हल लेकर अपनी जमीन पर पहुंचे किसान, शुरू की खेती
Updated at : 11 Jun 2019 2:12 AM (IST)
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गाजलडोबा : महिलाओं ने गुलाल लगा मनाया जश्न पुलिस ने किसानों को रोकने का नहीं किया प्रयास जलपाईगुड़ी : तय कार्यक्रम के मुताबिक गाजलडोबा के मिलनपल्ली इलाके के किसानों ने अपने पट्टा की जमीन पर सोमवार को खेती शुरू कर दी. जश्न के माहौल में किसानों ने काम चालू किया. एक-दूसरे को गेरुआ अबीर लगाकर […]
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गाजलडोबा : महिलाओं ने गुलाल लगा मनाया जश्न
पुलिस ने किसानों को रोकने का नहीं किया प्रयास
जलपाईगुड़ी : तय कार्यक्रम के मुताबिक गाजलडोबा के मिलनपल्ली इलाके के किसानों ने अपने पट्टा की जमीन पर सोमवार को खेती शुरू कर दी. जश्न के माहौल में किसानों ने काम चालू किया. एक-दूसरे को गेरुआ अबीर लगाकर जीत का जश्न मनाया. किसानों ने कहा कि जमीन अधिग्रहण से सरकार का पीछे हटना हमारी नैतिक विजय है.
किसानों ने अपनी सामूहिक ताकत का एहसास करा दिया. सुबह 200 से अधिक किसान रैली की शक्ल में ट्रैक्टर लेकर जयश्रीराम का उद्घोष करते हुए अपनी जमीन तक पहुंचे. बिना किसी बाधा-विघ्न के भारतीय जनता किसान मोरचा और गाजलडोबा मिलनपल्ली भूमि रक्षा कमेटी के नेतृत्व में किसानों ने खेती का काम शुरू किया गया.
उधर, पर्यटन मंत्री गौतम देव ने भाजपा पर जमीन को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पहले ही कह चुकी है कि किसानों की जमीन का पट्टा सही है तो राज्य सरकार उसका अधिग्रहण नहीं करेगी. इस बात को बार-बार दोहराने की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है? अगर किसानों ने सरकार की खास जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की होती तो उसके खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करता.
उल्लेखनीय है कि जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज ब्लॉक अंतर्गत मिलनपल्ली पुलिस फाड़ी के अंतर्गत मिलनपल्ली के गाजलडोबा में पर्यटन हब भोरेर-आलो के लिए हेलीपैड और कर्मचारियों के आवासन के लिए पर्यटन विभाग ने 3.46 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर वहां साइनबोर्ड लगाया था. लेकिन किसानों के दबाव के आगे प्रशासन को वहां से साइनबोर्ड हटाकर अपने मूल भू-खंड में ले जाना पड़ा. प्रशासन और पर्यटन मंत्री शुरु से कह रहे हैं कि अगर किसानों के पास जमीन का वैध पट्टा है तो राज्य सरकार उस जमीन का अधिग्रहण नहीं करेगी.
भारतीय जनता किसान मोरचा के जिलाध्यक्ष नवेंदु सरकार ने बताया कि आज जब किसान अपनी जमीन में खेती शुरू करने गये तो पुलिस प्रशासन की ओर से किसी तरह की बाधा नहीं दी गयी. अगर बाधा देते तो किसान अपना बलिदान देने के लिये तैयार थे. लेकिन पट्टा वाली जमीन राज्य सरकार को नहीं देते. इस बारे में जिला प्रशासन, भूमि सुधार विभाग और पर्यटन विभाग के किसी भी अधिकारी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
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