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दो साल बाद बेगारी से निजात पा घर आया परंतुश

Updated at : 09 Jun 2019 5:24 AM (IST)
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दो साल बाद बेगारी से निजात पा घर आया परंतुश

इंदौर में बिना मजदूरी दिये करायी गयी हाड़तोड़ मेहनत नागराकाटा : डुआर्स के बंद रेड बैंक चाय बागान के एक श्रमिक को दो साल की बेगारी के बाद प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के प्रयास से मुक्ति दिलायी गयी. 46 साल के श्रमिक परंतुश उरांव अब अपने परिवार के बीच हैं लेकिन दो साल तक इन्होंने […]

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इंदौर में बिना मजदूरी दिये करायी गयी हाड़तोड़ मेहनत

नागराकाटा : डुआर्स के बंद रेड बैंक चाय बागान के एक श्रमिक को दो साल की बेगारी के बाद प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के प्रयास से मुक्ति दिलायी गयी. 46 साल के श्रमिक परंतुश उरांव अब अपने परिवार के बीच हैं लेकिन दो साल तक इन्होंने जो तकलीफें और जिल्लत बंधुआ मजदूरी के दौरान झेली हैं, उसे याद कर वह आज भी सिहर उठते हैं. दो माह पूर्व परंतुश, चाय बागान के घासी लाइन श्रमिक मोहल्ले लौट आये थे.
परंतुश उरांव ने बताया कि अपने चार साथियों के साथ वह काम की तलाश में बेंगलुरु गये थे. वहीं पर एक व्यक्ति के माध्यम से उन्हें खुडगेल नामक जगह में चापाकल की फिटिंग का काम मिला. वहां उन्होंने देखा कि एजेंट को कंपनी के लोगों ने रुपये गिनकर दिये तो समझ में आया कि उन्हें कंपनी के हाथों बेच दिया गया है. इसकी आशंका के बाद उनके चार साथी वहां से किसी तरह भाग आये लेकिन सीधे-सादे परंतुश इस मानव तस्करों के चक्रव्यूह में फंस गये और दो साल तक घर वापस नहीं आ सके.
उसके बाद शुरू हुई हाड़तोड़ मेहनत. तड़के पांच बजे से लेकर रात 10 बजे तक काम करना पड़ता लेकिन इस दौरान एक भी रुपया नहीं मिला. जब भी घर आने की इच्छा जताते तो हर बार आजकल बोलकर टाल दिया जाता. जिस दिन उन्हें मुक्ति दिलायी गयी उस रोज उन्हें मजदूरी के एवज में एक लाख रुपये से अधिक का चेक दिया गया, लेकिन वह रकम आज तक उनके बैंक खाते में जमा नहीं हुई है. डेढ़ से दो माह हो गये हैं. उन्हें अब रुपये मिलने का भरोसा भी नहीं रहा.
परंतुश के लापता होने के बाद ही उनके दोनों बेटों ने परिवार के निर्वाह के लिये केरल जाकर काम करना शुरू किया. पीड़ित की पत्नी सविता ने बताया कि पति के लापता होने के बाद किस दुख-तकलीफ के साथ उन्होंने पांच बेटे बेटियों का पालन-पोषण किया,वही जानती हैं. न चाहते हुए भी उन्होंने बेटों को केरल जाने की अनुमति दी. आज उन्हीं की बदौलत घर चल रहा है. एक पक्का घर भी बनवा सकी हैं. दिसंबर में जब आयेंगे तो बाहर नहीं जाने दूंगी. उल्लेखनीय है कि परंतुश उरांव को मुक्ति दिलाने में दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट लीगल एंड फोरम की केंद्रीय कानूनी परिसेवा प्राधिकरण की मदद कारगर हुई थी.
परंतुश ने बताया कि पुलिस की मौजूदगी में ही इंदौर के एक स्वयंसेवी संगठन के प्रयास से उन्हें लेकर सात लोगों को बेगारी से मुक्ति मिली. बाकी छह अन्य राज्यों के निवासी थे. दार्जिलिंग डिस्ट्रिक्ट लीगल एड फोरम के पदाधिकारी अमित सरकार ने बताया कि पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिये प्रशासन से बातचीत की जायेगी.
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