचपीसी ने डैम का गेट करीब चार घंटे के लिए बंद किया था.
जिससे 15 फीट के करीब जलस्तर घटने का आकलन किया गया. इतनी तेज धारा वाली पहाड़ नदी के पेट में 8 से 10 फीट का सिल्ट काटना भी नामुमकिन ही है. काफी मोटी सिल्ट जमने की वजह से ही दुबारा गाड़ी को स्पॉट करना संभव नहीं हो पा रहा है. हालांकि नौसेना कई अत्याधुनिक उपकरणों के साथ तलाशी में जुटी है.
इधर, दिन पर दिन गुजरने से पर्यटकों के परिजनों की समस्या गहराती जा रही है. लापता गाड़ी व लोगों के न मिलने से बीमा व मुआवजा मिलने में भी पीड़ित परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. नियमानुसार लापता लोगों को सात वर्ष बाद मृत घोषित किया जाता है.
इस नियम के मुताबिक लापता दो पर्यटक व गाड़ी चालक को भी मृत घोषित होने में सात वर्ष का समय लगेगा. वहीं गाड़ी बरामद नहीं होने से भी गाड़ी मालिक को बीमा की रकम हासिल करने के लिए सात वर्ष का इंतजार करना होगा.
लेकिन राज्य सरकार व प्रशासन की सहायता से इसका समाधान किया जा सकता है. बीमा सलाहकार सुजीत कुमार ठाकुर ने बताया कि वैसे को लापता लोगों को सात वर्ष बाद मृत घोषित करने का प्रावधान है. लापता गाड़ियों के लिए भी सात वर्ष का प्रावधान है. लेकिन यह घटना थोड़ी अलग है.
क्योंकि इस घटना के कई प्रत्यक्षदर्शी हैं. पुलिस प्रशासन व सरकार भी इस हादसे के साक्षी हैं. लापता लोगों व गाड़ी का बीमा पुलिस प्रशासन के एफआरटी रिपोर्ट पर आधारित है. मीडिया, पुलिस प्रशासन, तलाशी अभियान चला रही एनडीआरएफ व नौसेना की रिपोर्ट पर सरकार की अनुमति से एफआरटी रिपोर्ट बनाना होगा.
एफआरटी रिपोर्ट से लापता लोगों की मौत होने की पुष्टि होती है तो उस रिपोर्ट के आधार पर बीमा की रकम परिवार वालों को मुहैया करायेगी जायेगी. जबकि उसी गाड़ी में सवार एक पर्यटक का शव बरामद भी हुआ है. यहां बता दे कि बीते 10 जुलाई को बागडोगरा से सिक्किम को जा रही एक इनोवा कार दुर्घटना का शिकार होकर सेवक के पास तिस्ता में समा गयी.
गाड़ी में तीन राजस्थानी पर्यटक गौरव शर्मा, गोपाल नारवानी व अमन गर्ग के साथ गाड़ी चालक राकेश राई सवार थे. अमन गर्ग का शव घटनास्थल से तीस किलोमीटर दूर गाजलडोबा तिस्ता बैरेज से बरामद किया गया था. जबकि अन्य तीन का शव नहीं मिल पाया है.
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